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Sambhal News: जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में पांच लोगों की गई थी जान
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संभल। शहर की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताने वाले वाद के आधार पर सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर की टीम 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद पहुंची थी। इस दौरान बड़ा बवाल हो गया था। भीड़ उग्र होकर पथराव और फायरिंग करने लगी थी। इस बवाल में पांच लोगों की जान चली गई थी। 29 पुलिसकर्मी और तत्कालीन एसडीएम रमेश बाबू घायल हुए थे। पुलिस ने आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा था। तनाव के कारण संभल में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।
सर्वे टीम का नेतृत्व चंदौसी के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश सिंह राघव कर रहे थे। संभल के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी टीम के साथ थे। सर्वे शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन अचानक हालात बिगड़ गए। सर्वे टीम को सुरक्षित मस्जिद से बाहर निकाला गया। पुलिस और पीएसी के साथ अधिकारियों ने उपद्रवी भीड़ से मोर्चा लिया था। इसके बावजूद करीब डेढ़ घंटे तक हालात बेकाबू रहे थे। यह बवाल शहर के लोगों के लिए किसी नसूर से कम नहीं है। आज भी इसके दंश लोग अलग-अलग तरह से झेल रहे हैं। हालांकि शहर में पूरी तरह शांतिबहाली है लेकिन बवाल की टीस कम शायद ही कभी हो पाए। इस बवाल में पांच परिवारों ने अपने पांच नौजवान खोए हैं।
सांसद और जामा मस्जिद के सदर बने हैं आरोपी
इस बवाल में संभल और नखासा थाने में तीन हजार लोगों के खिलाफ 12 एफआईआर दर्ज हुई थीं। सपा के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली को भी आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा जामा मस्जिद कमेटी के कई पदाधिकारी आरोपी बने थे। इसमें कुछ आरोपी कोर्ट चले गए थे जिनको राहत मिल चुकी है।
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एसआईटी जांच का खुलासा
बवाल की जांच के लिए गठित एसआईटी ने खुलासा किया कि जिन लोगों की जान गई, उन्हें हिस्ट्रीशीटर शारिक साटा के गुर्गों ने मारा था। शारिक साटा ने ही विदेशी हथियार उपलब्ध कराए थे और बवाल में गोली चलवाई थी, जिससे आम लोगों की जान गई। शारिक साटा अभी तक विदेश में है। कहा जाता है कि वह दुबई से अपने गिरोह का संचालन करता है।
बवाल के बाद से शहर में लगातार चौकसी बरती जा रही है। सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शहरभर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है। पांच पुलिसचौकी बनाई गई हैं। असमोली सीओ कार्यालय भी संभल में बनेगा। एटीएस की यूनिट भी स्थापित हो चुकी है। सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रहती है।
कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी संभल
यह है विवाद और दावा
हिंदू पक्ष ने संभल के चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह की कोर्ट में संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए दावा पेश किया था। हिंदू पक्ष का कहना था कि मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासन से पहले बना था, जबकि मस्जिद मुगलकाल में मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। 19 नवंबर को हिंदू पक्ष द्वारा दावा पेश करने के दिन ही न्यायालय ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर दिया था। उसी दिन कोर्ट कमिश्नर ने मस्जिद पहुंचकर सर्वे भी किया था। करीब दो घंटे तक वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई थी। यह सर्वे पूरा नहीं हुआ था। 24 नवंबर को फिर से सर्वे शुरू हुआ था और इस दौरान ही बवाल हो गया था।
बवाल में दीपा सराय में हुआ था दरोगा शाह फैसल पर हमला, अब एसपी ने थाने की जिम्मेदारी दी
