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Sambhal News: आबादी से खेतों तक बंदरों का खौफ, हर दिन बना रहे लोगों को निशाना

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:41 AM IST
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From populated areas to farms, monkeys are terrifying people, targeting them daily.
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ओबरी। असमोली क्षेत्र के गांवों में बंदरों की मौजूदगी से आमजन से लेकर किसान तक चिंतित हैं। बुजुर्गों हों या बच्चे, घर में हों या बाहर। बंदरों का खौफ इतना बढ़ गया है कि लोगों ने जरूरी काम या फसल की देखभाल के लिए अकेले जाना छोड़ दिया है। आबादी से लेकर खेतों तक बंदरों का खौफ है। इससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं।
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असमोली क्षेत्र के गांव बेला, शफातनगर, हरसिंहपुर, टांडाकोठी, खासपुर आदि गांव में बंदरों की बढ़ती संख्या से ग्रामीणों में खौफ है। हर ओर बंदर हैं। इस कारण लोगों ने अकेले खेतों पर जाना छोड़ दिया है। 26 जनवरी रविवार की सुबह शफातनगर गांव में महिलाएं सुबह के नाश्ते के लिए चाय बनाने में लगी थीं, तभी मोहम्मद उमर के ढाई वर्षीय पुत्र मोहम्मद जान को बिस्किट खाता देखकर बंदरों के झुंड ने हमला करके छत से नीचे गिरा दिया था। जिसमें उसकी मौत हो गई थी। पीड़ित पिता का कहना है कि उनका इकलौता बेटा इस दुनिया से चला गया। अब दूसरे बच्चों के साथ इस तरह की घटना न हो। इसलिए बंदरों से राहत मिलनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर इस घटना के बाद लोगों में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हैरानी की बात यह है कि इस घटना के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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खेतों में उत्पाती बंदरों ने अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। गन्ना हो या गेहूं। सरसों हो या फिर सब्जी की फसल हो सभी को चट करने के साथ तहस नहस कर रहे हैं।
-रामपाल सिंह, गांव शफातनगर
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आबादी के अंदर बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आए दिन आते जाते स्कूली छात्र छात्राओं व लोगों पर हमला करने लगे हैं। जिस कारण लोगों ने घरों से अकेले निकलना बंद हो गया है।
-मोहम्मद उमर, गांव शफातनगर।
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जिले के गांवों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ घटनाओं में भी इजाफा हो गया है। जिससे लोगों में दहशत है। ग्रामीणों ने बंदरों से निजात दिलाने की मांग उठाई है। प्रशासन को बंदर पकड़वाने चाहिए।
-सद्दाम हुसैन, गांव बेला
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गांव से लेकर शहरों और नगरों के बाजारों में बंदरों के उत्पात से व्यापारी वर्ग को खासा नुकसान हो रहा हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या पर रोक नहीं लगी तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों के लिए कामकाज करना मुश्किल हो जाएगा।
-मलखान सिंह, गांव बेला
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