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Raebareli News: जिले के नौ खातों में भेजे गए साइबर ठगी के 15 करोड़
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:09 AM IST
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पुलिस लाइन स्थित साइबर क्राइम पुलिस थाना।
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रायबरेली। देश के साइबर अपराधियों का कनेक्शन एक बार फिर रायबरेली से होने का खुलासा हुआ है। नौ राज्यों से रायबरेली के नौ बैंक खातों में साइबर ठगी के 15 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। मिर्च कारोबार के जरिये शादाब अली देश के साइबर अपराधियों से मिलकर दो साल से यह खेल कर रहा था।
शादाब के गिरोह में शामिल दो सदस्यों की शनिवार को हुई गिरफ्तारी के बाद इस पूरे सिंडिकेट का काला चिट्ठा खुलकर सामने आया है। पुलिस की शुरुआती जांच में 15 करोड़ रुपये के लेनदेन की बात उजागर हुई है। जांच पूरी होने तक यह आंकड़ा 30 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।
साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बीते शनिवार को बस स्टेशन निवासी राज सिंह और हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मलिकपुर निवासी सुधांशु सौरभ को पकड़कर जेल भेजा है। जांच में पता चला है कि गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी शादाब अली मिर्च का बड़ा कारोबारी है। उसकी रायबरेली शहर स्थित नवीन मंडी में मिर्च की आढ़त है।
शादाब अपने गिरोह के साथियों के साथ मिलकर आढ़त पर आने वाले गरीब लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर पहले फर्जी फर्म रजिस्टर करवाते थे और फिर उन फर्मों के नाम से बैंकों में चालू खाता खोलकर साइबर फ्राड के माध्यम से रुपये मंगाता था। उन खातों से अन्य खातों में रुपये ट्रांसफर कर विभिन्न माध्यमों से निकाल लेते थे।
खातों में लिंक मोबाइल नंबर को अपने फोन में लगाकर उसमें इंटरनेट बैकिंग इत्यादि को सक्रिय करते थे। जांच में पता चला है कि 2024 से 2025 के बीच गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलगांना, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से रायबरेली की यूको, फेडरल, एसबीआई, येस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के नौ खातों में 15 करोड़ रुपये भेजे गए हैं।
शादाब और उनके गिरोह के सदस्यों ने रुपये निकाल लिए। कुछ रुपये साइबर अपराधियों के खातों में भेजने की बात सामने आई है, जिसकी जांच चल रही है। पुलिस का दावा है कि साइबर फ्राड के रुपये ही गैर प्रांतों से यहां के खातों में भेजे गए हैं।
ऐसे हुआ खुलासा और किस नाम से बनवाई थी फर्म
रायबरेली शहर के कहारों का अड्डा निवासी परवेज अहमद को अपने साथ हुई साइबर अपराध की जानकारी हुई थी। मामला एसपी डॉ. यशवीर सिंह तक पहुंचा तो उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। परवेज की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट आदि धारा में एफआईआर दर्ज की गई थी।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी अजय सिंह तोमर ने मामले की जांच शुरू की और इस गिरोह के नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच में पता चला है कि पीडि़त परवेज के नाम पर आशीर्वाद इंटरप्राइजेज, शफीक अहमद के नाम पर शफीक इंटरप्राइजेज, तुषार सोनकर के नाम पर तुषार इंटरप्राइजेज नाम से फर्जी फर्म बनवाई थी। वहां स्वयं शादाब ने फेडरल, एसबीआई, येस बैंक, यूको बैंक में मो. शादाब इंटरप्राइजेज नाम से फर्म बना रखी है।
आंध्र प्रदेश और गुजरात में दर्ज है शादाब के खिलाफ प्राथमिकी
जांच में पता चला है कि शादाब इंटरप्राइजेज के नाम पर देश के विभिन्न राज्यों 29 साइबर फ्राड की शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा दो ऑनलाइन शिकायतें आंध्र प्रदेश और गुजरात में दर्ज हैं। शादाब के खिलाफ कर्नाटक के साइबर थाना देवनगरी सिटी और गुजरात प्रांत के साइबर थाना भावनगर में आईटी एक्ट आदि की धारा में प्राथमिकी दर्ज है।
