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जिला अस्पताल : डस्टबिन में मिले बाहर के इंजेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:16 AM IST
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में छापामारी के दौरान मरीज व परिजनों से जानकारी लेते अपर निदेशक स्वास्
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रायबरेली। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार की सुबह अपर निदेशक (एडी) डॉ. जीपी गुप्ता ने छापा मारा। इस दौरान जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखने का खेल उजागर हो गया। एडी को डस्टबिन में बाजार से मंगवाए गए महंगे इंजेक्शन पड़े मिले। कई मरीजों के पास भी 700 से 800 रुपये तक के महंगे इंजेक्शन मिले।
इस पर अपर निदेशक ने संबंधित डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में शासन को पत्र भेजते हुए शिकायत की है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को भी नोटिस देकर जवाब मांगा है। रविवार सुबह अपर निदेशक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। किसी को उनके आने की भनक नहीं लगी। उन्होंने इमरजेंसी कक्ष में पहुंचकर जांच शुरू कर दी।
डस्टबिन को खोलकर देखा तो उसमें बाजार के महंंगे इंजेक्शनों की शीशियां मिलीं। पूछताछ शुरू करने के बाद स्टाफ को अपर निदेशक के आने की जानकारी हुई। इससे अफरातफरी मच गई। एडी ने कई मरीजों के पास भी महंगे इंजेक्शन बरामद किए। इन इंजेक्शनों को मरीजों को लगवाने के लिए बाजार से मंगवाया गया था। डस्टबिन में 30 से 35 महंगे इंजेक्शन बरामद हुए।
एडी ने भदोखर क्षेत्र के मधुपुरी निवासी बाबूलाल के पास से 365 रुपये और महराजगंज के माेन गांव की प्रेमा देवी के पास से 650 रुपये का जेक्शन बरामद किया। उन्हाेंने इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों व अन्य स्टाफ से पूछताछ की। उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है। सीएमएस को नोटिस देकर तत्काल जवाब देने के आदेश दिए हैं।
बिना परमिशन के सीएमएस मिले गैरहाजिर
अपर निदेशक के निरीक्षण में सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्पताल में नहीं मिले। अपर निदेशक का कहना है कि बिना अनुमति के सीएमएस ने अस्पताल छोड़ा है, इसलिए उनसे इस संबंध में भी जवाब मांगा गया है। सीएमएस ने एडी को फोन पर निजी कारणों (पत्नी का इलाज) का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। अपर निदेशक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इसकी विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
गंभीर रोगी की जान बचाई, एक को एम्स में भर्ती कराया
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एडी सुबह 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक रहे। इस दौरान गंभीर मरीजों का इलाज किया। सलोन से कोमा की हालत में आए मरीज का स्वयं इलाज किया। जांच में शुगर कम मिलने पर इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद मरीज की हालत में सुधार आया। इसके अलावा उन्होंने सड़क हादसे में हेड इंजरी के आए मरीज को इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया। उन्होंने एम्स के अधिकारियों से बात करके मरीजों को भेजवाया। कुत्ता काटने के बाद आए मरीज को एंटी रेबीज वेनम लगवाई।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया। डस्टबिन में बाजार के इंजेक्शन बरामद हुए। मरीजों के पास भी इंजेक्शन मिले। शासन को इसकी सूचना दी गई है। सीएमएस अस्पताल में नहीं मिले। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जांच कराकर दोषी डॉक्टरों व स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ
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इस पर अपर निदेशक ने संबंधित डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में शासन को पत्र भेजते हुए शिकायत की है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को भी नोटिस देकर जवाब मांगा है। रविवार सुबह अपर निदेशक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। किसी को उनके आने की भनक नहीं लगी। उन्होंने इमरजेंसी कक्ष में पहुंचकर जांच शुरू कर दी।
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डस्टबिन को खोलकर देखा तो उसमें बाजार के महंंगे इंजेक्शनों की शीशियां मिलीं। पूछताछ शुरू करने के बाद स्टाफ को अपर निदेशक के आने की जानकारी हुई। इससे अफरातफरी मच गई। एडी ने कई मरीजों के पास भी महंगे इंजेक्शन बरामद किए। इन इंजेक्शनों को मरीजों को लगवाने के लिए बाजार से मंगवाया गया था। डस्टबिन में 30 से 35 महंगे इंजेक्शन बरामद हुए।
एडी ने भदोखर क्षेत्र के मधुपुरी निवासी बाबूलाल के पास से 365 रुपये और महराजगंज के माेन गांव की प्रेमा देवी के पास से 650 रुपये का जेक्शन बरामद किया। उन्हाेंने इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों व अन्य स्टाफ से पूछताछ की। उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है। सीएमएस को नोटिस देकर तत्काल जवाब देने के आदेश दिए हैं।
बिना परमिशन के सीएमएस मिले गैरहाजिर
अपर निदेशक के निरीक्षण में सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्पताल में नहीं मिले। अपर निदेशक का कहना है कि बिना अनुमति के सीएमएस ने अस्पताल छोड़ा है, इसलिए उनसे इस संबंध में भी जवाब मांगा गया है। सीएमएस ने एडी को फोन पर निजी कारणों (पत्नी का इलाज) का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। अपर निदेशक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इसकी विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
गंभीर रोगी की जान बचाई, एक को एम्स में भर्ती कराया
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एडी सुबह 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक रहे। इस दौरान गंभीर मरीजों का इलाज किया। सलोन से कोमा की हालत में आए मरीज का स्वयं इलाज किया। जांच में शुगर कम मिलने पर इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद मरीज की हालत में सुधार आया। इसके अलावा उन्होंने सड़क हादसे में हेड इंजरी के आए मरीज को इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया। उन्होंने एम्स के अधिकारियों से बात करके मरीजों को भेजवाया। कुत्ता काटने के बाद आए मरीज को एंटी रेबीज वेनम लगवाई।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया। डस्टबिन में बाजार के इंजेक्शन बरामद हुए। मरीजों के पास भी इंजेक्शन मिले। शासन को इसकी सूचना दी गई है। सीएमएस अस्पताल में नहीं मिले। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जांच कराकर दोषी डॉक्टरों व स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