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एनआरसी प्रक्रिया लंबित रखना राजनीतिक लाभ की कोशिश : मदनी
Tue, 11 Aug 2026 01:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 11 Aug 2026 01:36 AM IST
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देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने अंतिम एनआरसी प्रकाशित होने के छह वर्ष बाद भी प्रक्रिया पूरी न होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी न किया जाना भी एक बड़ा मुद्दा है। मदनी ने सोमवार को जारी बयान में यह बात कही।
अरशद मदनी ने असम की मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नागरिकता के संवेदनशील मुद्दे को लगातार जीवित रखना चाहती है। केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया। अंतिम एनआरसी के छह वर्ष बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। यह कई सवाल खड़े करता है। इससे आशंका बढ़ती है कि नागरिकता का मुद्दा जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। मदनी ने जोर दिया कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया को कानून के अनुसार पूरा करना शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए आवश्यक है।
मदनी ने बताया कि अतीत में असम में सांप्रदायिक ताकतें मुसलमानों को विदेशी बताती रही हैं। उन्होंने मुसलमानों की नागरिकता और हैसियत को संदिग्ध बनाने का प्रयास किया। इससे लंबे समय तक सामाजिक तनाव की स्थिति बनी रही। मदनी ने आरोप लगाया कि मौजूदा राज्य सरकार भेदभाव और मुस्लिम विरोधी एजेंडे पर काम कर रही है। जमीयत ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी रही है और उनके अधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ती रही है।
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अरशद मदनी ने असम की मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नागरिकता के संवेदनशील मुद्दे को लगातार जीवित रखना चाहती है। केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया। अंतिम एनआरसी के छह वर्ष बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। यह कई सवाल खड़े करता है। इससे आशंका बढ़ती है कि नागरिकता का मुद्दा जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। मदनी ने जोर दिया कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया को कानून के अनुसार पूरा करना शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए आवश्यक है।
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मदनी ने बताया कि अतीत में असम में सांप्रदायिक ताकतें मुसलमानों को विदेशी बताती रही हैं। उन्होंने मुसलमानों की नागरिकता और हैसियत को संदिग्ध बनाने का प्रयास किया। इससे लंबे समय तक सामाजिक तनाव की स्थिति बनी रही। मदनी ने आरोप लगाया कि मौजूदा राज्य सरकार भेदभाव और मुस्लिम विरोधी एजेंडे पर काम कर रही है। जमीयत ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी रही है और उनके अधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ती रही है।
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