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Pilibhit News: युद्ध की तपिश से कोलतार 5 से छह हजार प्रति टन महंगा
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मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग का हो रहा निर्माण संवाद
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पीलीभीत। ईरान-अमेरिका और इस्राइल युद्ध की तपिश से सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले कोलतार के दामों ने आग पकड़ ली है। पिछले 20 दिन में कोलतार प्रति टन पांच से छह हजार रुपये महंगा हो गया है। डिमांड के बाद आपूर्ति में 4-5 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि जिले में इसके चलते कोई निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हुआ है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से जिले में 100 करोड़ से अधिक धनराशि से कई स्थानों पर सड़कों का निर्माण और मरम्मत का कार्य चल रहा है। इनमें कुछ बड़े काम भी हैं। पश्चिम एशिया के हालातों का असर सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले कोलतार पर भी पड़ा है। इस वजह से कोलतार के दाम बढ़ गए हैं।
उधर, अचानक से बढ़ी महंगाई ने ठेकेदारों और कार्यदाई संस्था के लोगों को परेशान कर दिया है। बजट रिवाइज होने की स्थिति भी नहीं है। काम भी तय समय पर पूरा कराना है। भले ही जिले में सड़क निर्माण का कार्य अभी प्रभावित नहीं है, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रक्रिया अटकी है।
जिले में हो रहे ये निर्माण कार्य
- मझोला से ड्यूनीडैम जाने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है।
- कलीनगर मार्ग पर भी काम हो रहा है। माधोटांडा मार्ग की मरम्मत भी शामिल है।
- टनकपुर हाईवे के गड्ढे भरे जा रहे हैं। पूरनपुर, घुंघचाई, सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में भी संपर्क मार्गों का निर्माण चल रहा है।
- बीसलपुर और बरखेड़ा क्षेत्र में भी कई सड़कों पर काम चल रहा है।
मथुरा रिफाइनरी से आता है कोलतार
जिले में कोलतार की आपूर्ति मथुरा रिफाइनरी से होती है। लोनिवि के एक ठेकेदार ने बताया कि दो तरह का कोलतार आता है। प्रति ड्रम या टन के हिसाब से आपूर्ति होती है। एक ड्रम में 156 किलो कोलतार होता है। प्रति टन के हिसाब से 5500 से 6000 रुपये तक बढ़ गए हैं। यह बढ़ोतरी दो बार में हुई है। बताया कि आपूर्ति के लिए भी चार से पांच दिन इंतजार करना पड़ता है। समय से ही डिमांड लगाई जाती है।
जिले में कोलतार की कोई किल्लत नहीं है। निर्माण कार्यों पर कोई असर नहीं है। मझोला-ड्यूनी डैम मार्ग पर एक दिन पहले ही कोलतार का काम शुरू कराया गया है।- राजेश चौधरी, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग
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लोक निर्माण विभाग की ओर से जिले में 100 करोड़ से अधिक धनराशि से कई स्थानों पर सड़कों का निर्माण और मरम्मत का कार्य चल रहा है। इनमें कुछ बड़े काम भी हैं। पश्चिम एशिया के हालातों का असर सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले कोलतार पर भी पड़ा है। इस वजह से कोलतार के दाम बढ़ गए हैं।
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उधर, अचानक से बढ़ी महंगाई ने ठेकेदारों और कार्यदाई संस्था के लोगों को परेशान कर दिया है। बजट रिवाइज होने की स्थिति भी नहीं है। काम भी तय समय पर पूरा कराना है। भले ही जिले में सड़क निर्माण का कार्य अभी प्रभावित नहीं है, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रक्रिया अटकी है।
जिले में हो रहे ये निर्माण कार्य
- मझोला से ड्यूनीडैम जाने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है।
- कलीनगर मार्ग पर भी काम हो रहा है। माधोटांडा मार्ग की मरम्मत भी शामिल है।
- टनकपुर हाईवे के गड्ढे भरे जा रहे हैं। पूरनपुर, घुंघचाई, सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में भी संपर्क मार्गों का निर्माण चल रहा है।
- बीसलपुर और बरखेड़ा क्षेत्र में भी कई सड़कों पर काम चल रहा है।
मथुरा रिफाइनरी से आता है कोलतार
जिले में कोलतार की आपूर्ति मथुरा रिफाइनरी से होती है। लोनिवि के एक ठेकेदार ने बताया कि दो तरह का कोलतार आता है। प्रति ड्रम या टन के हिसाब से आपूर्ति होती है। एक ड्रम में 156 किलो कोलतार होता है। प्रति टन के हिसाब से 5500 से 6000 रुपये तक बढ़ गए हैं। यह बढ़ोतरी दो बार में हुई है। बताया कि आपूर्ति के लिए भी चार से पांच दिन इंतजार करना पड़ता है। समय से ही डिमांड लगाई जाती है।
जिले में कोलतार की कोई किल्लत नहीं है। निर्माण कार्यों पर कोई असर नहीं है। मझोला-ड्यूनी डैम मार्ग पर एक दिन पहले ही कोलतार का काम शुरू कराया गया है।- राजेश चौधरी, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग