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Raebareli News: शिक्षा की डोर से बेटियों के सपनों के मिलेगी उड़ान
Sat, 01 Aug 2026 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:50 AM IST
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लालगंज । जब बेटियां शिक्षित होती हैं तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा समाज रोशन होता है। आज की बेटियां हर चुनौती का डटकर सामना कर रही हैं और अपनी मेहनत के दम पर देश का गौरव बढ़ा रही हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें अवसर, विश्वास और शिक्षा देने की है। यह संदेश अमर उजाला की अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कुम्भडौरा में आयोजित परिचर्चा में गूंजा। इस दौरान छात्राओं को वॉलीबॉल में भविष्य बनाने की सीख दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वॉलीबॉल की नेशनल खिलाड़ी दीपशिखा ज्योति सरोज ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षित बेटियां ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि आज बेटियां खेल, विज्ञान, प्रशासन, सेना, शिक्षा और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इसलिए अभिभावकों को बेटा और बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। दोनों को समान अवसर और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य जरूरी है। लक्ष्य तय करने के बाद पूरी निष्ठा, अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि हार से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की पहचान है। परिचर्चा के दौरान छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की। छात्रा श्वेता देवी, अंशिका, रंजना, कनक, कविता शुक्ला, वर्षा देवी, रंजना सिंह और ज्योति ने खेल, करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े प्रश्न पूछे। दीपशिखा ज्योति सरोज ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उन्हें बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का साहस रखने की प्रेरणा दी। शिक्षिका सादिया जायसवाल ने कहा कि शिक्षा महिलाओं को जागरूक, आत्मनिर्भर और अधिकारों के प्रति सजग बनाती है।
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शिक्षिका नयनतारा कुशवाहा ने कहा कि हर महिला को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। जागरूक महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित करें, तभी समाज में व्यापक बदलाव आएगा। प्रभारी प्रधानाचार्य कीर्ति बाजपेई ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में खास तरह के आत्मविश्वास का संचार होता है।
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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वॉलीबॉल की नेशनल खिलाड़ी दीपशिखा ज्योति सरोज ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षित बेटियां ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि आज बेटियां खेल, विज्ञान, प्रशासन, सेना, शिक्षा और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इसलिए अभिभावकों को बेटा और बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। दोनों को समान अवसर और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य जरूरी है। लक्ष्य तय करने के बाद पूरी निष्ठा, अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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उन्होंने छात्राओं से कहा कि हार से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की पहचान है। परिचर्चा के दौरान छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की। छात्रा श्वेता देवी, अंशिका, रंजना, कनक, कविता शुक्ला, वर्षा देवी, रंजना सिंह और ज्योति ने खेल, करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े प्रश्न पूछे। दीपशिखा ज्योति सरोज ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उन्हें बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का साहस रखने की प्रेरणा दी। शिक्षिका सादिया जायसवाल ने कहा कि शिक्षा महिलाओं को जागरूक, आत्मनिर्भर और अधिकारों के प्रति सजग बनाती है।
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शिक्षिका नयनतारा कुशवाहा ने कहा कि हर महिला को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। जागरूक महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित करें, तभी समाज में व्यापक बदलाव आएगा। प्रभारी प्रधानाचार्य कीर्ति बाजपेई ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में खास तरह के आत्मविश्वास का संचार होता है।