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Sambhal News: भ्रष्टाचार के खिलाफ भाकियू असली ने धरना देकर प्रदर्शन किया
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संभल। चकबंदी विभाग के द्वारा बिना बैनामा दाखिल खारिज करने, भष्ट्राचार को बढ़ावा देने संबंधी कई मुद्दों को आधार बनाकर भाकियू असली के पदाधिकारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। पुरानी तहसील के परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन में पदाधिकारियों के अलावा कई ऐसे किसान भी थे, जो पीड़ित थे।
चंदौसी तहसील क्षेत्र के गांव परतापुर के निवासी पीड़ित किसान ओमप्रकाश का कहना था कि बिना बैनामा के ही चकबंदी विभाग ने दाखिल खारिज कर दिया। इस पर उन्होंने पैरवी की। कई बार प्रार्थना पत्र दिए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। खुलेआम अधिकारी धमका रहे हैं कि कुछ भी कर लो हम अपनी मर्जी से ही काम करेंगे। हद तो यह है कि परतापुर में ही नवीन परती की भूमि पर रुपये लेकर एक व्यक्ति काे कब्जा करा दिया। बाद में पैमाइश हुई तो यह खाली हुई। अब उस व्यक्ति को न जमीन मिल रही और न रुपये।
चकबंदी विभाग के यह कारनामे उन्हें अवसाद की ओर धकेल रहे हैं। भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने कहा कि किसानों के आर्थिक उत्पीड़न, बढ़ते भ्रष्टाचार और बिना बैनामे के नामांतरण आदि समस्याओं को लेकर वह शांत नहीं रहेंगे। उप संचालक (चकबंदी) संभल के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया है, इसे आर पार करने की तैयारी है। कहा कि चकबंदी कर्ताओं के द्वारा चकबंदी प्रक्रिया में किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। नकल खतौनी से लेकर अंश व नाम दुरुस्ती तक के प्रकरणों में किसानों का आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। भ्रष्टाचार ही कारण है कि बिना बैनामा नामांतरण के आदेश हो रहे हैं।
भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव का कहना है कि चकबंदी विभाग में डीडीसी का अतिरिक्त दायित्व अब जिले के आला अफसर के पास हैं। बावजूद इसके समस्याएं हैं। अधीनस्थ कर्मचारी बेलगाम होकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। इस बीच नायब तहसीलदार किसानों के बीच आए और एसडीएम से फोन पर वार्ता कराई। एसडीएम ने एक सप्ताह के अंदर चकबंदी अधिकारियों से वार्ता कराकर समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। जिसके बाद धरना खत्म कर दिया।
इस दौरान चौधरी संजीव गांधी, जयवीर सिंह यादव, आशक रजा, बाबूराम प्रजापति, अशोक शर्मा, डॉ.जावेद, दिलशाद हुसैन, अनीस अहमद, हाजी महबूब, ब्रह्मचारी यादव, चुन्नीलाल यादव, नवित चौधरी, चौधरी अर्जुन सिंह, मोनू चौधरी, समरपाल सिंह, राहिद अली, मोहम्मद सुलेमान, रामसेवक चौपा, ओमप्रकाश राणा, दौली सिंह राणा, वीरेश यादव, अनेक सिंह यादव आदि रहे। अध्यक्षता चंद्रप्रकाश शर्मा ने की।
घूसखोरी का आलम यह है कि बिना बैनामा अधिकारी दाखिल खारिज कर रहे हैं। किसी की जमीन, किसी के नाम दर्ज करने संबंधी आदेश पारित कर रहे हैं। कई मामले हमारे पास हैं। इन्हें लेकर धरना-प्रदर्शन किया है। यदि समाधान नहीं मिलेगा तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। -राजपाल सिंह यादव, भाकियू असली के जिलाध्यक्ष
संभल जिले का राजस्व रिकॉर्ड मुरादाबाद से संभल आना है। तीन बार डीएम से वार्ता कर चुके हैं। डीएम कहते हैं मंगवा रहे हैं लेकिन अभी तक नहीं आया। मुरादाबाद से नकल मिल नहीं रही है। किसान बेहद परेशान हैं। क्या करें, समझ नहीं आ रहा। -जयवीर सिंह यादव, भाकियू असली के प्रदेश प्रवक्ता
अधिकारी यदि समस्याएं सुनेंगे तो धरना क्यों देंगे। चकबंदी विभाग चक नहीं काट रहा है। लंबे समय से समस्या है लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं मिल रहा है। -मेवाराम, मढ़ावली रसूलपुर
