{"_id":"69e7d8b2dc0b3098da0a1d46","slug":"measuring-noise-by-ear-transport-department-lacks-decibel-meters-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-173893-2026-04-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: कान से माप रहे शोर, परिवहन विभाग के पास नहीं डेसिबल मीटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: कान से माप रहे शोर, परिवहन विभाग के पास नहीं डेसिबल मीटर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 22 Apr 2026 01:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सहारनपुर। सरकारी महकमों की भी स्थिति अजब है। कहीं पुलिस वाले मुंह से बंदूक की आवाज निकालते हैं तो कहीं बंदरों को भगाने के लिए लंगूर बांधे जाते है या उसके कटआउट लगाए जाते हैं। अब ये नया मामला आया है जिसमें ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए संभागीय परिवहन विभाग के पास डेसिबल मीटर नहीं है। ऐसे में अधिकारी वाहनों के शोर का अंदाजा कानों से सुनकर लगा रहे हैं। इसी आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।
17 अप्रैल को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में डीलरों, मोटर गैराज और वर्कशॉप संचालकों के साथ बैठक की थी, जिसमें ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों की बिक्री और संबंधित संचालकों पर जुर्माने और कार्रवाई के बारे में बताया गया था। इसके बाद से संभागीय परिवहन विभाग की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन टीम के पास ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए डेसिबल मीटर नहीं है, जो साइलेंसर, हूटर और सायरन के शोर को बता देता है। इसे साउंड लेवल मीटर भी करते हैं। यह ऐसा उपकरण है, जो ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल में मापता है। यह माइक्रोफोन का उपयोग कर हवा के दबाव में बदलाव को विद्युत संकेतों में बदलकर ध्वनि स्तर को मापता है।
-- -- -- --
-- एक लाख का जुर्माना व एक साल की सजा का प्रावधान
एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत वाहनों के साइलेंसर मॉडिफाई करने वालों, हूटर व सायरन लगाने के खिलाफ एक लाख रुपये का जुर्माना व एक साल की जेल तक की सजा का प्रावधान है।
-- -- --
-- 20 दिन में 90 वाहनों के वाहन
एआरटीओ प्रवर्तन एमपी सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से 20 अप्रैल तक संभागीय परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने बुलेट में साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न से ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर 90 वाहनों के चालान किए हैं। इनमें आरटीओ विभाग के 16 और 74 वाहन यातायात पुलिस ने किए। करीब नौ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
-- -- --
-- यह है मानक
वाहन मानक
दो व तीन पहिया वाहन 80 डेसिबल
चार पहिया 82 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (चार टन वजन तक) 85 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (चार टन से अधिक) 89 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (12 टन से अधिक) 91 डेसिबल
क्रेन-जेसीबी निर्माण कार्य वाहन 85 डेसिबल
Trending Videos
17 अप्रैल को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में डीलरों, मोटर गैराज और वर्कशॉप संचालकों के साथ बैठक की थी, जिसमें ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों की बिक्री और संबंधित संचालकों पर जुर्माने और कार्रवाई के बारे में बताया गया था। इसके बाद से संभागीय परिवहन विभाग की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन टीम के पास ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए डेसिबल मीटर नहीं है, जो साइलेंसर, हूटर और सायरन के शोर को बता देता है। इसे साउंड लेवल मीटर भी करते हैं। यह ऐसा उपकरण है, जो ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल में मापता है। यह माइक्रोफोन का उपयोग कर हवा के दबाव में बदलाव को विद्युत संकेतों में बदलकर ध्वनि स्तर को मापता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत वाहनों के साइलेंसर मॉडिफाई करने वालों, हूटर व सायरन लगाने के खिलाफ एक लाख रुपये का जुर्माना व एक साल की जेल तक की सजा का प्रावधान है।
एआरटीओ प्रवर्तन एमपी सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से 20 अप्रैल तक संभागीय परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने बुलेट में साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न से ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर 90 वाहनों के चालान किए हैं। इनमें आरटीओ विभाग के 16 और 74 वाहन यातायात पुलिस ने किए। करीब नौ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
वाहन मानक
दो व तीन पहिया वाहन 80 डेसिबल
चार पहिया 82 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (चार टन वजन तक) 85 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (चार टन से अधिक) 89 डेसिबल
व्यावसायिक वाहन (12 टन से अधिक) 91 डेसिबल
क्रेन-जेसीबी निर्माण कार्य वाहन 85 डेसिबल

कमेंट
कमेंट X