24 नवंबर 2024 को दीपा सराय पुलिस चौकी में दरोगा शाह फैसल की तैनाती थी। इस दिन जब बवाल हुआ तो भीड़ ने उनको घेर लिया था और बाइक में आग लगाने का प्रयास किया था। एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए थे। बवालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस बवाल में विवेचना भी शाह फैसल ने सराहनीय की थी। सोमवार को उनको ऐंचोड़ा कंबोह का थाना प्रभारी बनाया गया है। वह नरौली देहात पर प्रभारी थे। एसपी ने बताया कि बवाल की विवेचना में उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत एकत्र किए थे।
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सर्वे टीम का नेतृत्व चंदौसी के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश सिंह राघव कर रहे थे। संभल के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी टीम के साथ थे। सर्वे शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन अचानक हालात बिगड़ गए। सर्वे टीम को सुरक्षित मस्जिद से बाहर निकाला गया। पुलिस और पीएसी के साथ अधिकारियों ने उपद्रवी भीड़ से मोर्चा लिया था। इसके बावजूद करीब डेढ़ घंटे तक हालात बेकाबू रहे थे। यह बवाल शहर के लोगों के लिए किसी नसूर से कम नहीं है। आज भी इसके दंश लोग अलग-अलग तरह से झेल रहे हैं। हालांकि शहर में पूरी तरह शांतिबहाली है लेकिन बवाल की टीस कम शायद ही कभी हो पाए। इस बवाल में पांच परिवारों ने अपने पांच नौजवान खोए हैं।
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सांसद और जामा मस्जिद के सदर बने हैं आरोपी
इस बवाल में संभल और नखासा थाने में तीन हजार लोगों के खिलाफ 12 एफआईआर दर्ज हुई थीं। सपा के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली को भी आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा जामा मस्जिद कमेटी के कई पदाधिकारी आरोपी बने थे। इसमें कुछ आरोपी कोर्ट चले गए थे जिनको राहत मिल चुकी है।
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एसआईटी जांच का खुलासा
बवाल की जांच के लिए गठित एसआईटी ने खुलासा किया कि जिन लोगों की जान गई, उन्हें हिस्ट्रीशीटर शारिक साटा के गुर्गों ने मारा था। शारिक साटा ने ही विदेशी हथियार उपलब्ध कराए थे और बवाल में गोली चलवाई थी, जिससे आम लोगों की जान गई। शारिक साटा अभी तक विदेश में है। कहा जाता है कि वह दुबई से अपने गिरोह का संचालन करता है।
बवाल के बाद से शहर में लगातार चौकसी बरती जा रही है। सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शहरभर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होती है। पांच पुलिसचौकी बनाई गई हैं। असमोली सीओ कार्यालय भी संभल में बनेगा। एटीएस की यूनिट भी स्थापित हो चुकी है। सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रहती है।
कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी संभल
यह है विवाद और दावा
हिंदू पक्ष ने संभल के चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह की कोर्ट में संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए दावा पेश किया था। हिंदू पक्ष का कहना था कि मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासन से पहले बना था, जबकि मस्जिद मुगलकाल में मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। 19 नवंबर को हिंदू पक्ष द्वारा दावा पेश करने के दिन ही न्यायालय ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर दिया था। उसी दिन कोर्ट कमिश्नर ने मस्जिद पहुंचकर सर्वे भी किया था। करीब दो घंटे तक वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई थी। यह सर्वे पूरा नहीं हुआ था। 24 नवंबर को फिर से सर्वे शुरू हुआ था और इस दौरान ही बवाल हो गया था।
बवाल में दीपा सराय में हुआ था दरोगा शाह फैसल पर हमला, अब एसपी ने थाने की जिम्मेदारी दी
24 नवंबर 2024 को दीपा सराय पुलिस चौकी में दरोगा शाह फैसल की तैनाती थी। इस दिन जब बवाल हुआ तो भीड़ ने उनको घेर लिया था और बाइक में आग लगाने का प्रयास किया था। एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए थे। बवालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस बवाल में विवेचना भी शाह फैसल ने सराहनीय की थी। सोमवार को उनको ऐंचोड़ा कंबोह का थाना प्रभारी बनाया गया है। वह नरौली देहात पर प्रभारी थे। एसपी ने बताया कि बवाल की विवेचना में उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत एकत्र किए थे।