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Saharanpur News: उत्तर भारत में रोड कनेक्टिविटी का मास्टर स्ट्रोक है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:59 AM IST
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छुटमलपुर। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से न केवल देश की राजधानी का सफर आसान हुआ है बल्कि यह सड़क मार्ग उत्तर भारत में सड़क कनेक्टिविटी का बड़ा नेटवर्क बनकर उभरा है। यह दो एक्सप्रेसवे, पांच नेशनल हाईवे और दर्जन भर स्टेट हाईवे से सीधा जुड़ रहा है। इस पर यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा तक के पर्यटक सीधे देहरादून और मसूरी पहुंच सकेंगे।
दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक 210 किमी लंबी यह परियोजना तीन एक्सप्रेसवे का अनूठा संगम है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका कनेक्टिविटी नेटवर्क है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, जबकि ईस्टर्न पेरिफेरल गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। ऐसे में ईपीएफ से जुड़े सभी शहरों की उत्तराखंड से सीधी कनेक्टिविटी होगी। मानेसर, गुरुग्राम पलवल, सोनीपत, पानीपत, कुंडली, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, चंडीगढ़, अंबाला, पंचकुला के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा, मथुरा तक के के पर्यटक देहरादून, मसूरी और हिमाचल प्रदेश में सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पोंटा साहिब तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
एक्सप्रेसवे से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44, 334, 307, 709 बी और 7 से होकर विभिन्न राज्यों तक आवागमन आसान होगा। इसके साथ ही पश्चिमी यूपी के गागलहेड़ी-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे, मुजफ्फरनगर-शामली, मेरठ-बागपत, बागपत-दिल्ली, मेरठ-बुलंदशहर मार्गों से कनेक्ट होते हुए यह एक्सप्रेसवे कई शहरों को सीधे जोड़ रहा है।
आर्थिक और पर्यटन विकास को देगा गति
कुंभ नगरी हरिद्वार, ऋषिकेश सहित उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों को जाने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर के किसान और व्यापारी अपने फल, सब्जी और अन्य उपज दिल्ली की मंडियों तक कम समय में सुरक्षित पहुंचा सकेंगे। इससे बड़ी बात निर्बाध यात्रा होने से ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे देवभूमि उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
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दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक 210 किमी लंबी यह परियोजना तीन एक्सप्रेसवे का अनूठा संगम है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका कनेक्टिविटी नेटवर्क है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, जबकि ईस्टर्न पेरिफेरल गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। ऐसे में ईपीएफ से जुड़े सभी शहरों की उत्तराखंड से सीधी कनेक्टिविटी होगी। मानेसर, गुरुग्राम पलवल, सोनीपत, पानीपत, कुंडली, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, चंडीगढ़, अंबाला, पंचकुला के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा, मथुरा तक के के पर्यटक देहरादून, मसूरी और हिमाचल प्रदेश में सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पोंटा साहिब तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
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एक्सप्रेसवे से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44, 334, 307, 709 बी और 7 से होकर विभिन्न राज्यों तक आवागमन आसान होगा। इसके साथ ही पश्चिमी यूपी के गागलहेड़ी-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे, मुजफ्फरनगर-शामली, मेरठ-बागपत, बागपत-दिल्ली, मेरठ-बुलंदशहर मार्गों से कनेक्ट होते हुए यह एक्सप्रेसवे कई शहरों को सीधे जोड़ रहा है।
आर्थिक और पर्यटन विकास को देगा गति
कुंभ नगरी हरिद्वार, ऋषिकेश सहित उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों को जाने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर के किसान और व्यापारी अपने फल, सब्जी और अन्य उपज दिल्ली की मंडियों तक कम समय में सुरक्षित पहुंचा सकेंगे। इससे बड़ी बात निर्बाध यात्रा होने से ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे देवभूमि उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।