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Rampur News: कड़ाके की ठंड में ठंडे पड़े अलाव
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:59 AM IST
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कई जगहों पर गीली लकड़ियां डालने की शिकायत, पालिका के चिह्नित स्थानों पर नहीं पड़ रहीं सूखी लकड़ियां
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। लोगों को ठंड से बचाने के लिए दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। नगर पालिका की तरफ से जलाए जा रहे अलाव नाकाफी साबित हो रहे हैं। शाम सात बजे डाली गई लकड़ियां दो घंटे के बाद ठंडी पड़ रही हैं और दोबारा जलने का नाम नहीं ले रहीं। हाल यह है कि स्पॉटों पर भी दो से तीन लकड़ियां डाली जा रही हैं। शुक्रवार को पड़ताल में सामने आया कि रात नौ बजे के बाद लोग कागज और कचरे से हाथ तापते नजर आए।
रामपुर नगर पालिका ने 43 वार्डों के लोगों को बढ़ती ठंड से बचाने के लिए जगह-जगह 33 स्थानों पर स्पॉट बनाए थे, जहां पर रोजाना शाम सात बजे से नौ बजे क़े बीच नगर पालिका की एक गाड़ी लकड़ी डाल रही है। इसमें दो से तीन लकड़ियां और उस पर डीजल छिड़ककर आग जलाकर रवाना हो रही है।
शाम के छह बजे से यह गाड़ी शहर में घूमना शुरू हो जाती है। इसके बाद कुछ देर तक यह लकड़ी सुलग रही है और उसके बाद अलाव सिर्फ धुआं छोड़ रहे हैं। जबकि सुलगते कोयले दोबारा जलने का नाम नहीं ले रहे।
यह शिकायत एक जगह की नहीं बल्कि उन मुख्य स्पॉट की हैं जहां पर अलाव तापने वाले ज्यादा हैं। इनमें खासतौर पर रेलवे स्टेशन, शाहबाद गेट, और सिविल लाइन की तरफ के हैं। यहां पर अलाव जल तो रहे है, लेकिन राहत बस कुछ देर ही मिल पा रही हैं। लोगों का कहना है कि यहां पर लकड़ियां काफी कम डाली जा रही है, जिससे यह रात नौ बजे तक लकड़ी चलती है और फिर अलाव ठंडे पड़ जाते हैं। इसके अलावा ज्वालानगर, बिलासपुर गेट, राजद्वारा, गुइया तालाब और किला गेट पर भी अलाव की स्थिति खराब है।
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पड़ताल--
रेलवे स्टेशन-
रामपुर रेलवे स्टेशन का हाल यह रहा कि यहां पर रात को यात्री स्टेशन परिसर में खड़े थे। अलाव के नाम पर लकड़ी गीली थी जो कि जलना मुश्किल थीं। कई लोग एक अलाव को घेरकर खड़े हुए थे। लोगों का कहना था कि लकड़ी सीली हुई है, हल्की आंच से जल रही थी, लेकिन पूरी तरह से लोगों को राहत देने में नाकाम थी।
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शाहबाद गेट-
शाहबाद गेट का अलाव सात बजे तक नहीं दिखाई दिया। आगे बढ़कर अलाव दिखाई दिया तो तीन लकड़ियां पड़ी थीं, जिससे कई लोग ताप रहे थे। 11 बजे तक यहां पर अलाव बुझ जाता है और लोग इसको जलाने का प्रयास करने में लगे रहते हैं।
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सिविल लाइन
इस इलाके में अलाव नहीं दिखाई दिया। जबकि कुछ आगे बढ़कर लोगों ने अपना अलाव जलाया था, जिससे लोग ठंड को दूर करने में लगे थे। इनमें कुछ मजदूर और अन्य लोग खड़े होकर ताप रहे थे। यहां पर लोगों का कहना था कि अलाव के लिए अभी लकड़ियां नहीं डालीं।
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रोडवेज--
शहर में रामपुर रोडवेज डिपो के रैन बसेरे के आगे अलाव जल रहा था, लेकिन यहां पर ज्यादा लोग नहीं थे। यहां पर तीन लकड़ियां पड़ी हुई थीं। जो धीमी आंच से जल रही थीं। यहां पर बताते हैं कि यह अलाव 11 बजे तक खत्म हो जाते हैं, इसके बाद अपने साधन से राहत पाते हैं।
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क्या कहते हैं लोग-- -
हम इसलिए यहां पर अपना अलाव जला रहे हैं क्योंकि नगर पालिका ने यहां पर कोई अलाव नहीं जलाया है। अब चौराहा काफी दूर है यहां से चौराहे पर जाना काफी मुश्किल है। पालिका काफी दूरी पर अलाव जलाती है वह भी नौ बजे के बाद ठंडे हो जाते हैं। -मिट्ठून
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अलाव का कुछ पता नहीं। कभी नौ बजे जलता है तो कभी सात बजे। हम लोग ठंड से ठिठुरते रहते हैं और जो लकड़ियां डाली जाती हैं वह भी इतनी नहीं होती की रात भर अलाव जल सके। -करमजीत
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पालिका के अलावा जलते तो हैं लेकिन लकड़िया कभी दो डाल देते हैं तो कभी तीन डालते हैं। थोड़ा सा तेल छिड़ककर आग लगाकर चले जाते हैं, रातभर हम लोग इस बुझे हुए अलाव के सहारे चलते हैं। -मुराद
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नगर पालिका अलाव जलाती तो है लेकिन कई जगह मैंने देखा है कि लकड़ियां कम डाली जा रही हैं जिससे अलाव रात के 10 बजे तक ठीक से नहीं जल पाता है इसको लेकर लोगों को दिक्कत होती है। -सुशील
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वर्जन--
अलाव सभी जगहों पर जलवाए जा रहे हैं। यदि कोई ऐसी शिकायत है कि अलाव में लकड़ियां कम डाली जा रही है तो इसके लिए कर्मचारियों से बातचीत कर व्यवस्था को सही कराया जाएगा। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी
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रामपुर। लोगों को ठंड से बचाने के लिए दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। नगर पालिका की तरफ से जलाए जा रहे अलाव नाकाफी साबित हो रहे हैं। शाम सात बजे डाली गई लकड़ियां दो घंटे के बाद ठंडी पड़ रही हैं और दोबारा जलने का नाम नहीं ले रहीं। हाल यह है कि स्पॉटों पर भी दो से तीन लकड़ियां डाली जा रही हैं। शुक्रवार को पड़ताल में सामने आया कि रात नौ बजे के बाद लोग कागज और कचरे से हाथ तापते नजर आए।
रामपुर नगर पालिका ने 43 वार्डों के लोगों को बढ़ती ठंड से बचाने के लिए जगह-जगह 33 स्थानों पर स्पॉट बनाए थे, जहां पर रोजाना शाम सात बजे से नौ बजे क़े बीच नगर पालिका की एक गाड़ी लकड़ी डाल रही है। इसमें दो से तीन लकड़ियां और उस पर डीजल छिड़ककर आग जलाकर रवाना हो रही है।
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शाम के छह बजे से यह गाड़ी शहर में घूमना शुरू हो जाती है। इसके बाद कुछ देर तक यह लकड़ी सुलग रही है और उसके बाद अलाव सिर्फ धुआं छोड़ रहे हैं। जबकि सुलगते कोयले दोबारा जलने का नाम नहीं ले रहे।
