{"_id":"6966a3ecf83e0938e208302e","slug":"rabies-immunoglobulin-serum-shortage-resolved-at-chandausi-chc-sambhal-news-c-204-1-chn1003-126009-2026-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: चंदौसी सीएचसी में दूर हुई रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: चंदौसी सीएचसी में दूर हुई रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम की कमी
विज्ञापन
विज्ञापन
चंदौसी(संभल)। कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने से गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम की कमी के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा था, लेकिन अब यह सीरम चंदौसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर उपलब्ध हो गया है। इससे गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
चंदौसी सीएचसी में प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज कुत्ते, बंदर व बिल्ली काटे के एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या कुत्ते व बंदर काटे के मरीजों की होती है। सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन तो पहले से मौजूद था, लेकिन कुत्ते व बंदर काटे के गंभीर मरीजों के लिए रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम उपलब्ध नहीं था। ऐसे मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा था, जहां उन्हें 2000 से 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब सीएचसी में रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम पहुंचने से ऐसे मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और उन्हें आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
सीएचसी के सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि अब कुत्ते काटने के गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सीएचसी को विभाग की तरफ से इम्युनोग्लोबुलिन सीरम उपलब्ध करा दिया गया है।
Trending Videos
चंदौसी सीएचसी में प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज कुत्ते, बंदर व बिल्ली काटे के एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या कुत्ते व बंदर काटे के मरीजों की होती है। सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन तो पहले से मौजूद था, लेकिन कुत्ते व बंदर काटे के गंभीर मरीजों के लिए रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम उपलब्ध नहीं था। ऐसे मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा था, जहां उन्हें 2000 से 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब सीएचसी में रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम पहुंचने से ऐसे मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और उन्हें आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीएचसी के सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि अब कुत्ते काटने के गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सीएचसी को विभाग की तरफ से इम्युनोग्लोबुलिन सीरम उपलब्ध करा दिया गया है।