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Saharanpur News: पौष्टिकता के साथ खेल, दूध के 65.93 फीसदी नमूने फेल
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- खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में खुलासा
- एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 लिए थे 245 दूध के नमूने, 238 फेल
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सेहत बनाने के लिए जिस दूध को हम पी रहे हैं, असल में उसमें उतने पोषक तत्व ही नहीं हैं, जितने तय मानक के अनुसार होने चाहिए। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से भेजे गए दूध के 65.93 फीसदी नमूने फेल आए हैं। अब मिलावटखोरों के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
मंडल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 ने 205 डेयरियों व अन्य स्थानों पर छापा मारा था। इस दौरान 245 दूध के नमूने संग्रहीत किए। 361 नमूनों की रिपोर्ट आ गई है। इसमें पुरानी रिपोर्ट भी शामिल है। लैब से आई रिपोर्ट में दूध के 238 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। 30 नमूने असुरक्षित और 207 अधोमानक हैं। दूध में सबसे ज्यादा मिलावट सहारनपुर में हो रही है।
यहां के 177 नमूने जांच में फेल आए हैं, जबकि मुजफ्फरनगर के 40 और शामली के 21 नमूने फेल हैं। मिलावटखोर अधिक मुनाफे की चाहत में दूध में पानी मिला रहे हैं। डेयरियों के खुले दूध में ही नहीं, बल्कि नामी कंपनियों के पैकिंग वाले दूध के भी यही हाल है। मिलावटखोरों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
-- यह है मानक स्तर
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, गाय के दूध में 3.2 प्रतिशत, भैंस के दूध में छह प्रतिशत और मिश्रित दूध में 4.5 प्रतिशत फैट होना चाहिए। इसके अलावा पैकिंग वाले दूध की अलग-अलग श्रेणियों में फैट की तय मात्रा अलग-अलग है। फूल क्रीम मिल्क में 6.0 प्रतिशत फैट, नौ प्रतिशत एनएसएफ, टोंड मिल्क में 3.0 प्रतिशत फैट और 8.5 प्रतिशत एनएसएफ और डबल टोंड मिल्क में 1.5 प्रतिशत फैट व 9.0 प्रतिशत एनएसएफ होनी चाहिए। इसी तरह भैंस के दूध में नौ प्रतिशत, गाय के दूध में 8.3 प्रतिशत, मिश्रित दूध में 8.5 प्रतिशत एनएसएफ (सॉलिड नोट फैट) होना चाहिए। जांच में फेल मिले नमूनों में फैट और एसएनएफ की मात्रा तय स्तर से कम पाई गई।
-- वर्जन
मंडल में टीम पूरे वर्ष मिलावट को रोकने के लिए नमूने संग्रहीत किए जाते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले को कोर्ट में ले जाकर सजा का निर्धारण कराया जाता है। - अशोक कुमार शर्मा, सहायक आयुक्त प्रथम, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग
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- एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 लिए थे 245 दूध के नमूने, 238 फेल
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सेहत बनाने के लिए जिस दूध को हम पी रहे हैं, असल में उसमें उतने पोषक तत्व ही नहीं हैं, जितने तय मानक के अनुसार होने चाहिए। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से भेजे गए दूध के 65.93 फीसदी नमूने फेल आए हैं। अब मिलावटखोरों के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
मंडल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 ने 205 डेयरियों व अन्य स्थानों पर छापा मारा था। इस दौरान 245 दूध के नमूने संग्रहीत किए। 361 नमूनों की रिपोर्ट आ गई है। इसमें पुरानी रिपोर्ट भी शामिल है। लैब से आई रिपोर्ट में दूध के 238 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। 30 नमूने असुरक्षित और 207 अधोमानक हैं। दूध में सबसे ज्यादा मिलावट सहारनपुर में हो रही है।
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यहां के 177 नमूने जांच में फेल आए हैं, जबकि मुजफ्फरनगर के 40 और शामली के 21 नमूने फेल हैं। मिलावटखोर अधिक मुनाफे की चाहत में दूध में पानी मिला रहे हैं। डेयरियों के खुले दूध में ही नहीं, बल्कि नामी कंपनियों के पैकिंग वाले दूध के भी यही हाल है। मिलावटखोरों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, गाय के दूध में 3.2 प्रतिशत, भैंस के दूध में छह प्रतिशत और मिश्रित दूध में 4.5 प्रतिशत फैट होना चाहिए। इसके अलावा पैकिंग वाले दूध की अलग-अलग श्रेणियों में फैट की तय मात्रा अलग-अलग है। फूल क्रीम मिल्क में 6.0 प्रतिशत फैट, नौ प्रतिशत एनएसएफ, टोंड मिल्क में 3.0 प्रतिशत फैट और 8.5 प्रतिशत एनएसएफ और डबल टोंड मिल्क में 1.5 प्रतिशत फैट व 9.0 प्रतिशत एनएसएफ होनी चाहिए। इसी तरह भैंस के दूध में नौ प्रतिशत, गाय के दूध में 8.3 प्रतिशत, मिश्रित दूध में 8.5 प्रतिशत एनएसएफ (सॉलिड नोट फैट) होना चाहिए। जांच में फेल मिले नमूनों में फैट और एसएनएफ की मात्रा तय स्तर से कम पाई गई।
मंडल में टीम पूरे वर्ष मिलावट को रोकने के लिए नमूने संग्रहीत किए जाते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले को कोर्ट में ले जाकर सजा का निर्धारण कराया जाता है। - अशोक कुमार शर्मा, सहायक आयुक्त प्रथम, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग