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Raebareli News: अपने युग का आईना है प्रेमचंद का साहित्य
Sat, 01 Aug 2026 01:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:00 AM IST
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रायबरेली। राजनीति विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान की ओर से मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर क्रांतिपुरी में शुक्रवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राम बहादुर वर्मा ने कहा कि प्रेमचंद का संपूर्ण साहित्य अपने युग का आईना है, जो न तो मार्क्सवादी थे और न गांधीवादी, परंतु दोनों के चिंतन से प्रभावित थे। प्रेमचंद ने क्रांति की बड़ी-बड़ी बातें नहीं की, परंतु सामंतवाद, पूंजीवाद तथा औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध किसानों एवं मजदूरों के मन में पनप रहे विद्रोहों को अपने उपन्यासों एवं कहानियों के माध्यम से सहज तौर पर चित्रित किया।
उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद सामाजिक सरोकारों से जुड़े जनवादी सोच के व्यक्ति थे। उन्होंने 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना सम्मेलन की अध्यक्षता कर और महाजनी सभ्यता लिखकर अपनी प्रगतिशील सोच का परिचय दिया। संस्थान के महामंत्री डॉ. बृजकिशोर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं की विषय वस्तु किसान, मजदूर, दलित व गरीब थे। वह भारत के पहले लेखक थे, जिन्होंने आम आदमी को अपनी कथाओं का नायक बनाया। उन्होंने अपनी कहानियों में दलितों के शोषण को उजागर किया। इनका साहित्य स्वतंत्रता आंदोलन का प्रामाणिक दस्तावेज है। इस मौके पर रामदीन विश्वकर्मा, डॉ. मनोज चौधरी, रामनरेश वर्मा, शैलेश प्रकाश, शरद चौधरी, जितेंद्र पटेल, उत्कर्ष, राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद सामाजिक सरोकारों से जुड़े जनवादी सोच के व्यक्ति थे। उन्होंने 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना सम्मेलन की अध्यक्षता कर और महाजनी सभ्यता लिखकर अपनी प्रगतिशील सोच का परिचय दिया। संस्थान के महामंत्री डॉ. बृजकिशोर ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं की विषय वस्तु किसान, मजदूर, दलित व गरीब थे। वह भारत के पहले लेखक थे, जिन्होंने आम आदमी को अपनी कथाओं का नायक बनाया। उन्होंने अपनी कहानियों में दलितों के शोषण को उजागर किया। इनका साहित्य स्वतंत्रता आंदोलन का प्रामाणिक दस्तावेज है। इस मौके पर रामदीन विश्वकर्मा, डॉ. मनोज चौधरी, रामनरेश वर्मा, शैलेश प्रकाश, शरद चौधरी, जितेंद्र पटेल, उत्कर्ष, राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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