बिना बैनामा दाखिल खारिज किया है। सुविधा शुल्क लेकर नवीन परती की भूमि पर आबादी में चक काट दिया। बाद में पता चला तो जमीन चली गई। अब न जमीन मिल रही है और न रुपये। ओमप्रकाश, गांव परतापुर
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चंदौसी तहसील क्षेत्र के गांव परतापुर के निवासी पीड़ित किसान ओमप्रकाश का कहना था कि बिना बैनामा के ही चकबंदी विभाग ने दाखिल खारिज कर दिया। इस पर उन्होंने पैरवी की। कई बार प्रार्थना पत्र दिए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। खुलेआम अधिकारी धमका रहे हैं कि कुछ भी कर लो हम अपनी मर्जी से ही काम करेंगे। हद तो यह है कि परतापुर में ही नवीन परती की भूमि पर रुपये लेकर एक व्यक्ति काे कब्जा करा दिया। बाद में पैमाइश हुई तो यह खाली हुई। अब उस व्यक्ति को न जमीन मिल रही और न रुपये।
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चकबंदी विभाग के यह कारनामे उन्हें अवसाद की ओर धकेल रहे हैं। भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने कहा कि किसानों के आर्थिक उत्पीड़न, बढ़ते भ्रष्टाचार और बिना बैनामे के नामांतरण आदि समस्याओं को लेकर वह शांत नहीं रहेंगे। उप संचालक (चकबंदी) संभल के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया है, इसे आर पार करने की तैयारी है। कहा कि चकबंदी कर्ताओं के द्वारा चकबंदी प्रक्रिया में किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। नकल खतौनी से लेकर अंश व नाम दुरुस्ती तक के प्रकरणों में किसानों का आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। भ्रष्टाचार ही कारण है कि बिना बैनामा नामांतरण के आदेश हो रहे हैं।
भाकियू असली के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव का कहना है कि चकबंदी विभाग में डीडीसी का अतिरिक्त दायित्व अब जिले के आला अफसर के पास हैं। बावजूद इसके समस्याएं हैं। अधीनस्थ कर्मचारी बेलगाम होकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। इस बीच नायब तहसीलदार किसानों के बीच आए और एसडीएम से फोन पर वार्ता कराई। एसडीएम ने एक सप्ताह के अंदर चकबंदी अधिकारियों से वार्ता कराकर समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। जिसके बाद धरना खत्म कर दिया।
इस दौरान चौधरी संजीव गांधी, जयवीर सिंह यादव, आशक रजा, बाबूराम प्रजापति, अशोक शर्मा, डॉ.जावेद, दिलशाद हुसैन, अनीस अहमद, हाजी महबूब, ब्रह्मचारी यादव, चुन्नीलाल यादव, नवित चौधरी, चौधरी अर्जुन सिंह, मोनू चौधरी, समरपाल सिंह, राहिद अली, मोहम्मद सुलेमान, रामसेवक चौपा, ओमप्रकाश राणा, दौली सिंह राणा, वीरेश यादव, अनेक सिंह यादव आदि रहे। अध्यक्षता चंद्रप्रकाश शर्मा ने की।
घूसखोरी का आलम यह है कि बिना बैनामा अधिकारी दाखिल खारिज कर रहे हैं। किसी की जमीन, किसी के नाम दर्ज करने संबंधी आदेश पारित कर रहे हैं। कई मामले हमारे पास हैं। इन्हें लेकर धरना-प्रदर्शन किया है। यदि समाधान नहीं मिलेगा तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। -राजपाल सिंह यादव, भाकियू असली के जिलाध्यक्ष
संभल जिले का राजस्व रिकॉर्ड मुरादाबाद से संभल आना है। तीन बार डीएम से वार्ता कर चुके हैं। डीएम कहते हैं मंगवा रहे हैं लेकिन अभी तक नहीं आया। मुरादाबाद से नकल मिल नहीं रही है। किसान बेहद परेशान हैं। क्या करें, समझ नहीं आ रहा। -जयवीर सिंह यादव, भाकियू असली के प्रदेश प्रवक्ता
अधिकारी यदि समस्याएं सुनेंगे तो धरना क्यों देंगे। चकबंदी विभाग चक नहीं काट रहा है। लंबे समय से समस्या है लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं मिल रहा है। -मेवाराम, मढ़ावली रसूलपुर
बिना बैनामा दाखिल खारिज किया है। सुविधा शुल्क लेकर नवीन परती की भूमि पर आबादी में चक काट दिया। बाद में पता चला तो जमीन चली गई। अब न जमीन मिल रही है और न रुपये। ओमप्रकाश, गांव परतापुर
