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Saharanpur News: मकानों की बुनियाद को कमजोर कर रही नियमों की अनदेखी
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पीएम आवास योजना में बन रहे मकान की नींव के ऊपर बीम की जगह डाली गई डीपीसी
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- नींव के ऊपर बीम डाले बिना ही खड़ी की जा रहीं दीवारें, नजर रखने वाला कोई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पीएम आवास योजना (शहरी) में नियमों की अनदेखी मकानों की बुनियाद को कमजोर बना रही है। इसकी मुख्य वजह मकानों के निर्माण की निगरानी न होना है।
योजना के पहले चरण में फर्म का चयन किया गया था। पात्रों द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के बाद फर्म के कर्मचारी जियो टैग और चयन करते थे। साथ ही डीपीआर भी वही तैयार करते थे। अब पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में फर्म का चयन नहीं किया गया है। इस बार यह जिम्मेदारी नगर निगम और नगर पंचायतों के कर्मचारियों तथा आंगनबाड़ियों को दी गई है। प्रत्येक जियोटैग के लिए 60 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
पहले मकान का निर्माण शुरू होने के बाद फर्म निगरानी करती थी कि मकान का निर्माण नियमानुसार किया जा रहा है या नहीं। निर्माण शुरू होने से पूर्ण होने तक तीन बार फोटोग्राफी होती थी। उसके बाद अगली किस्त जारी होती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। इसी वजह से निर्माण में नियमों की अनदेखी हो रही है। योजना के तहत बनने वाले मकान के निर्माण में नियम यह है कि नींव के ऊपर चार सरियों का बीम डलता है, जिससे कि नींव धंसे नहीं और दीवारों में दरार न आए। इससे मकान को हमेशा के लिए मजबूती मिलती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं कर रहे हैं। खर्च बचाने के लिए वह नींव के ऊपर बीम डालने की बजाय डीपीसी डाल रहे हैं, जिससे मकान सरकार की मंशा के अनुरूप मजबूत नहीं रहेगा।
-- निगम और तहसील स्तर से होती है पात्रता की जांच
पीएम आवास योजना में आवेदनकर्ताओं की पात्रता की जांच नगर निगम और तहसील स्तर से भी की जाती है। योजना के तहत मकान का लाभ लेने के लिए आवेदनकर्ता के पास कम से कम 30 गज भूमि होना अनिवार्य है।
-- दो बार जारी हो चुकी पहली किस्त
पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत जनपद के 934 पात्रों के खातों में पहली किस्त का पैसा 18 जनवरी 2026 को जारी किया गया था। उसके बाद मार्च 2026 में दूसरी बार पहली किस्त का पैसा जारी किया गया। इसमें जनपद के करीब 1300 पात्रों के खातों में पहली किस्त का रुपया जारी किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पीएम आवास योजना (शहरी) में नियमों की अनदेखी मकानों की बुनियाद को कमजोर बना रही है। इसकी मुख्य वजह मकानों के निर्माण की निगरानी न होना है।
योजना के पहले चरण में फर्म का चयन किया गया था। पात्रों द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के बाद फर्म के कर्मचारी जियो टैग और चयन करते थे। साथ ही डीपीआर भी वही तैयार करते थे। अब पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में फर्म का चयन नहीं किया गया है। इस बार यह जिम्मेदारी नगर निगम और नगर पंचायतों के कर्मचारियों तथा आंगनबाड़ियों को दी गई है। प्रत्येक जियोटैग के लिए 60 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
पहले मकान का निर्माण शुरू होने के बाद फर्म निगरानी करती थी कि मकान का निर्माण नियमानुसार किया जा रहा है या नहीं। निर्माण शुरू होने से पूर्ण होने तक तीन बार फोटोग्राफी होती थी। उसके बाद अगली किस्त जारी होती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। इसी वजह से निर्माण में नियमों की अनदेखी हो रही है। योजना के तहत बनने वाले मकान के निर्माण में नियम यह है कि नींव के ऊपर चार सरियों का बीम डलता है, जिससे कि नींव धंसे नहीं और दीवारों में दरार न आए। इससे मकान को हमेशा के लिए मजबूती मिलती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं कर रहे हैं। खर्च बचाने के लिए वह नींव के ऊपर बीम डालने की बजाय डीपीसी डाल रहे हैं, जिससे मकान सरकार की मंशा के अनुरूप मजबूत नहीं रहेगा।
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पीएम आवास योजना में आवेदनकर्ताओं की पात्रता की जांच नगर निगम और तहसील स्तर से भी की जाती है। योजना के तहत मकान का लाभ लेने के लिए आवेदनकर्ता के पास कम से कम 30 गज भूमि होना अनिवार्य है।
पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत जनपद के 934 पात्रों के खातों में पहली किस्त का पैसा 18 जनवरी 2026 को जारी किया गया था। उसके बाद मार्च 2026 में दूसरी बार पहली किस्त का पैसा जारी किया गया। इसमें जनपद के करीब 1300 पात्रों के खातों में पहली किस्त का रुपया जारी किया गया।