UP: मुरादाबाद में मच्छरों से सबसे ज्यादा खतरा, मंडल के अन्य जिलों से ज्यादा लार्वा मिले, छिड़काव पर लाखों खर्च
वेक्टर जनित रोगों पर चल रहे अभियान के ताजा आंकड़ों में मुरादाबाद मंडल का सबसे संवेदनशील जिला बनकर उभरा है। रामपुर, अमरोहा, बिजनौर और संभल में निरीक्षण और लार्वा की संख्या तुलनात्मक रूप से कम रही। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के खतरे को देखते हुए मुरादाबाद में विशेष सतर्कता जरूरी है।
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वेक्टर जनित रोगों को लेकर जारी अभियान के ताजा आंकड़े यह साफ कर रहे हैं कि मच्छरों का खतरा पूरे मंडल में सबसे ज्यादा मुरादाबाद में है। अन्य जिलों के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। मुरादाबाद में 2.73 लाख घरों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 152 घरों में लार्वा मिले, जोकि अन्य जिलों की तुलना में काफी अधिक है।
रामपुर में 1.25 लाख, अमरोहा में 75 हजार, बिजनौर में 15 हजार और संभल में सिर्फ 6900 घरों की जांच हुई। रामपुर में 33, अमरोहा में 142, बिजनौर में 18 और संभल में 40 घरों में लार्वा की पुष्टि हुई है। कंटेनर सर्वे के आंकड़े खतरे को और उजागर करते हैं।
मुरादाबाद में 3.05 लाख कंटेनरों की जांच में 152 पॉजिटिव मिले। वहीं रामपुर में 1.37 लाख कंटेनरों में 19, अमरोहा में 7.98 लाख में 190, बिजनौर में 20 हजार में 28 और संभल में नौ हजार कंटेनरों में 21 पॉजिटिव मिले। अन्य संभावित प्रजनन स्थलों की पहचान में भी मुरादाबाद आगे है।
यहां 149 ऐसे प्रजनन स्थल और चिह्नित किए गए हैं, जहां मच्छर पनप सकते हैं। ऐसे स्थल रामपुर में 21, अमरोहा में 46, बिजनौर में छह और संभल में महज 11 हैं। राहत की बात यह है कि पांचों जिलों में एनेफिलीज और क्यूलेक्स मच्छरों के लार्वा ही मिले हैं।
फिलहाल डेंगू के एडीज मच्छर की सक्रियता नहीं पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि एडीज मच्छर के लिए जुलाई से अक्तूबर-नवंबर तक का मौसम अनुकूल है। चूंकि मुरादाबाद में लार्वा सबसे अधिक पाए गए हैं, इसलिए एडीज मच्छर को भी इन स्थानों पर पनपने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
दीवान का बाजार व गांधीनगर में सबसे ज्यादा मच्छर
शहर के मोहल्लों की बात करें तो यहां दीवान का बाजार और गांधीनगर में सबसे ज्यादा मच्छर हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरों के घनत्व के लिए किए गए सर्वे में यह खुलासा हुआ है। दीवान का बाजार में मच्छरों का घनत्व 14 मिला। गांधीनगर में भी यही स्थिति पाई गई। इसके अलावा प्रकाश नगर, असालतपुरा, किसरौल, मंडी चौक, मझोला, नवाबपुरा, करूला, कंजरी सराय और पीएसी में मच्छरों का घनत्व 12 और 13 मिला। इन सभी स्थानों पर तीन घंटे तक सर्वे किया गया।
फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव पर हर माह लाखों खर्च
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक लार्वीसाइडल स्प्रे के लिए मुरादाबाद में 1041 गांवों को कवर किया गया, जबकि रामपुर में 1688, अमरोहा में 446, बिजनौर में 848 और संभल में सिर्फ 56 गांवों में यह कार्रवाई हुई। यानी हर माह फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव का ही असर है कि पिछले दो वर्षों में मुरादाबाद में डेंगू के बहुत कम केस आए हैं। हालांकि दिसंबर तक के आंकड़ों की बात करें तो अमरोहा और मुरादाबाद में सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं।
| जिला | डेंगू | मलेरिया |
|---|---|---|
| अमरोहा | 187 | 6 |
| मुरादाबाद | 54 | 70 |
| रामपुर | 51 | 58 |
| संभल | 28 | 258 |
| बिजनौर | 38 | 4 |
मंडल में जांचों का दायरा बढ़ा है इसलिए डेंगू और मलेरिया के मरीज भी कम हुए हैं। हम अपनी टीम के अलावा स्थानीय निकाय का सहयोग लेकर भी एंटी लार्वा छिड़काव और फॉगिंग करा रहे हैं। हर चार माह में दस्तक अभियान भी चलाया जा रहा है। - डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ

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