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Pratapgarh News: जंक्शन पर चार सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव नहीं होने से यात्री परेशान
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मां बेल्हा देवी धाम जंक्शन से होकर गुजरने वालीं चार सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव न होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों ने ट्रेनों के ठहराव के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधयों से मांग की है।
जंक्शन से गुजरने वाली कोलकाता-अमृतसर दुर्गायिनी एक्सप्रेस, वाराणसी-उज्जैन महाकाल एक्सप्रेस, वाराणसी-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और आनंद विहार-दानापुर जनसाधारण एक्सप्रेस का ठहराव नहीं होता है। इन ट्रेनों से सफर करने के लिए यात्रियों को वाराणसी के अलावा लखनऊ जाना पड़ता है। इससे समय और किराया दोनों बर्बाद हो रहा है।
यात्रियों का कहना है कि अगर जंक्शन पर ट्रेनों का ठहराव शुरू हो जाए तो आवागमन में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पूर्व में निरीक्षण करने के लिए जंक्शन आए डीआरएम को व्यापारी ज्ञापन देकर ट्रेनों के ठहराव की मांग कर चुके हैं।
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सप्ताह में दो बार दिल्ली जाना होता है। काशी विश्वनाथ और पद्मावत में जगह नहीं मिलती है। जनसाधारण का ठहराव जरूरी है।
अश्विनी केसरवानी, सराफ कारोबारी
महीने में एक बार परिवार के साथ उज्जैन जाता हूं। महाकाल एक्सप्रेस रुकती नहीं, इसलिए प्रयागराज से ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
शरद केसरवानी, पुस्तक विक्रेता
जनप्रतिनिधियों के मांग पत्र रेलवे बोर्ड को भेजे जाते हैं। ठहराव का निर्णय वहीं से होता है।
जेपी शुक्ल, स्टेशन अधीक्षक।
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जंक्शन से गुजरने वाली कोलकाता-अमृतसर दुर्गायिनी एक्सप्रेस, वाराणसी-उज्जैन महाकाल एक्सप्रेस, वाराणसी-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और आनंद विहार-दानापुर जनसाधारण एक्सप्रेस का ठहराव नहीं होता है। इन ट्रेनों से सफर करने के लिए यात्रियों को वाराणसी के अलावा लखनऊ जाना पड़ता है। इससे समय और किराया दोनों बर्बाद हो रहा है।
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यात्रियों का कहना है कि अगर जंक्शन पर ट्रेनों का ठहराव शुरू हो जाए तो आवागमन में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पूर्व में निरीक्षण करने के लिए जंक्शन आए डीआरएम को व्यापारी ज्ञापन देकर ट्रेनों के ठहराव की मांग कर चुके हैं।
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सप्ताह में दो बार दिल्ली जाना होता है। काशी विश्वनाथ और पद्मावत में जगह नहीं मिलती है। जनसाधारण का ठहराव जरूरी है।
अश्विनी केसरवानी, सराफ कारोबारी
महीने में एक बार परिवार के साथ उज्जैन जाता हूं। महाकाल एक्सप्रेस रुकती नहीं, इसलिए प्रयागराज से ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
शरद केसरवानी, पुस्तक विक्रेता
जनप्रतिनिधियों के मांग पत्र रेलवे बोर्ड को भेजे जाते हैं। ठहराव का निर्णय वहीं से होता है।
जेपी शुक्ल, स्टेशन अधीक्षक।