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Sambhal News: भक्ति, संस्कार और सत्संग से जीवन संवारने का संदेश
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चंदौसी। शक्तिनगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य शिवशंकर भारद्वाज ने अपने प्रवचन में बताया कि जीवन में सुख-दुख मन की अवस्था पर निर्भर करते हैं। उन्होंने धर्म और आचरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। कथा के दौरान भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा। बीच-बीच में हुए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
कथा वाचक शिवशंकर भारद्वाज ने बताया कि राजा परीक्षित के शासन काल में ही कलियुग का प्रवेश हो गया था। उन्होंने कहा कि सुख और दुख मन की कल्पना हैं, जितना व्यक्ति सुख को बढ़ावा देता है, उतनी ही उसकी आकांक्षाएं बढ़ती जाती हैं। बताया कि कलह के मुख्य कारण जुआ, शराब, स्त्री और धन-जमीन होते हैं। कथा के दौरान भगवान कृष्ण और विदुर-विदुरानी के प्रेम और समर्पण की कथा सुनाई गई, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो गए।
ध्रुव की कथा के माध्यम से बच्चों में बचपन से ही संस्कार देने पर जोर दिया गया। कथा वाचक ने बताया कि मनुष्य मृत्यु के समय जिस भावना के साथ शरीर त्यागता है, उसी के अनुसार उसे अगला जन्म प्राप्त होता है। कथा में रमेश अधीर, सोनू, मीरा सिंह, मंजू, महीपाल सिंह, शैलेश गुप्ता, नरेश पाठक, शालिनी, मिथलेश शर्मा, महेश पाल, वीना सिंह, अनिल गुप्ता सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा वाचक शिवशंकर भारद्वाज ने बताया कि राजा परीक्षित के शासन काल में ही कलियुग का प्रवेश हो गया था। उन्होंने कहा कि सुख और दुख मन की कल्पना हैं, जितना व्यक्ति सुख को बढ़ावा देता है, उतनी ही उसकी आकांक्षाएं बढ़ती जाती हैं। बताया कि कलह के मुख्य कारण जुआ, शराब, स्त्री और धन-जमीन होते हैं। कथा के दौरान भगवान कृष्ण और विदुर-विदुरानी के प्रेम और समर्पण की कथा सुनाई गई, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो गए।
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ध्रुव की कथा के माध्यम से बच्चों में बचपन से ही संस्कार देने पर जोर दिया गया। कथा वाचक ने बताया कि मनुष्य मृत्यु के समय जिस भावना के साथ शरीर त्यागता है, उसी के अनुसार उसे अगला जन्म प्राप्त होता है। कथा में रमेश अधीर, सोनू, मीरा सिंह, मंजू, महीपाल सिंह, शैलेश गुप्ता, नरेश पाठक, शालिनी, मिथलेश शर्मा, महेश पाल, वीना सिंह, अनिल गुप्ता सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।