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Saharanpur News: बजट से थी ढेरों उम्मीदें, काष्ठकला में कोई नक्काशी नहीं
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- अमेरिक टैरिफ के बाद काष्ठकला के उद्यमियों को थी बजट से उम्मीदें
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। केंद्र सरकार के बजट को लेकर जिलेवासियों को भी ढेरों उम्मीद थी। खासकर काष्ठकला के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की नजर इस पर टिकी हुई थी। इसकी वजह अमेरिकी टैरिफ रहा। उद्यमियों को उम्मीद थी कि टैरिफ को लेकर काष्ठकला के कारोबार को जो नुकसान उठाना पड़ रहा उससे बजट में थोड़ी राहत मिल सकती है। उद्यमी इस आस में थे कि बजट में कुछ न कुछ टैक्स आदि को लेकर राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, सहारनपुर की काष्ठकला विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहां से करीब सालाना 300 करोड़ से अधिक का कारोबार विदेश में होता है, लेकिन जब से अमेरिका में ट्रंप में टैरिफ की घोषणा की है, तब से कारोबार में काफी गिरावट आ रही है। पुराने ऑर्डर भी होल्ड पर चले गए हैं और नए से भी कोई उम्मीद अभी दिखाई नहीं दे रहा।
यह बोले काष्ठकला के उद्यमी
केंद्रीय बजट में काष्ठकला उद्योग के लिए कोई खास घोषणा नहीं है। सबसे अधिक प्रभाव ट्रंप के टैरिफ से पड़ रहा है। बजट से उम्मीद थी कि टैरिफ के जाल से निपटने और उसके असर को कमजोर करने के लिए सरकार कदमों की घोषणा करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
- आरिफ खान, महासचिव आर्टिजन हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन
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जिले का काष्ठकला उद्योग सदियों पुराना है। इसे बनाए रखने के लिए सरकार के प्रोत्साहन की जरूरत है। सरकार को निर्यात में छूट की घोषणा करनी चाहिए थी। इससे निर्यातकों को राहत मिलती। बजट से काष्ठकला उद्योग को कुछ खास नहीं मिला है।
- साबिर अली, निर्यात और उद्यमी
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बोले व्यापारी और कारोबारी
- सरकार को परिवहन क्षेत्र को मुख्य धारा में शामिल करना चाहिए था। ट्रांसपोर्टर व्यवसाय को राहत देने के लिए सरकार को टैक्स कम करने चाहिए थे, लेकिन एक प्रकार से पूर्व की तरह किए गए कार्यों पर ही बजट में विशेष ध्यान रखा गया। परिवहन क्षेत्र पर भी ध्यान देना चाहिए था।
- ब्रित चावला, अध्यक्ष सहारनपुर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
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सरकार सोने और चांदी पर एक्साइज ड्यटी को पहले की तरह ही रखा है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोने और चांदी के दाम नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति सरकार को बनाना चाहिए। इससे आमजन भी सोना और चांदी खरीद सकेंगे। व्यापारियों को भी लाभ होगा।
- विभु गोयल, सराफा कारोबारी
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केंद्रीय बजट में शेयर ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाया गया है। इससे निवेशकों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। इसके साथ ही विदेशी यात्रा टीडीएस लगाया गया है। आयकर में बदलाव न होने से आमजन को झटका लगा है।
दीपक जैन, टैक्स एडवोकेट
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सरकार को अधिवक्ताओं को राहत देने के लिए पेंशन स्कीम आदि की घोषणा करनी चाहिए थी। साथ ही स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाएं अधिवक्ताओं के लिए लागू करनी चाहिए। शिक्षा, रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अच्छी घोषणाएं की गई है। जो स्वागतयोग्य है।
- दीपक सैनी, अधिवक्ता
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अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। केंद्र सरकार के बजट को लेकर जिलेवासियों को भी ढेरों उम्मीद थी। खासकर काष्ठकला के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की नजर इस पर टिकी हुई थी। इसकी वजह अमेरिकी टैरिफ रहा। उद्यमियों को उम्मीद थी कि टैरिफ को लेकर काष्ठकला के कारोबार को जो नुकसान उठाना पड़ रहा उससे बजट में थोड़ी राहत मिल सकती है। उद्यमी इस आस में थे कि बजट में कुछ न कुछ टैक्स आदि को लेकर राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, सहारनपुर की काष्ठकला विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहां से करीब सालाना 300 करोड़ से अधिक का कारोबार विदेश में होता है, लेकिन जब से अमेरिका में ट्रंप में टैरिफ की घोषणा की है, तब से कारोबार में काफी गिरावट आ रही है। पुराने ऑर्डर भी होल्ड पर चले गए हैं और नए से भी कोई उम्मीद अभी दिखाई नहीं दे रहा।
यह बोले काष्ठकला के उद्यमी
केंद्रीय बजट में काष्ठकला उद्योग के लिए कोई खास घोषणा नहीं है। सबसे अधिक प्रभाव ट्रंप के टैरिफ से पड़ रहा है। बजट से उम्मीद थी कि टैरिफ के जाल से निपटने और उसके असर को कमजोर करने के लिए सरकार कदमों की घोषणा करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
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- आरिफ खान, महासचिव आर्टिजन हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन
जिले का काष्ठकला उद्योग सदियों पुराना है। इसे बनाए रखने के लिए सरकार के प्रोत्साहन की जरूरत है। सरकार को निर्यात में छूट की घोषणा करनी चाहिए थी। इससे निर्यातकों को राहत मिलती। बजट से काष्ठकला उद्योग को कुछ खास नहीं मिला है।
- साबिर अली, निर्यात और उद्यमी
बोले व्यापारी और कारोबारी
- सरकार को परिवहन क्षेत्र को मुख्य धारा में शामिल करना चाहिए था। ट्रांसपोर्टर व्यवसाय को राहत देने के लिए सरकार को टैक्स कम करने चाहिए थे, लेकिन एक प्रकार से पूर्व की तरह किए गए कार्यों पर ही बजट में विशेष ध्यान रखा गया। परिवहन क्षेत्र पर भी ध्यान देना चाहिए था।
- ब्रित चावला, अध्यक्ष सहारनपुर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
सरकार सोने और चांदी पर एक्साइज ड्यटी को पहले की तरह ही रखा है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोने और चांदी के दाम नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति सरकार को बनाना चाहिए। इससे आमजन भी सोना और चांदी खरीद सकेंगे। व्यापारियों को भी लाभ होगा।
- विभु गोयल, सराफा कारोबारी
केंद्रीय बजट में शेयर ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाया गया है। इससे निवेशकों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। इसके साथ ही विदेशी यात्रा टीडीएस लगाया गया है। आयकर में बदलाव न होने से आमजन को झटका लगा है।
दीपक जैन, टैक्स एडवोकेट
सरकार को अधिवक्ताओं को राहत देने के लिए पेंशन स्कीम आदि की घोषणा करनी चाहिए थी। साथ ही स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाएं अधिवक्ताओं के लिए लागू करनी चाहिए। शिक्षा, रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अच्छी घोषणाएं की गई है। जो स्वागतयोग्य है।
- दीपक सैनी, अधिवक्ता