साइबर ठगी के रुपये रायबरेली के नौ खातों में भेजे गए। मामले में दो आरोपियों को जेल भेजा गया है। गिरोह के सरगना शादाब अली की गिरफ्तारी के लिए साइबर क्राइम थाने की पुलिस को लगाया गया है। शादाब की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण को लेकर अन्य जानकारियां सामने आएंगी।
- संजीव कुमार सिन्हा, अपर पुलिस अधीक्षक
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शादाब के गिरोह में शामिल दो सदस्यों की शनिवार को हुई गिरफ्तारी के बाद इस पूरे सिंडिकेट का काला चिट्ठा खुलकर सामने आया है। पुलिस की शुरुआती जांच में 15 करोड़ रुपये के लेनदेन की बात उजागर हुई है। जांच पूरी होने तक यह आंकड़ा 30 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।
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साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बीते शनिवार को बस स्टेशन निवासी राज सिंह और हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मलिकपुर निवासी सुधांशु सौरभ को पकड़कर जेल भेजा है। जांच में पता चला है कि गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी शादाब अली मिर्च का बड़ा कारोबारी है। उसकी रायबरेली शहर स्थित नवीन मंडी में मिर्च की आढ़त है।
शादाब अपने गिरोह के साथियों के साथ मिलकर आढ़त पर आने वाले गरीब लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर पहले फर्जी फर्म रजिस्टर करवाते थे और फिर उन फर्मों के नाम से बैंकों में चालू खाता खोलकर साइबर फ्राड के माध्यम से रुपये मंगाता था। उन खातों से अन्य खातों में रुपये ट्रांसफर कर विभिन्न माध्यमों से निकाल लेते थे।
खातों में लिंक मोबाइल नंबर को अपने फोन में लगाकर उसमें इंटरनेट बैकिंग इत्यादि को सक्रिय करते थे। जांच में पता चला है कि 2024 से 2025 के बीच गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलगांना, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से रायबरेली की यूको, फेडरल, एसबीआई, येस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के नौ खातों में 15 करोड़ रुपये भेजे गए हैं।
शादाब और उनके गिरोह के सदस्यों ने रुपये निकाल लिए। कुछ रुपये साइबर अपराधियों के खातों में भेजने की बात सामने आई है, जिसकी जांच चल रही है। पुलिस का दावा है कि साइबर फ्राड के रुपये ही गैर प्रांतों से यहां के खातों में भेजे गए हैं।
ऐसे हुआ खुलासा और किस नाम से बनवाई थी फर्म
रायबरेली शहर के कहारों का अड्डा निवासी परवेज अहमद को अपने साथ हुई साइबर अपराध की जानकारी हुई थी। मामला एसपी डॉ. यशवीर सिंह तक पहुंचा तो उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। परवेज की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट आदि धारा में एफआईआर दर्ज की गई थी।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी अजय सिंह तोमर ने मामले की जांच शुरू की और इस गिरोह के नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच में पता चला है कि पीडि़त परवेज के नाम पर आशीर्वाद इंटरप्राइजेज, शफीक अहमद के नाम पर शफीक इंटरप्राइजेज, तुषार सोनकर के नाम पर तुषार इंटरप्राइजेज नाम से फर्जी फर्म बनवाई थी। वहां स्वयं शादाब ने फेडरल, एसबीआई, येस बैंक, यूको बैंक में मो. शादाब इंटरप्राइजेज नाम से फर्म बना रखी है।
आंध्र प्रदेश और गुजरात में दर्ज है शादाब के खिलाफ प्राथमिकी
जांच में पता चला है कि शादाब इंटरप्राइजेज के नाम पर देश के विभिन्न राज्यों 29 साइबर फ्राड की शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा दो ऑनलाइन शिकायतें आंध्र प्रदेश और गुजरात में दर्ज हैं। शादाब के खिलाफ कर्नाटक के साइबर थाना देवनगरी सिटी और गुजरात प्रांत के साइबर थाना भावनगर में आईटी एक्ट आदि की धारा में प्राथमिकी दर्ज है।
साइबर ठगी के रुपये रायबरेली के नौ खातों में भेजे गए। मामले में दो आरोपियों को जेल भेजा गया है। गिरोह के सरगना शादाब अली की गिरफ्तारी के लिए साइबर क्राइम थाने की पुलिस को लगाया गया है। शादाब की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण को लेकर अन्य जानकारियां सामने आएंगी।
- संजीव कुमार सिन्हा, अपर पुलिस अधीक्षक