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रमजान भूखे रहने का नहीं बल्कि इबादत का महीना : मौलाना रईस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Feb 2026 11:11 PM IST
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Ramadan is not a month of hunger but a month of worship: Maulana Raees
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इस्लाम के पवित्र महीने रमजान का पहला जुमा शुक्रवार को पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम बहुल इलाकों की मस्जिदों में जुमा की दो रकात नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग व बच्चे मस्जिदों में पहुंचे। सभी ने अल्लाह से रमजान के पूरे रोजे रखने व गुनाहों से तौबा न करने की तौफीक की दुआ मांगी।
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शहर के सिप्तैन रोड जामा मस्जिद में मौलाना रईस अहमद ने कहा कि इस्लामिक कैलेंडर के 12 महीनों में रमजान का महीना सबसे पाक माना गया है। इस महीने में की जाने वाली हर इबादत (प्रार्थना) का सवाब 70 गुना अधिक मिलता है। उन्होंने रमजान के पूरे रोजे रखना फर्ज (जरूरी) बताया। कहा कि रोजा भूखा रहने का नहीं बल्कि इबादत का महीना है।
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रमजान के 30 रोजों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। रमजान के पहले 10 दिन रहमत वाले होते हैं, जब अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करते हैं। दूसरे 10 दिन बरकत के होते हैं, जिनमें अल्लाह रोजेदारों के कारोबार और कमाई में बरकत देते हैं। आखिरी 10 दिन मगफिरत वाले होते हैं। इन दिनों में अल्लाह रोजेदारों को उनके गुनाहों से छुटकारा देते हैं।
मौलाना ताजदार अहमद ने कहा कि जितना हो सके, अपना समय अल्लाह की इबादत में गुजारें, नमाज पढ़ें, कुरआन की तिलावत करें और बुरे कामों से दूर रहें।
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