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UP Police: कबाड़ी से वसूली में संभल एसओजी की पूरी टीम निलंबित, काम में भी फिसड्डी हैं भ्रष्ट कर्मी, जांच शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 16 Feb 2026 12:58 AM IST
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सार

इसमें प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं। कबाड़ी से 30 हजार रुपये वसूलने और उसका कबाड़ा रोकने का आरोप लगा है। एसपी ने शिकायत के आधार पर संभल के सीओ आलोक कुमार भाटी से जांच कराई। जांच में मामला सही पाया गया।

Sambhal SOG team suspended on charges of extortion from scrap dealer
संभल के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

एसओजी की पूरी टीम को एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने निलंबित कर दिया है। इसमें प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं। कबाड़ी से 30 हजार रुपये वसूलने और उसका कबाड़ा रोकने का आरोप लगा है। एसपी ने शिकायत के आधार पर संभल के सीओ आलोक कुमार भाटी से जांच कराई। जांच में मामला सही पाया गया।

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इसी क्रम में रविवार को निलंबन की कार्रवाई की गई है। एसओजी का प्रभारी एसपी ने बोबिंद्र शर्मा को बनाया है। मुरादाबाद के बिलारी निवासी कबाड़ी जफरूद्दीन अपने बेटे आस मोहम्मद के साथ 2 फरवरी की रात करीब 9 बजे मोबाइल की प्लेट का कबाड़ा लेकर संभल के लाडम सराय की ओर जा रहे थे।
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इसी दौरान एसओजी की टीम ने कबाड़ी पिता-पुत्र की बाइक को रोक लिया और संभल कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी चौधरी सराय ले आए। बिचौलियों के हस्तक्षेप के बाद मामला निपटाया गया। आरोप है कि कबाड़ी पिता-पुत्र को छोड़ने के एवज में 30 हजार रुपये वसूले गए।

साथ ही मोबाइल की प्लेट गलाकर जो धातु निकलती है उसको टीम ने अपने पास रोक लिया। रात के समय कबाड़ी पिता-पुत्र चले गए लेकिन 3 फरवरी को टीम से संपर्क किया और धातु लौटाने की बात कही। आरोप है कि टीम ने धातु से भरा कट्टा लौटाने की एवज में भी 40 हजार रुपये मांगे, जबकि कट्टे में 40 ही हजार रुपये की धातु थी। इसके बाद ही शिकायत एसपी तक पहुंची।

जांच कराने पर मामला सही पाया गया और कार्रवाई की गई है। एसपी ने बताया कि प्राथमिक जांच पड़ताल में शिकायत सही पाई गई है। इसके चलते ही प्रभारी एसआई मोहित चौधरी, हेड कांस्टेबल कुलवंत, अरशद, कांस्टेबल अजनबी, आयुष, विवेक, बृजेश और हिरेश को निलंबित कर दिया है। एसपी ने बताया कि एसओजी प्रभारी बोबिंद्र शर्मा को बनाया गया है।

कई बड़े मामलों में नाकाम रही थी निलंबित हुई एसओजी टीम
जुनावई थाना क्षेत्र में भाजपा नेता गुलफाम सिंह की हत्या का मुख्य आरोपी भी एसओजी टीम की गिरफ्त में नहीं आया था। बदायूं की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसी तरह धनारी थाना क्षेत्र में दो भाइयों की हत्या का आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और बाद में कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।

इसी तरह कैलादेवी थाना क्षेत्र में सात वर्ष की बच्ची के लापता होने के बाद भी टीम सुराग नहीं लगा सकी थी। जबकि थाना पुलिस के लिए एसओजी की अहम भूमिका रहती है। लेकिन निलंबित हुई एसओजी की टीम कई बड़े मामलों में नाकाम रही थी।

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