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Sambhal News: गाजेबाजे के साथ निकाली कलशयात्रा
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सरायतरीन। पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव मिलक धुरैटा में स्थित परमहंस अद्वैत तपस्वी योग आश्रम में महंत कृष्णानंदपुरी त्यागी और क्षेमनाथ तीर्थ के महंत बाल योगी दीनानाथ ने कलश की विधि विधान से पूजा-अर्चना की। गाजेबाजे और डीजे के साथ भव्य 501 कलश के साथ यात्रा शुरू कराई। इसमें क्षेत्र की महिलाएं और कन्या शामिल रहीं।
मंगल कलशयात्रा आश्रम से शुरू होकर पांच गांव से होते हुए वापस आश्रम आकर संपन्न हुई। जगह-जगह गांव में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा करके यात्रा का स्वागत किया। कृष्णानंदपुरी त्यागी ने बताया कि सनातन धर्म के नए वर्ष शुरू होने से पहले भगवान की आराधना और पूजा अर्चना से ही शुरू होता है। जिसके लिए आश्रम से 501 भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई।
यह गांव मिलक धुरैटा से शुरू होकर बबैना अड्डा, मऊभूढ़, अख्यारपुर चौबे, शेरपुर की मढ़ैया और शेरपुर से होते हुए आश्रम पर ही समाप्त हुई। मान्यता है कि कलशयात्रा में शामिल होने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव और कीर्ति की वृद्धि होती है। यह समाज में एकता और भक्ति का संदेश देती है। जहां सभी भक्त मिलकर ईश्वर की आराधना करते हैं।
कलश यात्रा को पितरों के उद्धार के लिए भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कलश को रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान हरवीर यादव, कमेश शास्त्री, मोकल सिंह यादव, अमरपाल यादव धीरेंद्र यादव, सुखबीर राष्ट्रवादी, डॉ संतोष यादव, अशोक यादव, रामसेवक यादव, माधव यादव, अजीत कुमार आदि रहे।
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मंगल कलशयात्रा आश्रम से शुरू होकर पांच गांव से होते हुए वापस आश्रम आकर संपन्न हुई। जगह-जगह गांव में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा करके यात्रा का स्वागत किया। कृष्णानंदपुरी त्यागी ने बताया कि सनातन धर्म के नए वर्ष शुरू होने से पहले भगवान की आराधना और पूजा अर्चना से ही शुरू होता है। जिसके लिए आश्रम से 501 भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई।
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यह गांव मिलक धुरैटा से शुरू होकर बबैना अड्डा, मऊभूढ़, अख्यारपुर चौबे, शेरपुर की मढ़ैया और शेरपुर से होते हुए आश्रम पर ही समाप्त हुई। मान्यता है कि कलशयात्रा में शामिल होने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव और कीर्ति की वृद्धि होती है। यह समाज में एकता और भक्ति का संदेश देती है। जहां सभी भक्त मिलकर ईश्वर की आराधना करते हैं।
कलश यात्रा को पितरों के उद्धार के लिए भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कलश को रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान हरवीर यादव, कमेश शास्त्री, मोकल सिंह यादव, अमरपाल यादव धीरेंद्र यादव, सुखबीर राष्ट्रवादी, डॉ संतोष यादव, अशोक यादव, रामसेवक यादव, माधव यादव, अजीत कुमार आदि रहे।