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Saharanpur News: शोभायात्रा निकालने को लेकर ग्रामीण और पुलिस आमने-सामने

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:31 AM IST
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Villagers and police face-to-face over procession
गागलहेड़ी के गांव खतौली में महापुरुषों के पोस्टरों के साथ महिलाएं। श्रोत ग्रामीण
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- एसडीएम कार्यालय की लिपिकीय भूल के चलते जारी हुई थी अनुमति
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- एसडीएम और सीओ ने गांव पहुंच रुकवाई शोभायात्रा, घंटों हंगामा


संवाद न्यूज एजेंसी
गागलहेड़ी। खतोली में शोभायात्रा निकालने को लेकर पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। ग्रामीण शोभायात्रा निकालने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस मोर्चा संभाले रही। महिलाओं के साथ भी पुलिस की झड़प हुई। घंटों मशक्कत के बाद एसडीएम और सीओ के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए। इसके बाद शोभायात्रा नहीं निकाली गई और पूजा-अर्चना कर जयंती समारोह संपन्न हुआ।
दरअसल, रविवार दोपहर के समय ग्रामीण संत रविदास शोभायात्रा निकालने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान एसडीएम सदर सुबोध कुमार और सीओ सदर मुनीष चंद्र पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि शोभायात्रा की अनुमति नहीं है। इस पर आयोजकों ने अनुमति पत्र दिखाया। इसे देखकर एसडीएम ने बताया कि यह लिपिक की गलती से जारी हो गया है। पुलिस द्वारा अपनी आख्या में अनुमति नहीं दी गई थी। वैसे भी इस गांव में पहले कभी यात्रा नहीं निकली है। ऐसे में नई परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी।
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यह सुनकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ऐसे में तनाव की स्थिति बन गई। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत शुरू की। इसी बीच मंदिर परिसर में एकत्र महिलाएं बाबा साहब और संत रविदास की पेंटिंग हाथों में लेकर शोभायात्रा निकालने लगी। इस पर अफसरों ने सख्ती करते हुए पुलिस की मदद से इसे रुकवा दिया। यहां महिलाओं और युवकों की पुलिस से खासी नोकझोंक हुई, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों के काफी समझाने पर शाम पांच बजे मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद भंडारे का आयोजन कर जयंती समारोह मनाया गया।
-- पूर्व में कोई भी शोभायात्रा नहीं निकाली गई थी और न ही कोई पूर्व में अनुमति दी गई थी। इस बार भी इनको अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन लिपिक त्रुटिवश अनुमति पत्र जारी हो गया। जानकारी में आते ही निरस्त कर नई परंपरा शुरू करने रोक लगा दी। - सुबोध कुमार, एसडीएम सदर

-- पुलिस द्वारा शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। सभी ग्रामीणों को समझा दिया गया है। मामला शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया है। - मुनीश चंद्र, सीओ सदर
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