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Raebareli News: बिजली कटौती से शोपीस बने 22 हजार नलकूप
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 25 May 2026 12:58 AM IST
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रायबरेली। जिले में बिजली की समस्या से लोग परेशान हैं। कटौती से जनजीवन अस्तव्यस्त है। 22 हजार किसानों के नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। बिजली की आवाजाही और लो वोल्टेज के चलते मोटरों के जलने का खतरा बना रहता है।
नलकूप नहीं चलने से किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। यदि समय से नर्सरी नहीं पड़ी, तो धान की रोपाई में विलंब होगा। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता बिजली संकट से राहत दिलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
शहर में ट्रिपिंग से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। भीषण गर्मी में कहीं केबल जल रही है तो कहीं पर ट्रांसफार्मरों में खराबी आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र के हालात सबसे खराब है। रात में कई बार कटौती होती है। दिन में भी बिजली की आवाजाही बनी रहती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में करीब 22 हजार नलकूप उपभोक्ता हैं।
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गदागंज के किसान रामअचल तिवारी, डलमऊ के रविशंकर, लालगंज महेंद्र तिवारी, खीरों के रामसागर पटेल ने बताया कि बिजली कटौती से नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। उड़द, मूंग, हरा चारा की फसल सूख रही है। धान की नर्सरी डालने का समय निकला जा रहा है। अब तक धान की नर्सरी डालने के लिए किसान खेत तैयार भी नहीं कर पाए हैं।
हंगामे के बाद भी नहीं बदले हालात
रायबरेली। जिले में बिजली संकट के कारण शनिवार को महराजगंज, कठगर, सरेनी और लालगंज में उपभोक्ताओं ने उपकेंद्रों का घेराव किया। इसके बावजूद बिजली समस्या जस की तस बनी है। अघोषित कटौती से बिजली उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं। शाम से ही बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। ट्रिपिंग से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रात में बिजली की मांग बढ़ने पर अघोषित कटौती ऊपर से की जाती है, लेकिन दिन में मांग कम होने पर बिजली आपूर्ति की जाती है। अभियंताओं से अनावश्यक कटौती न किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
- रविचंद्र श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता रायबरेली जोन
अंबिका प्रसाद
नलकूप नहीं चलने से किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। यदि समय से नर्सरी नहीं पड़ी, तो धान की रोपाई में विलंब होगा। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता बिजली संकट से राहत दिलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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शहर में ट्रिपिंग से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। भीषण गर्मी में कहीं केबल जल रही है तो कहीं पर ट्रांसफार्मरों में खराबी आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र के हालात सबसे खराब है। रात में कई बार कटौती होती है। दिन में भी बिजली की आवाजाही बनी रहती है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में करीब 22 हजार नलकूप उपभोक्ता हैं।
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हंगामे के बाद भी नहीं बदले हालात
रायबरेली। जिले में बिजली संकट के कारण शनिवार को महराजगंज, कठगर, सरेनी और लालगंज में उपभोक्ताओं ने उपकेंद्रों का घेराव किया। इसके बावजूद बिजली समस्या जस की तस बनी है। अघोषित कटौती से बिजली उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं। शाम से ही बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। ट्रिपिंग से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रात में बिजली की मांग बढ़ने पर अघोषित कटौती ऊपर से की जाती है, लेकिन दिन में मांग कम होने पर बिजली आपूर्ति की जाती है। अभियंताओं से अनावश्यक कटौती न किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
- रविचंद्र श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता रायबरेली जोन
अंबिका प्रसाद