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Saharanpur News: दो करोड़ से बना स्कूल, दसवीं में दो बच्चे, अध्यापक एक
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:40 AM IST
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छुटमलपुर के भैंसराऊ में स्थित राजकीय इंटर काॅलेज की इमारत। संवाद
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छुटमलपुर। मुजफ्फराबाद ब्लाॅक के गांव भैंसराऊ में दो करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए राजकीय इंटर काॅलेज में न तो संसाधन है और न ही पढ़ाने के लिए अध्यापक। पांच कक्षाओं में छात्र संख्या भी केवल 89 ही है, जबकि दसवीं कक्षा में केवल दो ही छात्र है। फर्नीचर भी उधार का लेकर इस्तेमाल हो रहा है। कक्षा 11 और 12 तो अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है।
वर्ष 2014 में कॉलेज की इमारत को बनाकर छोड़ दिया गया था। इसमें 14 शिक्षण कक्ष, एक जीव विज्ञान, एक भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, आर्ट एंड क्राफ्ट कक्ष, पुस्तकालय, प्रधानाचार्य एवं लिपिक कार्यालय के साथ ही शौचालय का एक ब्लाॅक बना है। खिड़की, दरवाजे, फर्श आदि न होने के कारण इनमें इस्तेमाल लायक केवल चार कक्ष ही हैं। ग्रामीणों की काफी भाग दौड़ के बाद वर्ष 2024 में इन चार शिक्षण कक्षों, प्रधानाचार्य और लिपिक कार्यालय को ही विभाग के हैंडओवर करके यहां पहले शैक्षिक सत्र की शुरुआत की गई थी।
प्रयोगशालाओं में न उपकरण हैं और न पुस्तकालय में किताबें। स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब भी नहीं है। कॉलेज आबादी से बाहर स्थित है और चहारदीवारी नहीं बनी है। बिजली कनेक्शन नहीं है। ऐसे में मौसम खराब होने पर बिना लाइट और गर्मी में पंखों के अभाव में कक्षाएं चलानी पड़ती हैं।
वर्तमान में यहां प्रधानाचार्य विमल तिवारी, सहायक अध्यापक अमित कंडवाल और आउट सोर्सिंग के दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। प्रधानाचार्य के विभागीय कार्यों आदि के चलते बाहर होने की दशा में एकमात्र सहायक अध्यापक के भरोसे ही पांचों कक्षाओं का संचालन रहता है। बुधवार को भी प्रधानाचार्य प्रशिक्षण कार्य में डीआईओएस कार्यालय पर थे। बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर भी दूसरे काॅलेज से मांगकर इस्तेमाल हो रहा है। कॉलेज में प्रवक्ता के दस, सहायक अध्यापक के छह, क्लर्क के दो और चतुर्थ श्रेणी के तीन पद रिक्त हैं।
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वर्ष 2014 में कॉलेज की इमारत को बनाकर छोड़ दिया गया था। इसमें 14 शिक्षण कक्ष, एक जीव विज्ञान, एक भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, आर्ट एंड क्राफ्ट कक्ष, पुस्तकालय, प्रधानाचार्य एवं लिपिक कार्यालय के साथ ही शौचालय का एक ब्लाॅक बना है। खिड़की, दरवाजे, फर्श आदि न होने के कारण इनमें इस्तेमाल लायक केवल चार कक्ष ही हैं। ग्रामीणों की काफी भाग दौड़ के बाद वर्ष 2024 में इन चार शिक्षण कक्षों, प्रधानाचार्य और लिपिक कार्यालय को ही विभाग के हैंडओवर करके यहां पहले शैक्षिक सत्र की शुरुआत की गई थी।
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प्रयोगशालाओं में न उपकरण हैं और न पुस्तकालय में किताबें। स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब भी नहीं है। कॉलेज आबादी से बाहर स्थित है और चहारदीवारी नहीं बनी है। बिजली कनेक्शन नहीं है। ऐसे में मौसम खराब होने पर बिना लाइट और गर्मी में पंखों के अभाव में कक्षाएं चलानी पड़ती हैं।
वर्तमान में यहां प्रधानाचार्य विमल तिवारी, सहायक अध्यापक अमित कंडवाल और आउट सोर्सिंग के दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। प्रधानाचार्य के विभागीय कार्यों आदि के चलते बाहर होने की दशा में एकमात्र सहायक अध्यापक के भरोसे ही पांचों कक्षाओं का संचालन रहता है। बुधवार को भी प्रधानाचार्य प्रशिक्षण कार्य में डीआईओएस कार्यालय पर थे। बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर भी दूसरे काॅलेज से मांगकर इस्तेमाल हो रहा है। कॉलेज में प्रवक्ता के दस, सहायक अध्यापक के छह, क्लर्क के दो और चतुर्थ श्रेणी के तीन पद रिक्त हैं।