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Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज... इमरजेंसी में 200 मरीजों का बोझ, तैनात सिर्फ एक डॉक्टर
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मेडिकल कॉलेज स्थित इमरजेंसी कक्ष। संवाद
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जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद भी इमरजेंसी सुविधाएं मरीजों के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं। इमरजेंसी में मरीजों का दबाव बढ़ रहा है लेकिन इलाज करने वाले मेडिकल अफसर के पद कम हो रहे हैं। पहले यहां तीन मेडिकल ऑफिसर तैनात थे, अब सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे 24 घंटे इमरजेंसी चल रही है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में औसतन प्रतिदिन 90 गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। 10 से अधिक मरीजों का मेडिकल कर चिकित्सक घर भेज देते हैं। दोपहर दो बजे के बाद ओपीडी के मरीज भी इमरजेंसी में पहुंचने लगते हैं। इस तरह रोजाना औसतन दो सौ के आसपास मरीजों का भार एक ही मेडिकल ऑफिसर पर है।
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर 2 साल के बांड पर आए जूनियर रेजिडेंट (जेआर) ही मरीजों का इलाज और मेडिकल कर रहे हैं। इमरजेंसी में एक भी बेड का आईसीयू या वेंटिलेटर वार्ड नहीं है। माइनर ओटी में सिर्फ मरहम-पट्टी की सुविधा है। ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर जेआर मरीजों को प्रयागराज रेफर कर देते हैं।
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वर्जन
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद इमरजेंसी में असुविधाएं बढ़ गई हैं। मेरे चचेरे भाई के पेट में दर्द होने पर इमरजेंसी में लेकर पहुंचा तो सीनियर डॉक्टर नहीं मिले। जेआर इलाज कर रहे हैं, मगर अभी दर्द से राहत नहीं मिली।
रामधन यादव, दहिलामऊ
.........
इमरजेंसी में न तो मेडिकल अफसर हैं और न ही सीनियर डॉक्टर। मेरी मां बीमार हैं। उनको लेकर अस्पताल आया तो पता चला कि अल्ट्रासाउंड कराना है। दोपहर बाद अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी अस्पताल में नहीं है।
- अशोक श्रीवास्तव, देवकली
.......
इनसेट-
नहीं हैं ये सुविधाएं
- आइसोलेशन रूम : संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अलग रखने की सुविधा।
- डीकंटैमिनेशन रूम : जहरीले पदार्थ या एसिड के शिकार मरीजों की सफाई के लिए।
- पांच बिस्तरों का गहन चिकित्सा कक्ष आईसीयू।
- आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर।
- प्लास्टर रूम, अल्ट्रासाउंड की सुविधा।
- मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, जनरल सर्जरी, और ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) के डॉक्टर।
वर्जन--
शासन के आदेश पर जेआर मेडिकल करने के साथ बेहतर इलाज भी कर रहे हैं। जरूरत पर एसआर इमरजेंसी के मरीजों का इलाज करने पहुंच जाते हैं। जनवरी से इमरजेंसी में सुविधाएं बढ़ जाएगी। - डॉ. सोमनाथ, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में औसतन प्रतिदिन 90 गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। 10 से अधिक मरीजों का मेडिकल कर चिकित्सक घर भेज देते हैं। दोपहर दो बजे के बाद ओपीडी के मरीज भी इमरजेंसी में पहुंचने लगते हैं। इस तरह रोजाना औसतन दो सौ के आसपास मरीजों का भार एक ही मेडिकल ऑफिसर पर है।
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एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर 2 साल के बांड पर आए जूनियर रेजिडेंट (जेआर) ही मरीजों का इलाज और मेडिकल कर रहे हैं। इमरजेंसी में एक भी बेड का आईसीयू या वेंटिलेटर वार्ड नहीं है। माइनर ओटी में सिर्फ मरहम-पट्टी की सुविधा है। ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर जेआर मरीजों को प्रयागराज रेफर कर देते हैं।
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वर्जन
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद इमरजेंसी में असुविधाएं बढ़ गई हैं। मेरे चचेरे भाई के पेट में दर्द होने पर इमरजेंसी में लेकर पहुंचा तो सीनियर डॉक्टर नहीं मिले। जेआर इलाज कर रहे हैं, मगर अभी दर्द से राहत नहीं मिली।
रामधन यादव, दहिलामऊ
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इमरजेंसी में न तो मेडिकल अफसर हैं और न ही सीनियर डॉक्टर। मेरी मां बीमार हैं। उनको लेकर अस्पताल आया तो पता चला कि अल्ट्रासाउंड कराना है। दोपहर बाद अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी अस्पताल में नहीं है।
- अशोक श्रीवास्तव, देवकली
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इनसेट-
नहीं हैं ये सुविधाएं
- आइसोलेशन रूम : संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अलग रखने की सुविधा।
- डीकंटैमिनेशन रूम : जहरीले पदार्थ या एसिड के शिकार मरीजों की सफाई के लिए।
- पांच बिस्तरों का गहन चिकित्सा कक्ष आईसीयू।
- आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर।
- प्लास्टर रूम, अल्ट्रासाउंड की सुविधा।
- मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, जनरल सर्जरी, और ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) के डॉक्टर।
वर्जन
शासन के आदेश पर जेआर मेडिकल करने के साथ बेहतर इलाज भी कर रहे हैं। जरूरत पर एसआर इमरजेंसी के मरीजों का इलाज करने पहुंच जाते हैं। जनवरी से इमरजेंसी में सुविधाएं बढ़ जाएगी। - डॉ. सोमनाथ, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।

मेडिकल कॉलेज स्थित इमरजेंसी कक्ष। संवाद