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Raebareli News: रोजाना 10 लोग जिले में साइबर ठगी का हो रहे शिकार

Mon, 13 Jul 2026 02:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Mon, 13 Jul 2026 02:32 AM IST
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Ten people in the district are falling victim to cyber fraud every day
रायबरेली। देश के आठ राज्यों के साइबर अपराधियों ने यहां पर नेटवर्क फैला रखा है। 18 माह में 3106 ठगी के मामले दर्ज हुए हैं। 14.27 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई है। पुलिस आंकड़े बताते हैं कि हर दिन लगभग 10 लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं।
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साइबर क्राइम थाने के रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2025 में 1504 मामले दर्ज हुए। सात करोड़ 93 लाख 33 हजार 403 रुपये की ठगी की गई। एक करोड़ 16 लाख 89 हजार 700 रुपये वापस कराए गए। वर्ष 2026 में जून तक साइबर ठगी के 1602 मामले दर्ज हुए। छह करोड़ 34 लाख 38 हजार 396 रुपये की ठगी की गई।
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पुलिस की तरफ से दो करोड़ 29 लाख 89 हजार 853 रुपये वापस कराए गए। 18 माह में तीन करोड़ 46 लाख 79 हजार 553 रुपये वापस कराए गए। पुलिस का दावा है कि 63 साइबर अपराधी सलाखों के पीछे भेजे गए, जबकि शेष धनराशि 6809 बैंक खातों में फ्रीज कराई गई है।
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पुलिस की जांच में रायबरेली में देश के पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, उत्रराखंड, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों के साइबर अपराधियों के सक्रिय होने की बात सामने आई है। गिरोह ने रायबरेली ही नहीं, बल्कि बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, झारखंड में फर्जी दस्तावेजों से बैंकों में खाता खुलवाया था। इन्हीं खातों के जरिए साइबर अपराध से अर्जित रुपयों का लेनदेन होता था। जांच के दौरान पता चला था कि गिरोह का संचालन रहीम और महताब आलम कर रहे हैं, जो विदेश में बैठे हैं। हालांकि दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी।

11 जून को देश के साइबर अपराधियों का कनेक्शन एक बार फिर रायबरेली से होने का खुलासा हुआ है। नौ राज्यों से रायबरेली के नौ बैंक खातों में साइबर ठगी के 15 करोड़ रुपये भेजे गए थे। मिर्च कारोबार के जरिये देश के साइबर अपराधियों से मिलकर दो साल से यह खेल कर रहा था। मिर्च कारोबारी के राज सिंह, सुधांशु, तुषार को पुलिस ने पकड़ा था।

रायबरेली शहर निवासी रिटायर सूबेदार और उनकी पत्नी को बीते 11 अप्रैल से 16 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था। डरा धमकाकर 82.50 लाख रुपये की ठगी की थी। बाद में पुलिस ने मामले में कार्रवाई कर करीब 60 लाख रुपये फ्रीज कराए थे।


जिले में इस तरह की ठगी सबसे ज्यादा
- डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी।
- निवेश और ट्रेडिंग एप के जरिये ठगी।
- ऑनलाइन पार्टटाइम जॉब का झांसा
- ओएलएक्स-ऑनलाइन खरीद-बिक्री से धोखाधड़ी।
- क्रेडिट कार्ड एवं केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी।
- यूपीआई और क्यूआर कोड स्कैम।
- सोशल मीडिया हैकिंग एवं रिश्तेदार बनकर पैसे मांगना।
- सेक्सटॉर्शन एवं वीडियो कॉल ब्लैकमेल।
- लोन एप और इंस्टेंड लोन फ्राड।


ये बन रहे सबसे ज्यादा शिकार
- बुजुर्ग नागरिक, जिन्हें डिजिटल जानकारी कम होती है।
- सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक।
- छोटे कारोबारी, छात्र, नौकरी तलाशने वाले युवा व गृहणियां।
- ऐसे ग्रामीण जो पहली बार डिजिटल बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं।



ऐसे काम करता है ठगी का नेटवर्क
पुलिस की जांच में सामने आया है कि अधिकांश साइबर गिरोह फर्जी सिम कार्ड, बैंक खातों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम कई बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर कर दी जाती है, जिन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद राशि को एटीएम के जरिये निकाल लिया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी या दूसरे खातों में भेजकर उसका पता लगाना कठिन बना दिया जाता है।

पैसा वापस मिलने में सबसे बड़ी बाधाएं
ठगी के बाद पीड़ित की ओर से शिकायत दर्ज कराने में देर होना। पीड़ित की ओर से बैंक को तुरंत सूचना न देना। रकम का कई खातों में ट्रांसफर हो जाना। दूसरे राज्यों एवं विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल व पीड़ित की ओर से साक्ष्य सुरक्षित न रखने से दिक्कत आती है।

24 घंटे के भीतर यह करें
तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। लेनदेन का स्क्रीनशॉट, एसएमएस, कॉल रिकॉर्ड, चैट और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें। किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड सीवीवी या स्क्रीन शेयरिंग एप का उपयोग न करें। निकटतम साइबर थाने या स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराएं।



जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव
पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि साइबर अपराध के जितने भी मामले सामने आते हैं, उनकी एफआईआर दर्ज कराई जाती है। साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ही पैसों की बरामदगी कराई जाती है। बैंकों में पैसे फ्रीज कराए जाते हैं। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। पुलिस की तरफ से गांवों, स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया जाता है।
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