मुरादाबाद मंडल में फिर हत्या: पीपली वन में ग्रामीण को मारी गोली, रामपुर में लकड़ी तस्करों के बीच गैंगवार
रामपुर के पीपली वन में ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक पर नाै केस दर्ज थे। पुलिस मान रही है कि हत्या लकड़ी तस्करों के बीच गैंगवार को लेकर हो सकती है।
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रामपुर जिले के पीपली वन में ग्रामीण का शव मिलने से सनसनी फैल गई। शव पर गोली लगने का निशान है और उसकी पहचान थाना बिलासपुर क्षेत्र के चंदेला गांव निवासी परमजीत उर्फ पम्मी (47) के तौर पर हुई है, जो रविवार से लापता था। अभी इस मामले में परिजनों की ओर से कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है।
प्रथम दृष्टया आशंका जताई जा रही है कि लकड़ी तस्करों के बीच आपसी गैंगवार के चलते हत्या की गई है। पीपली वन की अंबरपुर बीट संख्या 11 में शनिवार सुबह दस बजे ग्रामीण जंगल की ओर गए तो उन्होंने शव पड़ा हुआ देखा, जिसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
सूचना मिलते ही थाना मिलक खानम की इंस्पेक्टर निशा खटाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। मृतक के परिजनों ने गांव के कुछ लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है, लेकिन उनकी ओर से कोई लिखित तहरीर पुलिस को प्राप्त नहीं हुई है।
घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस लकड़ी तस्करी से जुड़े पुराने मामलों और आपसी रंजिश के एंगल से भी जांच कर रही है। एसपी विद्यासागर मिश्र ने बताया कि जांच की जा रही है। अभी तक तहरीर नहीं मिली है।
वन विभाग में पम्मी पर दर्ज हैं नौ केस
रेंजर ठाकुर विजय कुमार ने बताया कि परमजीत सिंह उर्फ पम्मी, निवासी चंदेला, कोतवाली बिलासपुर के ऊपर स्वार रेंज में अति संवेदनशील धाराओं के तहत वन अपराध के कुल नौ मामले दर्ज थे। उनका कहना है कि अपने ही साथियों के साथ खैर तस्करी में लिप्त था। उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि खैर तस्करों के आपसी टकराव में उसकी गोली लगने से मौत हो गई। सोमवार को उसका शव जंगल से बरामद किया गया। शव की जांच में दाईं जांघ में गोली लगने का निशान पाया गया है।
कई बार भेजा जा चुका है जेल
चंदेला गांव निवासी परमजीत उर्फ पम्मा के बारे में थानाध्यक्ष निशा खटाना ने बताया कि उसके ऊपर खैर मिलकखानम और बिलासपुर कोतवाली में लकड़ी की तस्करी से जुड़े लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं। कई बार उसे जेल भेजा जा चुका था।
पीपली वन में गुटबंदी में हो चुकीं कई हत्याएं
पीपली वन क्षेत्र में लकड़ी की अवैध कटान और तस्करी का संगठित अपराध तेजी से फैला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक यहां लगभग एक दर्जन से अधिक तस्कर गिरोह सक्रिय हैं। इन गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई इतनी हिंसक हो चुकी है कि कई बार आपसी गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई तस्करों की जान जा चुकी है।
जंगल और उसके आसपास के इलाकों में समय-समय पर शव मिलने से इलाके में दहशत का माहौल बना रहता है। गत वर्ष जनवरी में कुलवंत नगर थाना गदरपुर निवासी सुंदर लाल का शव बरामद हुआ था। मृतक दो दिनों से लापता था और उसके गले पर कटने का गहरा निशान पाया गया था, जिससे हत्या की आशंका और गहराई थी।
इस मामले में वन क्षेत्र में चल रहे आपराधिक नेटवर्क की ओर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। वर्ष 2025 में फरवरी माह में केलाखेड़ा के रम्पुरा काजी निवासी सेठ उर्फ सेठा का शव भी बरामद हुआ था। बताया जाता है कि वह अपने साथियों के साथ जंगल से लकड़ी लेने गया था।
बाद में उसकी हत्या की खबर सामने आई, जिसे आपसी गुटबंदी और तस्करी के विवाद से जोड़कर देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि तस्करों के बीच क्षेत्र और रास्तों को लेकर लगातार टकराव होता रहता है।
उत्तराखंड सीमा तस्करों की पनाहगाह
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटा पीपली वन तस्करों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। उत्तराखंड के आर्य नगर और बिलासपुर क्षेत्र के अंबरपुर की सीमाएं इस वन क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण तस्कर सीमाओं का फायदा उठाकर जंगल में घुसते हैं और अवैध रूप से लकड़ी का कटान कर उसे बाहर पहुंचा देते हैं।