यह शिकायत एक जगह की नहीं बल्कि उन मुख्य स्पॉट की हैं जहां पर अलाव तापने वाले ज्यादा हैं। इनमें खासतौर पर रेलवे स्टेशन, शाहबाद गेट, और सिविल लाइन की तरफ के हैं। यहां पर अलाव जल तो रहे है, लेकिन राहत बस कुछ देर ही मिल पा रही हैं। लोगों का कहना है कि यहां पर लकड़ियां काफी कम डाली जा रही है, जिससे यह रात नौ बजे तक लकड़ी चलती है और फिर अलाव ठंडे पड़ जाते हैं। इसके अलावा ज्वालानगर, बिलासपुर गेट, राजद्वारा, गुइया तालाब और किला गेट पर भी अलाव की स्थिति खराब है।
पड़ताल
रेलवे स्टेशन-
रामपुर रेलवे स्टेशन का हाल यह रहा कि यहां पर रात को यात्री स्टेशन परिसर में खड़े थे। अलाव के नाम पर लकड़ी गीली थी जो कि जलना मुश्किल थीं। कई लोग एक अलाव को घेरकर खड़े हुए थे। लोगों का कहना था कि लकड़ी सीली हुई है, हल्की आंच से जल रही थी, लेकिन पूरी तरह से लोगों को राहत देने में नाकाम थी।
शाहबाद गेट-
शाहबाद गेट का अलाव सात बजे तक नहीं दिखाई दिया। आगे बढ़कर अलाव दिखाई दिया तो तीन लकड़ियां पड़ी थीं, जिससे कई लोग ताप रहे थे। 11 बजे तक यहां पर अलाव बुझ जाता है और लोग इसको जलाने का प्रयास करने में लगे रहते हैं।
सिविल लाइन
इस इलाके में अलाव नहीं दिखाई दिया। जबकि कुछ आगे बढ़कर लोगों ने अपना अलाव जलाया था, जिससे लोग ठंड को दूर करने में लगे थे। इनमें कुछ मजदूर और अन्य लोग खड़े होकर ताप रहे थे। यहां पर लोगों का कहना था कि अलाव के लिए अभी लकड़ियां नहीं डालीं।
रोडवेज
शहर में रामपुर रोडवेज डिपो के रैन बसेरे के आगे अलाव जल रहा था, लेकिन यहां पर ज्यादा लोग नहीं थे। यहां पर तीन लकड़ियां पड़ी हुई थीं। जो धीमी आंच से जल रही थीं। यहां पर बताते हैं कि यह अलाव 11 बजे तक खत्म हो जाते हैं, इसके बाद अपने साधन से राहत पाते हैं।
क्या कहते हैं लोग
हम इसलिए यहां पर अपना अलाव जला रहे हैं क्योंकि नगर पालिका ने यहां पर कोई अलाव नहीं जलाया है। अब चौराहा काफी दूर है यहां से चौराहे पर जाना काफी मुश्किल है। पालिका काफी दूरी पर अलाव जलाती है वह भी नौ बजे के बाद ठंडे हो जाते हैं। -मिट्ठून
अलाव का कुछ पता नहीं। कभी नौ बजे जलता है तो कभी सात बजे। हम लोग ठंड से ठिठुरते रहते हैं और जो लकड़ियां डाली जाती हैं वह भी इतनी नहीं होती की रात भर अलाव जल सके। -करमजीत
पालिका के अलावा जलते तो हैं लेकिन लकड़िया कभी दो डाल देते हैं तो कभी तीन डालते हैं। थोड़ा सा तेल छिड़ककर आग लगाकर चले जाते हैं, रातभर हम लोग इस बुझे हुए अलाव के सहारे चलते हैं। -मुराद
नगर पालिका अलाव जलाती तो है लेकिन कई जगह मैंने देखा है कि लकड़ियां कम डाली जा रही हैं जिससे अलाव रात के 10 बजे तक ठीक से नहीं जल पाता है इसको लेकर लोगों को दिक्कत होती है। -सुशील
वर्जन
अलाव सभी जगहों पर जलवाए जा रहे हैं। यदि कोई ऐसी शिकायत है कि अलाव में लकड़ियां कम डाली जा रही है तो इसके लिए कर्मचारियों से बातचीत कर व्यवस्था को सही कराया जाएगा। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी