{"_id":"6962a816c4c8f0e04d0409f4","slug":"200-accounts-will-be-investigated-the-secrets-of-fraud-will-be-revealed-raebareli-news-c-101-1-slko1031-148640-2026-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: 200 खातों की होगी जांच, खुलेंगे फर्जीवाड़े के राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: 200 खातों की होगी जांच, खुलेंगे फर्जीवाड़े के राज
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। जाली दस्तावेज से बैंक आफ बड़ौदा (बीओबी) की शाखा से 9.2 करोड़ रुपये लोन लिए जाने के मामले में करीब 200 खातों में हुए रुपयों के लेनदेन की जांच होगी। इसके लिए पुलिस ऋण आवेदकों के वेतन, बचत के अलावा उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों का ब्योरा जुटाने में लगी है।
पुलिस का मानना कि इन खातों की जांच के बाद ही फर्जीवाड़ा से जुड़े हर राज खुलकर सामने आ जाएंगे। पुलिस मुख्य तौर पर फर्जीवाड़े से जुड़े सिंडिकेट में शामिल लोगों के साथ ही ऋण आवेदकों से उनकी मुलाकात कैसे हुई। इस पूरे फर्जीवाड़ा की साजिश किसने रची, जैसे अहम सवालों के जवाब जुटाने में लगी है। बैंक आफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में जाली दस्तावेज से 48 आवेदकों को दिए गए लोन 9.2 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़ा में बीते दिनों मुख्य प्रबंधक मुकेश की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है।
बैंक से लोन हासिल करने में लखनऊ के हजरतगंज स्थित सचिवालय, जिला पंचायत रायबरेली, जिला पंचायत डलमऊ, सोशल वेलफेयर, इरिगेशन, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर रायबरेली, बेसिक एजुकेशन, ब्लॉक शिवगढ़ समेत 15 विभागों के जाली वेतन प्रमाणपत्र लगाए जाने की पुष्टि हुई है।
सूत्रों का दावा है कि आवेदकों के ऋण और बचत मिलाकर कुल खातों की संख्या 96 है। वहीं लोन लेने में जिले की एक अन्य बैंक में आदर्श ट्रेडर्स और रायबरेली ट्रेजर के नाम से खुले बैंक खातों से सोर्स आफ इनकम (सैलरी अकाउंट) दिखाकर बीओबी से ऋण लिया गया। इन दो खातों के अलावा कई अन्य खाते भी हैं, जिसमें सिंडिकेट और आवेदकों के रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई है। जांच के घेरे में इस तरह के कुल 200 खाते आए हैं।
बैंक की तरफ से पुलिस को फर्जीवाड़ा से जुड़े सभी दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। ताकि प्रकरण की जांच में तेजी आ सके। सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार का कहना है कि फर्जीवाड़े की हर बिंदु पर जांच कराई जा रही है। मामले में शामिल आरोपियों पर जल्द कार्रवाई होगी।
जाली आधार कार्ड का भी किया गया प्रयोग
ऋण हासिल करने में जाली आधार कार्ड का भी इस्तेमाल किया गया था। आधार कार्ड पर नंबर तो सेम हैं, लेकिन उसमें पते बदल दिए गए। यह खुलासा पुलिस की शुरुआती जांच में हुआ है। जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि रुपयों के लालच में आकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों के झांसे में आकर आवेदकों ने बैंक से ऋण लेने में हामी भरी थी।
नियमावली से तय होगी बैंक अफसरों पर कार्रवाई
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद तत्कालीन बैंक मैनेजर व अन्य बैंक कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बैंक शाखा से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय तक में तैनात बैंक अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका की जांच बैंक प्रबंधन की तरफ से कराई जा रही है। दोषी मिलने पर इनके खिलाफ बैंक नियमावली के तहत कार्रवाई तय होगी।
Trending Videos
पुलिस का मानना कि इन खातों की जांच के बाद ही फर्जीवाड़ा से जुड़े हर राज खुलकर सामने आ जाएंगे। पुलिस मुख्य तौर पर फर्जीवाड़े से जुड़े सिंडिकेट में शामिल लोगों के साथ ही ऋण आवेदकों से उनकी मुलाकात कैसे हुई। इस पूरे फर्जीवाड़ा की साजिश किसने रची, जैसे अहम सवालों के जवाब जुटाने में लगी है। बैंक आफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में जाली दस्तावेज से 48 आवेदकों को दिए गए लोन 9.2 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़ा में बीते दिनों मुख्य प्रबंधक मुकेश की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैंक से लोन हासिल करने में लखनऊ के हजरतगंज स्थित सचिवालय, जिला पंचायत रायबरेली, जिला पंचायत डलमऊ, सोशल वेलफेयर, इरिगेशन, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर रायबरेली, बेसिक एजुकेशन, ब्लॉक शिवगढ़ समेत 15 विभागों के जाली वेतन प्रमाणपत्र लगाए जाने की पुष्टि हुई है।
सूत्रों का दावा है कि आवेदकों के ऋण और बचत मिलाकर कुल खातों की संख्या 96 है। वहीं लोन लेने में जिले की एक अन्य बैंक में आदर्श ट्रेडर्स और रायबरेली ट्रेजर के नाम से खुले बैंक खातों से सोर्स आफ इनकम (सैलरी अकाउंट) दिखाकर बीओबी से ऋण लिया गया। इन दो खातों के अलावा कई अन्य खाते भी हैं, जिसमें सिंडिकेट और आवेदकों के रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई है। जांच के घेरे में इस तरह के कुल 200 खाते आए हैं।
बैंक की तरफ से पुलिस को फर्जीवाड़ा से जुड़े सभी दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। ताकि प्रकरण की जांच में तेजी आ सके। सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार का कहना है कि फर्जीवाड़े की हर बिंदु पर जांच कराई जा रही है। मामले में शामिल आरोपियों पर जल्द कार्रवाई होगी।
जाली आधार कार्ड का भी किया गया प्रयोग
ऋण हासिल करने में जाली आधार कार्ड का भी इस्तेमाल किया गया था। आधार कार्ड पर नंबर तो सेम हैं, लेकिन उसमें पते बदल दिए गए। यह खुलासा पुलिस की शुरुआती जांच में हुआ है। जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि रुपयों के लालच में आकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों के झांसे में आकर आवेदकों ने बैंक से ऋण लेने में हामी भरी थी।
नियमावली से तय होगी बैंक अफसरों पर कार्रवाई
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद तत्कालीन बैंक मैनेजर व अन्य बैंक कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बैंक शाखा से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय तक में तैनात बैंक अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका की जांच बैंक प्रबंधन की तरफ से कराई जा रही है। दोषी मिलने पर इनके खिलाफ बैंक नियमावली के तहत कार्रवाई तय होगी।