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Raebareli News: बिजली कटौती और लो वोल्टेज ने छीना चैन
Mon, 03 Aug 2026 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:49 AM IST
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खीरों विद्युत उपकेंद्र।
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रायबरेली। जिले के करीब पांच लाख उपभोक्ता बिजली कटौती से बेहाल हैं। शहर में बिजली की आवाजाही नहीं थम रही है। ग्रामीण क्षेत्र में दो घंटे के बजाय अब चार घंटे की अघोषित कटौती की जा रही है। लो वोल्टेज की समस्या नासूर बन गई है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है। पानी के अभाव में लोग धान की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
शहर क्षेत्र के 40 हजार उपभोक्ता ट्रिपिंग से जूझ रहे हैं। राना नगर, तेलियाकोट, बहराना, खाली सहाट, रतापुर, सब्जीमंडी इलाके में तारों का मकड़जाल है। इनमें कभी स्पार्किंग, तो कभी जंपर कटने से बिजली गुल रहती है। ग्रामीण क्षेत्र में शाम होते ही अघोषित कटौती शुरू हो जाती है। पहले दो घंटे की कटौती होती थी, लेकिन अब दो बार में चार घंटे की कटौती हो रही है। रात में चार घंटे बिजली गुल होने से लोग सो नहीं पा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता अविनाश कुमार ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। यदि बारिश हो जाए, तो काफी हद तक राहत मिल सकती है।
बिजली के उपकरण बने शोपीस
बिजली की मांग 280 मेगावाट है। ऐसे में जिले के 54 विद्युत उपकेंद्रों में लगे ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं। इससे लो वोल्टेज की समस्या दूर नहीं हो पा रही है। अमावां के पुनीत, आकाश, शिवा, रामू, नरेश, नीरज, भानु ने बताया कि 24 घंटे में बमुश्किल 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि 18 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। वोल्टेज इतना कम रहता है कि बिजली उपकरण ठीक से नहीं चल पाते है।
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सबमर्सिबल पंप क्षमता से पानी नहीं उगल रहे हैं। सरेनी क्षेत्र के मदनपाल, आशीष कुमार, विनय तिवारी ने बताया कि बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। अघोषित कटौती से लोगों की नींद हराम है। खीरों विद्युत उपकेंद्र को मौरावां ट्रांसमिशन से बिजली आती है। 33 केवी लाइन की लंबाई अधिक होने के कारण आए दिन फॉल्ट बना रहता है। ऊपर से अघोषित कटौती से बिजली बंद कर दी जाती है।
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शहर क्षेत्र के 40 हजार उपभोक्ता ट्रिपिंग से जूझ रहे हैं। राना नगर, तेलियाकोट, बहराना, खाली सहाट, रतापुर, सब्जीमंडी इलाके में तारों का मकड़जाल है। इनमें कभी स्पार्किंग, तो कभी जंपर कटने से बिजली गुल रहती है। ग्रामीण क्षेत्र में शाम होते ही अघोषित कटौती शुरू हो जाती है। पहले दो घंटे की कटौती होती थी, लेकिन अब दो बार में चार घंटे की कटौती हो रही है। रात में चार घंटे बिजली गुल होने से लोग सो नहीं पा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता अविनाश कुमार ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। यदि बारिश हो जाए, तो काफी हद तक राहत मिल सकती है।
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बिजली के उपकरण बने शोपीस
बिजली की मांग 280 मेगावाट है। ऐसे में जिले के 54 विद्युत उपकेंद्रों में लगे ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं। इससे लो वोल्टेज की समस्या दूर नहीं हो पा रही है। अमावां के पुनीत, आकाश, शिवा, रामू, नरेश, नीरज, भानु ने बताया कि 24 घंटे में बमुश्किल 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि 18 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। वोल्टेज इतना कम रहता है कि बिजली उपकरण ठीक से नहीं चल पाते है।
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सबमर्सिबल पंप क्षमता से पानी नहीं उगल रहे हैं। सरेनी क्षेत्र के मदनपाल, आशीष कुमार, विनय तिवारी ने बताया कि बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। अघोषित कटौती से लोगों की नींद हराम है। खीरों विद्युत उपकेंद्र को मौरावां ट्रांसमिशन से बिजली आती है। 33 केवी लाइन की लंबाई अधिक होने के कारण आए दिन फॉल्ट बना रहता है। ऊपर से अघोषित कटौती से बिजली बंद कर दी जाती है।