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Saharanpur News: निजी अस्पताल में जन्म, इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पर भरोसा
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जिला महिला चिकित्सालय
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- महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 48 फीसदी बाहर जन्मे नवजात शिशु हुए भर्ती
- सात माह में एसएनसीयू में 928 नवजात शिशुओं का हुआ उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भले ही प्रसव के लिए लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हो, लेकिन गंभीर बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए सरकारी अस्पताल पर ही भरोसा जता रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि महिला अस्पताल के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। सात माह में निजी अस्पताल या फिर सीएचसी पर जन्मे 48 फीसदी नवजात शिशु एसएनसीयू में भर्ती हुए।
जिला महिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, एक जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 928 नवजात शिशु भर्ती किए गए। इनमें से 482 नवजात शिशु ऐसे हैं, जिनका जन्म महिला अस्पताल में हुआ। इनके अलावा 446 नवजात शिशुओं का जन्म सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, निजी अस्पताल में हुआ, लेकिन गंभीर हालत में उन्हें महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया। अच्छी बात यह है कि अधिकांश बच्चे स्वस्थ होकर घर लौटे। निजी अस्पताल में एसएनसीयू का एक दिन का खर्च बीमारी के अनुसार पांच से 10 हजार रुपये पड़ता है। इसके साथ ही चिकित्सक गंभीर नवजातों को भर्ती करने से झिझकते हैं। इन दोनों कारणों के चलते लोग महिला अस्पताल के एसएनसीयू पर भरोसा जता रहे हैं।
-- इन स्थिति में भर्ती होते हैं नवजात शिशु
महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि समय से पहले जन्मे, कम वजन, सांस लेने में तकलीफ, संक्रमण, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। यहां आधुनिक उपकरणों और आवश्यक सुविधाओं के साथ उपचार होता है। शिशुओं की 24 घंटे निगरानी की जाती है।
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-- वर्जन
एसएनसीयू में कम वजन और जन्म के बाद न रोने वाले नवजात शिशुओं की संख्या अधिक रहती है। बाहर से आने वाले नवजातों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। अधिकतर बच्चे स्वस्थ होकर निकलते हैं। - डॉ. इंद्रा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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- सात माह में एसएनसीयू में 928 नवजात शिशुओं का हुआ उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भले ही प्रसव के लिए लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हो, लेकिन गंभीर बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए सरकारी अस्पताल पर ही भरोसा जता रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि महिला अस्पताल के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। सात माह में निजी अस्पताल या फिर सीएचसी पर जन्मे 48 फीसदी नवजात शिशु एसएनसीयू में भर्ती हुए।
जिला महिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, एक जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में 928 नवजात शिशु भर्ती किए गए। इनमें से 482 नवजात शिशु ऐसे हैं, जिनका जन्म महिला अस्पताल में हुआ। इनके अलावा 446 नवजात शिशुओं का जन्म सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, निजी अस्पताल में हुआ, लेकिन गंभीर हालत में उन्हें महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया। अच्छी बात यह है कि अधिकांश बच्चे स्वस्थ होकर घर लौटे। निजी अस्पताल में एसएनसीयू का एक दिन का खर्च बीमारी के अनुसार पांच से 10 हजार रुपये पड़ता है। इसके साथ ही चिकित्सक गंभीर नवजातों को भर्ती करने से झिझकते हैं। इन दोनों कारणों के चलते लोग महिला अस्पताल के एसएनसीयू पर भरोसा जता रहे हैं।
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महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि समय से पहले जन्मे, कम वजन, सांस लेने में तकलीफ, संक्रमण, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। यहां आधुनिक उपकरणों और आवश्यक सुविधाओं के साथ उपचार होता है। शिशुओं की 24 घंटे निगरानी की जाती है।
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एसएनसीयू में कम वजन और जन्म के बाद न रोने वाले नवजात शिशुओं की संख्या अधिक रहती है। बाहर से आने वाले नवजातों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। अधिकतर बच्चे स्वस्थ होकर निकलते हैं। - डॉ. इंद्रा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल