{"_id":"6a6bb827d5836c62c607d576","slug":"rising-water-level-of-the-ganga-worries-farmers-water-enters-fields-sambhal-news-c-204-1-chn1011-131406-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: गंगा का बढ़ते जलस्तर से किसानों में चिंता, खेतों में घुसा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: गंगा का बढ़ते जलस्तर से किसानों में चिंता, खेतों में घुसा पानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बबराला। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का कहर मैदानी क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती गांवों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को गंगा का पानी ईसमपुर डांडा गांव के किनारे स्थित खेतों तक पहुंच गया। इससे करीब 50 से 60 किसानों की ईख और बाजरे की फसल जलमग्न हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिन तक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगी।
नरौरा बैराज से छोड़े जा रहे पानी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार की सुबह डाउन स्ट्रीम में 1,40,452 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा था, जो शाम चार बजे तक बढ़कर 1,63,181 क्यूसेक पहुंच गया। बैराज के अप स्ट्रीम में 1,78,712 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा का पानी निचले इलाकों में फैलने लगा है और तटवर्ती खेत जलमग्न होने लगे हैं।
ईसमपुर डांडा गांव के गंगा किनारे स्थित खेतों में किसान विजय कुमार, रजनेश यादव, वीरेश यादव, विजेंद्र पाल, विपिन कुमार, लखपत सिंह, प्रेमपाल सिंह और रामप्रकाश सहित करीब 50 से 60 किसानों की ईख और बाजरे की फसल में पानी भर गया है। कई किसानों का कहना है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। किसानों ने बताया कि हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से सबसे पहले तटवर्ती खेत प्रभावित होते हैं। इस बार भी पानी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ रहा है।
विज्ञापन
फिलहाल गांव की आबादी सुरक्षित है, लेकिन किसानों की निगाहें लगातार गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का बहाव और बढ़ा तो कई और खेत इसकी चपेट में आ सकते हैं। प्रशासन ने भी बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों के किसानों में चिंता का माहौल है। किसान फसलों को बचाने के लिए मौसम और जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
-- -- -- --
जिन खेतों में पानी पहुंचा है, वे गंगा के बाढ़ क्षेत्र में आते हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। राजस्व विभाग और संबंधित कर्मचारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जलस्तर में और वृद्धि होने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
- अवधेश कुमार वर्मा, उपजिलाधिकारी गुन्नौर
विज्ञापन
नरौरा बैराज से छोड़े जा रहे पानी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार की सुबह डाउन स्ट्रीम में 1,40,452 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा था, जो शाम चार बजे तक बढ़कर 1,63,181 क्यूसेक पहुंच गया। बैराज के अप स्ट्रीम में 1,78,712 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा का पानी निचले इलाकों में फैलने लगा है और तटवर्ती खेत जलमग्न होने लगे हैं।
विज्ञापन
ईसमपुर डांडा गांव के गंगा किनारे स्थित खेतों में किसान विजय कुमार, रजनेश यादव, वीरेश यादव, विजेंद्र पाल, विपिन कुमार, लखपत सिंह, प्रेमपाल सिंह और रामप्रकाश सहित करीब 50 से 60 किसानों की ईख और बाजरे की फसल में पानी भर गया है। कई किसानों का कहना है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। किसानों ने बताया कि हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से सबसे पहले तटवर्ती खेत प्रभावित होते हैं। इस बार भी पानी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ रहा है।
विज्ञापन
फिलहाल गांव की आबादी सुरक्षित है, लेकिन किसानों की निगाहें लगातार गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का बहाव और बढ़ा तो कई और खेत इसकी चपेट में आ सकते हैं। प्रशासन ने भी बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों के किसानों में चिंता का माहौल है। किसान फसलों को बचाने के लिए मौसम और जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जिन खेतों में पानी पहुंचा है, वे गंगा के बाढ़ क्षेत्र में आते हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। राजस्व विभाग और संबंधित कर्मचारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जलस्तर में और वृद्धि होने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
- अवधेश कुमार वर्मा, उपजिलाधिकारी गुन्नौर