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Saharanpur News: जिले के खेतों में हरी क्रांति, सब्जियों का रकबा और उत्पादन नौ वर्षों में हुआ दोगुना
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:58 AM IST
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सहारनपुर। कभी गन्ने की फसल के लिए जाना जाने वाला जिला अब अन्य फसलों को भी तरजीह दे रहा है। सब्जियों की खेती जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। पिछले नौ वर्षों में जिले में शाकभाजी का रकबा और उत्पादन दोगुना हुआ है। ऐसे में खेतों में हरी क्रांति दिखाई दे रही है।
जिले में वर्ष 2017 में शाकभाजी का रकबा 6910 हेक्टेयर था। नौ वर्षों में यह बढ़कर 11,780 हेक्टेयर हो गया है। उत्पादन भी दो लाख मीट्रिक टन से बढ़कर चार लाख मीट्रिक टन हुआ है। सब्जियों की फसल पर बेमौसम बारिश का भी कोई खास असर नहीं होता। आलू का रकबा वर्ष 2017 में 410 हेक्टेयर था। वर्ष 2026 में बढ़कर यह 700 हेक्टेयर हो गया। वर्ष 2017 में जिले में आलू का उत्पादन 10250 मीट्रिक टन था, जो 2026 में बढ़कर 21 हजार मीट्रिक टन हो गया। सबसे अधिक टमाटर का रकबा बढ़ा है। इसमें करीब सवा दो गुना की बढोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में टमाटर का रकबा 325 हेक्टेयर था। 2026 में यह बढ़कर 800 हेक्टेयर रहा। उत्पादकता में तीन गुना की बढोत्तरी हुई। इसी तरह बैंगन, मूली का रकबा भी बढ़ा है। सब्जियों की सप्लाई स्थानीय स्तर से लेकर बाहरी जिलों और राज्यों में भी की जा रही है। जिले से बड़ी संख्या में टमाटर आजादपुर और साहिबाबाद मंडी में जाता है। इसके अलावा हरियाणा और उत्तराखंड में भी सब्जियां भेजी जाती है।
- बोले किसान
- कलालहटी गांव के किसान रामकुमार गौतम ने बताया कि उन्होंने बैंगन की फसल लगाई है। सब्जी की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। अच्छे सीजन में खासा मुनाफा होता है। इसमें कीटनाशक समेत अन्य खर्चा भी कम है।
- रजापुर गांव के रोहित ने बताया कि उन्होंने खीरे, भिंडी की फसल लगाई है। सीजन शुरू हो गया है। भिंडी फिलहाल 35 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में जा रही है। सहफसली के तौर पर इनसे गन्ना आदि की लागत निकल जाती है।
- बिड़वी के सुधीर राठौर ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ चना, मसूर, प्याज, लहसुन, मिर्च की खेती करते हैं। बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। गन्ने और गेहूं में लगने वाली लागत तो निकलती ही है। साथ ही तीन से चार महीने में आमदनी भी होती है। साथ ही इससे जमीन में जीवांश कार्बन भी बढ़ता है।
- ढोलामाजरा के राजेंद्र ने बताया कि खेत में भिंडी की फसल लगाई है। वह ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करते हैं। इस बार सहफसली खेती की है। अच्छे मुनाफे की उम्मीद है।
- वर्जन
जिले में तेजी से शाकभाजी का रकबा बढ़ा है। उद्यान विभाग भी किसानों को अच्छे बीज उपलब्ध करा रहा है। समय-समय पर किसानों को उद्यान विभाग प्रशिक्षण भी दिलाता है।
- गमपाल, जिला उद्यान अधिकारी।
-- --
- शाकभाजी का रकबा
फसल-- -क्षेत्रफल (पुराना)-- -उत्पादकता-- -उत्पादन-- -क्षेत्रफल (नया)-- -उत्पादकता-- -उत्पादन
आलू-- -410-- -25.0-- -10250-- -700-- -30.0-- -21000
गोभीवर्गीय-- -3100-- -29.0-- -89900-- -4800-- -35.0-- -168000
कद्दूवर्गीय-- -1600-- -40.0-- -64000-- -3100-- -45.0-- -139500
टमाटर-- -325-- -27.0-- -8775-- -800-- -30.0-- -24000
बैंगन-- -60-- -24.0-- -1440-- -300-- -26.0-- -7800
मूली-- -40-- -35.0-- -1400-- -100-- -40.0-- -4000
मटर-- -150-- -13.0-- -1950-- -100-- -15.0-- -1500
गाजर-- -175-- -25.0-- -4375-- -100-- -27.0-- -2700
अन्य शाकभाजी-- -1050-- -19.0-- -19950-- -1780-- -22.0-- -39160
शाकभाजी का कुल क्षेत्रफल-- -6910-- -—-- -202040-- -11780-- -—-- -407660
नोटः- क्षेत्रफल हेक्टेयर में, उत्पादन मीट्रिक टन में।
पुराना(वर्ष 2017), नया(वर्ष 2026)
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जिले में वर्ष 2017 में शाकभाजी का रकबा 6910 हेक्टेयर था। नौ वर्षों में यह बढ़कर 11,780 हेक्टेयर हो गया है। उत्पादन भी दो लाख मीट्रिक टन से बढ़कर चार लाख मीट्रिक टन हुआ है। सब्जियों की फसल पर बेमौसम बारिश का भी कोई खास असर नहीं होता। आलू का रकबा वर्ष 2017 में 410 हेक्टेयर था। वर्ष 2026 में बढ़कर यह 700 हेक्टेयर हो गया। वर्ष 2017 में जिले में आलू का उत्पादन 10250 मीट्रिक टन था, जो 2026 में बढ़कर 21 हजार मीट्रिक टन हो गया। सबसे अधिक टमाटर का रकबा बढ़ा है। इसमें करीब सवा दो गुना की बढोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में टमाटर का रकबा 325 हेक्टेयर था। 2026 में यह बढ़कर 800 हेक्टेयर रहा। उत्पादकता में तीन गुना की बढोत्तरी हुई। इसी तरह बैंगन, मूली का रकबा भी बढ़ा है। सब्जियों की सप्लाई स्थानीय स्तर से लेकर बाहरी जिलों और राज्यों में भी की जा रही है। जिले से बड़ी संख्या में टमाटर आजादपुर और साहिबाबाद मंडी में जाता है। इसके अलावा हरियाणा और उत्तराखंड में भी सब्जियां भेजी जाती है।
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- बोले किसान
- कलालहटी गांव के किसान रामकुमार गौतम ने बताया कि उन्होंने बैंगन की फसल लगाई है। सब्जी की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। अच्छे सीजन में खासा मुनाफा होता है। इसमें कीटनाशक समेत अन्य खर्चा भी कम है।
- रजापुर गांव के रोहित ने बताया कि उन्होंने खीरे, भिंडी की फसल लगाई है। सीजन शुरू हो गया है। भिंडी फिलहाल 35 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में जा रही है। सहफसली के तौर पर इनसे गन्ना आदि की लागत निकल जाती है।
- बिड़वी के सुधीर राठौर ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ चना, मसूर, प्याज, लहसुन, मिर्च की खेती करते हैं। बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। गन्ने और गेहूं में लगने वाली लागत तो निकलती ही है। साथ ही तीन से चार महीने में आमदनी भी होती है। साथ ही इससे जमीन में जीवांश कार्बन भी बढ़ता है।
- ढोलामाजरा के राजेंद्र ने बताया कि खेत में भिंडी की फसल लगाई है। वह ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करते हैं। इस बार सहफसली खेती की है। अच्छे मुनाफे की उम्मीद है।
- वर्जन
जिले में तेजी से शाकभाजी का रकबा बढ़ा है। उद्यान विभाग भी किसानों को अच्छे बीज उपलब्ध करा रहा है। समय-समय पर किसानों को उद्यान विभाग प्रशिक्षण भी दिलाता है।
- गमपाल, जिला उद्यान अधिकारी।
- शाकभाजी का रकबा
फसल
आलू
गोभीवर्गीय
कद्दूवर्गीय
टमाटर
बैंगन
मूली
मटर
गाजर
अन्य शाकभाजी
शाकभाजी का कुल क्षेत्रफल
नोटः- क्षेत्रफल हेक्टेयर में, उत्पादन मीट्रिक टन में।
पुराना(वर्ष 2017), नया(वर्ष 2026)

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