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Sambhal News: 4.50 करोड़ पर फिरा पानी...सरोवर फिर भी प्यासे

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:32 AM IST
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4.5 crore rupees wasted... yet the reservoirs remain dry.
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संभल। तालाबों के सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण की कवायद को अफसर पलीता लगा रहे हैं। यही कारण है कि जिले के 135 तालाबों पर करीब साढ़े करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा, तालाब सूखते गए और सौंदर्यीकरण के जो काम हुए, वह तहस-नहस हो गए।
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हालत यह है कि धरती की सूखती कोख को नया जीवन देने वाले सरोवर ही अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि कि जिले के आठ ब्लॉकों में सात डार्क जोन हैं। बावजूद इसके अफसर नहीं चेत रहे। बताते चले कि संभल, असमोली, रजपुरा, गुन्नौर, बहजोई, पवांसा, बनियाठेर, जुनावई में 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तैयार कराया गया था। उस समय इन्हें पिकनिक स्पॉट का रूप दिया गया था।
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यह कराए गए थे काम
अमृत सरोवर पर लोगों के टहलने के लिए इंटरलाकिंग सड़क, झंडा फहराने का चबूतरा, पानी के लिए नल व छाया के लिए पौधे रोपने का कार्य किया गया था। हालांकि, बाद में पौधे हर वर्ष रोपे गए लेकिन यह पेड़ नहीं बन सकें।
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केस-एक
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव साकिन शोभापुर खालसा में तालाब को अमृत सरोवर बनाने के लिए करीब तीन लाख रुपये खर्च किए गए। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते सरोवर संवरने के बजाय बदहाली का शिकार हो गए। पानी आना तो दूर, अब चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। सौंदर्यीकरण का काम भी ध्वस्त हो गया है। गांव का पानी इधर-उधर जा रहा है। इस कारण लोग भी परेशान हैं।
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केस-दो
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव चिरौली भगवंतपुर में तालाब भले ही अमृत सरोवर के तौर पर विकसित कराया गया लेकिन अब उदासीनता की भेंट चढ़ गया है। गांव का पानी सड़कों पर बहता है। तालाब तक जाने की कोई व्यवस्था ही नहीं की गई। जबकि तालाब को विकसित करने में मनरेगा की मद से करीब तीन लाख रुपये खर्च किए गए थे।
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केस-तीन
असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव भटपुरा में अमृत सरोवर तालाब किनारे उपले पथे मिले। बैठने के लिए लगी बेंच गंदगी और घास से घिरी है। जबकि कुछ समय पहले ही लाखों रुपये खर्च कर इसकी सूरत संवारी गई थी। इसके बाद भी बदहाली बरकरार है।

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केस-चार
रजपुरा ब्लॉक क्षेत्र के गांव सिंहावली में अमृत सरोवर आधा-अधूरा पड़ा है। जबकि कागजों में कोई भी सरोवर अधूरा नहीं है। सभी की स्थिति सही है। यदि हकीकत देखी जाए तो शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया है। लाखों रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन कहां किए गए इसका जवाब जिम्मेदार नहीं दे पाएंगे। पड़ताल के दौरान यह हकीकत सामने आई है। अब जिम्मेदार इसका खर्चा भी बताने से कतरा रहे हैं।
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