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UP: सहारनपुर में सर्पदंश से 11 वर्षीय बालिका की मौत, अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराते रहे परिजन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 23 Jun 2026 03:26 PM IST
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सार

सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र में सर्पदंश के बाद 11 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। परिजन अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराते रहे, जिससे उपचार में देरी हो गई।

UP:Snakebite Claims Girl’s Life as Family Relies on Faith Healing Instead of Medical Treatment
बालिका का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र में अंधविश्वास की कीमत एक 11 वर्षीय बालिका को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले परिवार की बेटी को देर रात सांप ने काट लिया, लेकिन परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और स्थानीय उपचार के लिए भटकते रहे। हालत बिगड़ने पर जब बालिका को अस्पताल पहुंचाया गया तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।



रात में सोते समय सांप ने काटा
देवबंद क्षेत्र के बहादरपुर गांव निवासी उपेंद्र कुमार अपने परिवार के साथ एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। परिवार भट्ठे के पास बनी झोपड़ी में रह रहा था। सोमवार देर रात उनकी 11 वर्षीय पुत्री रामभतेरी अपनी बड़ी बहन के साथ चारपाई पर सो रही थी। रात करीब तीन बजे वह अचानक चीख पड़ी और परिजनों को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है।
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सांप दिखाई दिया, लेकिन अस्पताल नहीं ले गए
शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के अनुसार झोपड़ी के पास काले-सफेद रंग का सांप दिखाई दिया, जिसे बाद में मार दिया गया। इसके बावजूद परिजन बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए दूसरे गांव ले गए। कई घंटे तक स्थानीय उपचार और अंधविश्वास आधारित तरीकों का सहारा लिया जाता रहा।

बिगड़ती हालत के बाद पहुंचे अस्पताल
सुबह होते-होते रामभतेरी की हालत गंभीर होने लगी। इसके बाद परिजन उसे विभिन्न स्थानों पर उपचार के लिए ले गए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आखिरकार बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतका के पिता उपेंद्र कुमार पिछले कई वर्षों से भट्टों पर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। परिवार में पत्नी, तीन बेटियां और दो बेटे हैं। मासूम की मौत के बाद परिवार और आसपास के लोगों में शोक का माहौल है। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

अंधविश्वास बना मौत की वजह
चिकित्सकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सर्पदंश के मामलों में लोग झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं, जिससे उपचार में देरी हो जाती है और जान का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

डॉक्टर बोले- समय पर इलाज से बच सकती थी जान
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. राहित वालिया ने बताया कि सर्पदंश के बाद एंटी-सर्प विष उपचार ही सबसे प्रभावी उपाय है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बालिका को अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी जान बचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।
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