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Saharanpur News: फतवा गुर्जर के नाम से कांपती थी अंग्रेजी हुकूमत
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फतवा गुर्जर
- फोटो : reasi news
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अंग्रेजों ने हाथी लगा कर ढहाई थी फतवा गुर्जर की हवेली
संवाद न्यूज एजेंसी
लखनौती। गांव बुड्ढाखेड़ा में फतवा गुर्जर 52 गांवों के चौधरी कहलाते थे। 1857 की क्रांति के दौरान फतवा गुर्जर ने अंग्रेजों से गंगोह को करीब-करीब आजाद करा लिया था। इसलिए फतवा गुर्जर के नाम से ही अंग्रेजी हुकूमत कांपती थी। उन्होंने अंग्रेजों का लगान वसूल करने वाले लोगों को लूटकर उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी थी। अंग्रेजों ने इसका बदला लेने के लिए हाथी लगाकर उनकी हवेली ढहा दी थी।
फतवा गुर्जर की चौथी पीढ़ी के वंशज ताहिर चौधरी का कहना है कि आज तक सरकार ने उनके बुजुर्ग व आजादी के नायक फतवा गुर्जर के नाम पर गांव, गंगोह या क्षेत्र में कोई भी स्मारक, पार्क, कॉलेज, स्कूल तक नहीं बनवाया। हमारे परिवार के लोग गांव में जमीन देने के लिए भी तैयार हैं। कई बार जनप्रतिनिधि, अधिकारी उन्हें आश्वासन देकर गए लेकिन अमल नहीं हो सका। इसका उन्हें बेहद अफसोस है। इसी परिवार के नजदीकी यासीन चौधरी ने कहा कि यदि उनके नाम पर स्कूल, कॉलेज डिग्री कॉलेज या मार्ग बनाया जाता है तो वह जमीन देने के लिए तैयार हैं। पंडित राजेश वत्स, अब्बास चौधरी आदि लोगों ने उनके नाम पर गांव में कोई ना कोई स्मारक डिग्री कॉलेज बनाने की मांग की है।
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गंगोह में जन्मे मौलाना रशीद अहमद गंगोही ने भी अंग्रेजों को नाको चने चबवाए थे। 1857 की क्रांति के बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेज पलटन पर हमला कर तोपखाना लूट लिया था। इसके बाद मौलाना रशीद अहमद ने शामली पर हमला कर उसे भी अंग्रेजों से मुक्त करा लिया। इसके कुछ दिनों बाद ही अंग्रेजों ने भारी तोपखानों और फौज के साथ मिलकर क्रांतिकारियों पर हमला कर दिया। एक बार फिर अंग्रेजों का शामली पर कब्जा हो गया। इसके बाद मौलाना रशीद अहमद गंगोही को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
