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Raebareli News: कागज में 100 फीसदी, गांवों में अधूरा पड़ा टीकाकरण
Tue, 11 Aug 2026 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:40 AM IST
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सरेनी क्षेत्र के खेवान खेड़ा गांव में मवेशी का टीकाकरण करता कर्मचारी।
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रायबरेली। खुरपका, मुंहपका से पशुओं को बचाने के लिए शुरू किया गया टीकाकरण अभियान कागजों तक सीमित रह गया है। जमीनी हकीकत ये है कि गांवों में टीकाकरण का कार्य अधूरा पड़ा है। पशुपालकों को इंतजार है कि कब उनके गांव टीमें आएंगी। खास बात ये है कि जिन पैरावेट को टीका लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। ऐसे में यह अभियान मजाक बनकर रह गया है।
22 जुलाई से नौ सितंबर तक इस बार पांच लाख 65 हजार पशुओं में टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 54 टीमें गठित की गई हैं। सभी को घर-घर जाकर पशुओं को टीका लगाना है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने रविवार को सतांव, लालगंज, सरेनी, खीरों और राही ब्लॉक के गांवों में जाकर पड़ताल की तो पता चला कि टीकाकरण कागजों में चल रहा है। गांवों में टीमें पहुंच ही नहीं रही हैं। विभाग का दावा है कि 18 दिनों में 75 हजार पशुओं को टीका लगाया जा चुका है।
महज 50 पशुओं को लगे टीके
लालगंज। ब्लॉक का पलिया वीर सिंहपुर गांव में अब तक महज 50 पशुओं को टीका लगा है। पशुओं की संख्या 200 से ज्यादा है। पशुपालक राजन बताते हैं कि टीकाकरण का कार्य काफी सुस्त है। ज्यादातर पशुओं को टीका नहीं लग सका है। राजकुमार, देवीचरण बताते हैं कि टीकाकरण अभियान महज खानापूर्ति तक सीमित है। पैरावेट मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कुमार का दावा है कि ब्लॉक क्षेत्र में अब तक दो हजार पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं। अब तक करीब 200 पशुओं की टैगिंग की गई है।
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300 में 102 पशुओं को लगे टीके
सरेनी। खेवानखेड़ा गांव में भी टीकाकरण अभियान की स्थिति खराब है। गांव में 300 से ज्यादा पशु हैं। इसमें महज 102 पशुओं को रविवार तक टीके लगाए जा सके। पशुपालक गंगाधर, विपिन कुमार, राधेश्याम ने बताया कि पशुओं में टीके तो लगाए जा रहे हैं, लेकिन कार्य बेहद धीमा है। पशुओं की टैगिंग में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। गांव के संतराम, अर्जुन बताते हैं कि उनके पशुओं को अब तक टीके नहीं लग सके हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद कुशवाहा ने बताया कि तय समय में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
पशुओं बीमारियों का मंडरा रहा खतरा
खीरों। छत्ता का पुरवा गांव के पशुपालक पशुओं में टीका लगाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। गांव के पशुपालक राममोहन पासी बताते हैं कि उनके पास तीन भैंसें हैं। अभी तक टीका लगाने टीम नहीं आई है। फिरोजाबाद गांव के अंकुलेश यादव बताते हैं कि उनके पास पांच भैंस, एक गाय और एक बछड़ा है। अभी तक उनके पशुओं को टीका नहीं लग सका है। खांडेपुर गांव के पशुपालक देशराज सिंह भी बताते हैं कि टीकाकरण कागजों तक सीमित है। इससे पशुओं में खुरपका, मुंहपका बीमारी होने का खतरा मंडरा रहा है।
गांवों में नहीं आई टीम
सतांव ब्लॉक के कई ऐसे गांव हैं, जहां टीकाकरण अभियान दम तोड़ रहा है। कोंसा गांव के पशुपालक मो. सुहैल, कैलाश कुमार ने बताया कि टीम गांव नहीं आई है। कृष्णपुर ताला गांव के रामसिंह, अमवन के शोएब, बंडे के ललऊ, करुणा शंकर, खगिया खेड़ा के बिंदादीन बताते हैं कि उनके भी पशुओं को भी अब तक टीके नहीं लग सके हैं। पशु चिकित्साधिकारी सतांव डॉ. रमाकांत ने बताया कि टीकाकरण अभियान में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। राही ब्लॉक के कलसहा गांव निवासी अशोक कुमार, रमेश, सत्येंद्र, अनुज कुमार बताते हैं कि उनके पशुओं को टीके अब तक नहीं लग सके हैं।
टैग न लगवाने से पोर्टल पर अपलोड होने में दिक्कत
विभाग के अफसरों का दावा है कि टीकाकरण के लिए गांवों में टीम जब टीका लगाने जाती है तो कई पशुपालक पहले तो टीका लगवाने से ही मना कर देते हैं। काफी समझाने के बाद मानते हैं, लेकिन टैग लगवाने से इन्कार कर देते हैं। टैग नहीं लगवाने से पोर्टल पर डाटा अपलोड करना मुश्किल होता है, ऊपर से बिना टैग के पशु का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता। इससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। चिकित्सकों ने अपील की है कि पशुपालक टीकाकरण के साथ टैग जरूर लगवाएं। इससे पशुओं की सही गणना होगी। सरकारी पोर्टल पर अपलोडिंग में दिक्कत नहीं आएगी।
जिले में 5.65 लाख पशुओं में टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। 75 हजार पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। पैरावेट हड़ताल पर हैं। इस वजह से अभियान धीमा है। कर्मचारियों से टीका लगवाने का कार्य कराया जा रहा है। नौ सितंबर तक टीका लगाने का शत प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. कुलदीप द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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22 जुलाई से नौ सितंबर तक इस बार पांच लाख 65 हजार पशुओं में टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 54 टीमें गठित की गई हैं। सभी को घर-घर जाकर पशुओं को टीका लगाना है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने रविवार को सतांव, लालगंज, सरेनी, खीरों और राही ब्लॉक के गांवों में जाकर पड़ताल की तो पता चला कि टीकाकरण कागजों में चल रहा है। गांवों में टीमें पहुंच ही नहीं रही हैं। विभाग का दावा है कि 18 दिनों में 75 हजार पशुओं को टीका लगाया जा चुका है।
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महज 50 पशुओं को लगे टीके
लालगंज। ब्लॉक का पलिया वीर सिंहपुर गांव में अब तक महज 50 पशुओं को टीका लगा है। पशुओं की संख्या 200 से ज्यादा है। पशुपालक राजन बताते हैं कि टीकाकरण का कार्य काफी सुस्त है। ज्यादातर पशुओं को टीका नहीं लग सका है। राजकुमार, देवीचरण बताते हैं कि टीकाकरण अभियान महज खानापूर्ति तक सीमित है। पैरावेट मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कुमार का दावा है कि ब्लॉक क्षेत्र में अब तक दो हजार पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं। अब तक करीब 200 पशुओं की टैगिंग की गई है।
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300 में 102 पशुओं को लगे टीके
सरेनी। खेवानखेड़ा गांव में भी टीकाकरण अभियान की स्थिति खराब है। गांव में 300 से ज्यादा पशु हैं। इसमें महज 102 पशुओं को रविवार तक टीके लगाए जा सके। पशुपालक गंगाधर, विपिन कुमार, राधेश्याम ने बताया कि पशुओं में टीके तो लगाए जा रहे हैं, लेकिन कार्य बेहद धीमा है। पशुओं की टैगिंग में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। गांव के संतराम, अर्जुन बताते हैं कि उनके पशुओं को अब तक टीके नहीं लग सके हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद कुशवाहा ने बताया कि तय समय में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
पशुओं बीमारियों का मंडरा रहा खतरा
खीरों। छत्ता का पुरवा गांव के पशुपालक पशुओं में टीका लगाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। गांव के पशुपालक राममोहन पासी बताते हैं कि उनके पास तीन भैंसें हैं। अभी तक टीका लगाने टीम नहीं आई है। फिरोजाबाद गांव के अंकुलेश यादव बताते हैं कि उनके पास पांच भैंस, एक गाय और एक बछड़ा है। अभी तक उनके पशुओं को टीका नहीं लग सका है। खांडेपुर गांव के पशुपालक देशराज सिंह भी बताते हैं कि टीकाकरण कागजों तक सीमित है। इससे पशुओं में खुरपका, मुंहपका बीमारी होने का खतरा मंडरा रहा है।
गांवों में नहीं आई टीम
सतांव ब्लॉक के कई ऐसे गांव हैं, जहां टीकाकरण अभियान दम तोड़ रहा है। कोंसा गांव के पशुपालक मो. सुहैल, कैलाश कुमार ने बताया कि टीम गांव नहीं आई है। कृष्णपुर ताला गांव के रामसिंह, अमवन के शोएब, बंडे के ललऊ, करुणा शंकर, खगिया खेड़ा के बिंदादीन बताते हैं कि उनके भी पशुओं को भी अब तक टीके नहीं लग सके हैं। पशु चिकित्साधिकारी सतांव डॉ. रमाकांत ने बताया कि टीकाकरण अभियान में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। राही ब्लॉक के कलसहा गांव निवासी अशोक कुमार, रमेश, सत्येंद्र, अनुज कुमार बताते हैं कि उनके पशुओं को टीके अब तक नहीं लग सके हैं।
टैग न लगवाने से पोर्टल पर अपलोड होने में दिक्कत
विभाग के अफसरों का दावा है कि टीकाकरण के लिए गांवों में टीम जब टीका लगाने जाती है तो कई पशुपालक पहले तो टीका लगवाने से ही मना कर देते हैं। काफी समझाने के बाद मानते हैं, लेकिन टैग लगवाने से इन्कार कर देते हैं। टैग नहीं लगवाने से पोर्टल पर डाटा अपलोड करना मुश्किल होता है, ऊपर से बिना टैग के पशु का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता। इससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। चिकित्सकों ने अपील की है कि पशुपालक टीकाकरण के साथ टैग जरूर लगवाएं। इससे पशुओं की सही गणना होगी। सरकारी पोर्टल पर अपलोडिंग में दिक्कत नहीं आएगी।
जिले में 5.65 लाख पशुओं में टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। 75 हजार पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। पैरावेट हड़ताल पर हैं। इस वजह से अभियान धीमा है। कर्मचारियों से टीका लगवाने का कार्य कराया जा रहा है। नौ सितंबर तक टीका लगाने का शत प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. कुलदीप द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी