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Saharanpur News: महानगर में ई-रिक्शा का जाल, तय रूट हवा में, वाहन चालक और राहगीर हलकान
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 21 Jan 2026 01:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। महानगर में ई-रिक्शा का जाल इस कदर फैल चुका है कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के उद्देश्य से यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा के लिए तय रूट निर्धारित किए थे, लेकिन इन रूट का पालन नहीं कराया जा रहा। नतीजतन मुख्य सड़कों, चौराहों से लेकर बाजार की तंग गलियों में ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी है।
आकाश निवासी गोविंद विहार ने मेरी आवाज सुनो कॉलम के लिए समस्या भेजी थी। 20 जनवरी के संस्करण में समस्या प्रकाशित करने के बाद टीम ने पड़ताल की। इस दौरान लोगों ने बताया कि सवारी बैठाने और उतारने के लिए चालक कहीं भी वाहन रोक देते हैं। अचानक ब्रेक लगाने और बीच सड़क पर रुकने की वजह से पीछे से आने वाले वाहनों को कई बार संभलने का मौका तक नहीं मिलता। कई इलाकों में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे न सिर्फ आम लोग बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और मरीज भी परेशान हैं।
- बोले लोग
अशोक कुमार ने बताया कि यातायात पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। सुबह और शाम के समय हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
- अशोक मलिक ने बताया कि यातायात पुलिस ने रूट तय किए हैं, लेकिन कोई उनका पालन नहीं करता। ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर सवारी बैठाते हैं, जिससे पूरा ट्रैफिक रुक जाता है।
- सचिन भारद्वाज ने बताया कि स्कूल के सामने और बाजारों में हालत सबसे खराब है। बच्चे सड़क पार नहीं कर पाते और वाहन चालक आपस में उलझते रहते हैं। प्रशासन को सख्ती दिखानी चाहिए।
- निखिल ने बताया कि हर चौराहे पर ई-रिक्शा और ऑटो की कतार लगी रहती है। न तो पार्किंग की व्यवस्था है और न ही नियमों का डर। आरटीओ को भी एक गाइड लाइन बनानी चाहिए कि हर माह में कितने लाइसेंस जारी किए जाए।
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सहारनपुर। महानगर में ई-रिक्शा का जाल इस कदर फैल चुका है कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के उद्देश्य से यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा के लिए तय रूट निर्धारित किए थे, लेकिन इन रूट का पालन नहीं कराया जा रहा। नतीजतन मुख्य सड़कों, चौराहों से लेकर बाजार की तंग गलियों में ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी है।
आकाश निवासी गोविंद विहार ने मेरी आवाज सुनो कॉलम के लिए समस्या भेजी थी। 20 जनवरी के संस्करण में समस्या प्रकाशित करने के बाद टीम ने पड़ताल की। इस दौरान लोगों ने बताया कि सवारी बैठाने और उतारने के लिए चालक कहीं भी वाहन रोक देते हैं। अचानक ब्रेक लगाने और बीच सड़क पर रुकने की वजह से पीछे से आने वाले वाहनों को कई बार संभलने का मौका तक नहीं मिलता। कई इलाकों में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे न सिर्फ आम लोग बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और मरीज भी परेशान हैं।
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अशोक कुमार ने बताया कि यातायात पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। सुबह और शाम के समय हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
- अशोक मलिक ने बताया कि यातायात पुलिस ने रूट तय किए हैं, लेकिन कोई उनका पालन नहीं करता। ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर सवारी बैठाते हैं, जिससे पूरा ट्रैफिक रुक जाता है।
- सचिन भारद्वाज ने बताया कि स्कूल के सामने और बाजारों में हालत सबसे खराब है। बच्चे सड़क पार नहीं कर पाते और वाहन चालक आपस में उलझते रहते हैं। प्रशासन को सख्ती दिखानी चाहिए।
- निखिल ने बताया कि हर चौराहे पर ई-रिक्शा और ऑटो की कतार लगी रहती है। न तो पार्किंग की व्यवस्था है और न ही नियमों का डर। आरटीओ को भी एक गाइड लाइन बनानी चाहिए कि हर माह में कितने लाइसेंस जारी किए जाए।
