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Sambhal News: कलक्ट्रेट पर गरजे किसान, जमकर नारेबाजी
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बहजोई(संभल)। नरौरा खंड निचली गंगा नहर समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में अवैध खनन समेत कई ग्राम पंचायतों में कागजों में विकास कार्य होने से सरकारी धन के गबन का आरोप लगाते हुए आठ सूत्री मांगों को लेकर भाकियू अराजनैतिक के पदाधिकारी कलक्ट्रेट पर गरजे। इस बीच, डीएम दफ्तर के परिसर में एकत्र हुए किसानों ने जमकर नारेबाजी की। बाद में मांगों को लेकर एडीएम न्यायिक को ज्ञापन दिया।
मंगलवार को सुबह 11 बजे भाकियू, अ के जिलाध्यक्ष शंकर सिंह यादव के नेतृत्व में कलक्ट्रेट के निकट पंचायत हुई। इसमें मुख्य अतिथि व संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने विचार रखे। इसके बाद, पदाधिकारी व कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पर पहुंचे और डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठकर जमकर नारेबाजी करने लगे। बाद में एडीएम न्यायिक सौरभ कुमार पांडेय को आठ सूत्रीय ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में पदाधिकारियों का कहना था कि नरौरा खंड निचली गंगा नहर व जिले के अन्य क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, इससे पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। अवैध खनन से बाढ़ आने की भी आशंका है। जिले की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कागजों में हो रहे हैं और सरकारी धन का गबन किया गया है। इस पर गंभीरता दिखाई जाए। गंगा एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने के नाम पर गांव, अमरावती, सारंगपुर, भमोरी पट्टी, खरसपा व सौंधन आदि में 303 हेक्टेयर भूमि का अधिकरण करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। जिले में भूमि अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट बढ़ाया जाए या फिर बाजार भाव पर किया जाए। इसके अलावा अन्य मांगें रखीं।
इस बीच वीरेश यादव, शंकर सिंह आर्य, केपी राणा, इंद्रपाल सिंह, शिशुपाल सिंह, सत्यवीर सिंह, सत्यभान सिंह, गुलफाम सिंह, अनुज कुमार, भान सिंह, सचिन त्यागी व भूरे सिंह आदि रहे।
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डीएम से मिलकर ज्ञापन देने की जिद पर अड़े
बहजोई। डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठे किसान डीएम से मिलकर ज्ञापन देने की जिद पर अड़े। इनका कहना था कि डीएम को ज्ञापन देकर किसानों की समस्याओं को रखा जाना था। बाद में, डीएम की ओर से कुछ पदाधिकारियों को बुलाकर किसानों की समस्या सुनी और अधिकारियों को बुलाकर किसानों के साथ बैठक करते हुए समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया। संवाद
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पदाधिकारियों की कई बार पुलिस से भी हुई नोकझोंक
बहजोई। कलक्ट्रेट परिसर में घुसकर डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठे किसानों की कई बार पुलिस से नोकझोंक भी हुई। पुलिस का कहना था कि धरनास्थल तय किया गया है, तो कलक्ट्रेट में पहुंचकर प्रदर्शन करना ठीक नहीं है। इस पर भाकियू, अ के पदाधिकारियों का कहना था कि पंचायत में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी ने किसानों की समस्याओं पर गौर नहीं दिया, इसलिए डीएम से मिलकर किसानों की समस्या रखने के लिए कलक्ट्रेट में आए हैं। यह धरना प्रदर्शन नहीं है।
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मंगलवार को सुबह 11 बजे भाकियू, अ के जिलाध्यक्ष शंकर सिंह यादव के नेतृत्व में कलक्ट्रेट के निकट पंचायत हुई। इसमें मुख्य अतिथि व संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने विचार रखे। इसके बाद, पदाधिकारी व कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पर पहुंचे और डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठकर जमकर नारेबाजी करने लगे। बाद में एडीएम न्यायिक सौरभ कुमार पांडेय को आठ सूत्रीय ज्ञापन दिया।
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ज्ञापन में पदाधिकारियों का कहना था कि नरौरा खंड निचली गंगा नहर व जिले के अन्य क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, इससे पर्यावरण का नुकसान हो रहा है। अवैध खनन से बाढ़ आने की भी आशंका है। जिले की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कागजों में हो रहे हैं और सरकारी धन का गबन किया गया है। इस पर गंभीरता दिखाई जाए। गंगा एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने के नाम पर गांव, अमरावती, सारंगपुर, भमोरी पट्टी, खरसपा व सौंधन आदि में 303 हेक्टेयर भूमि का अधिकरण करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। जिले में भूमि अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट बढ़ाया जाए या फिर बाजार भाव पर किया जाए। इसके अलावा अन्य मांगें रखीं।
इस बीच वीरेश यादव, शंकर सिंह आर्य, केपी राणा, इंद्रपाल सिंह, शिशुपाल सिंह, सत्यवीर सिंह, सत्यभान सिंह, गुलफाम सिंह, अनुज कुमार, भान सिंह, सचिन त्यागी व भूरे सिंह आदि रहे।
डीएम से मिलकर ज्ञापन देने की जिद पर अड़े
बहजोई। डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठे किसान डीएम से मिलकर ज्ञापन देने की जिद पर अड़े। इनका कहना था कि डीएम को ज्ञापन देकर किसानों की समस्याओं को रखा जाना था। बाद में, डीएम की ओर से कुछ पदाधिकारियों को बुलाकर किसानों की समस्या सुनी और अधिकारियों को बुलाकर किसानों के साथ बैठक करते हुए समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया। संवाद
पदाधिकारियों की कई बार पुलिस से भी हुई नोकझोंक
बहजोई। कलक्ट्रेट परिसर में घुसकर डीएम दफ्तर के बरामदे में बैठे किसानों की कई बार पुलिस से नोकझोंक भी हुई। पुलिस का कहना था कि धरनास्थल तय किया गया है, तो कलक्ट्रेट में पहुंचकर प्रदर्शन करना ठीक नहीं है। इस पर भाकियू, अ के पदाधिकारियों का कहना था कि पंचायत में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी ने किसानों की समस्याओं पर गौर नहीं दिया, इसलिए डीएम से मिलकर किसानों की समस्या रखने के लिए कलक्ट्रेट में आए हैं। यह धरना प्रदर्शन नहीं है।