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Sant Kabir Nagar News: चार सप्ताह में होगा निर्णय, फिर साफ होगी मदरसा ध्वस्तीकरण की स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 06 Feb 2026 02:07 AM IST
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संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाना के मदरसे के ध्वस्तीकरण के मामले में हाईकोर्ट की चार सप्ताह के लिए रोक से प्रबंध तंत्र को फौरी तौर पर राहत मिली है। स्थानीय न्यायालय को वाद के निस्तारण के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। उसके बाद ही मदरसा भवन के ध्वस्तीकरण की स्थिति साफ हो सकेगी।
खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी रोड मोतीनगर मोहल्ला स्थित मदरसा कुल्लियतुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी का मदरसा को नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर खलीलाबाद ने 13 जनवरी को ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही प्रबंध तंत्र को खुद मदरसा भवन निर्माण ढहाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। इस मामले में प्रबंध तंत्र ने 24 जनवरी को नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर के आदेश को डीएम न्यायालय में चुनौती दी। वहां दो फरवरी को बहस के बाद 6 फरवरी को आदेश के लिए सुरक्षित कर दिया गया।
इसी दौरान मदरसा प्रबंध तंत्र ने मामले में 28 जनवरी को हाईकोर्ट प्रयागराज का दरवाजा खटखटाया। 2 फरवरी को सुनवाई के बाद कोर्ट ने तथ्यात्मक स्थिति को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले ही एक्ट, 1958 के तहत विवादित आदेश के खिलाफ स्टे एप्लीकेशन के साथ अपील दायर की है। इसलिए यदि अपीलीय अथॉरिटी इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्टे एप्लीकेशन पर योग्यता के आधार पर फैसला करती है, तो पर्याप्त न्याय होगा।
इसके बाद, संबंधित अपील पर भी बिना किसी अनावश्यक स्थगन के पार्टियों को जल्द से जल्द योग्यता के आधार पर फैसला किया जा सकता है। स्टे एप्लीकेशन के निपटारे तक, पार्टियां आज की तारीख के अनुसार विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखेंगी और याचिकाकर्ता को भी विवादित निर्माणों पर कोई और विकास करने से रोका जाता है।
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हाईकोर्ट के आदेश का परिशीलन किया जाएगा। न्यायालय का जो भी आदेश होगा उसका अक्षरश: अनुपालन होगा। -अरुण कुमार, एसडीएम खलीलाबाद
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खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी रोड मोतीनगर मोहल्ला स्थित मदरसा कुल्लियतुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी का मदरसा को नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर खलीलाबाद ने 13 जनवरी को ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही प्रबंध तंत्र को खुद मदरसा भवन निर्माण ढहाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। इस मामले में प्रबंध तंत्र ने 24 जनवरी को नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर के आदेश को डीएम न्यायालय में चुनौती दी। वहां दो फरवरी को बहस के बाद 6 फरवरी को आदेश के लिए सुरक्षित कर दिया गया।
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इसी दौरान मदरसा प्रबंध तंत्र ने मामले में 28 जनवरी को हाईकोर्ट प्रयागराज का दरवाजा खटखटाया। 2 फरवरी को सुनवाई के बाद कोर्ट ने तथ्यात्मक स्थिति को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले ही एक्ट, 1958 के तहत विवादित आदेश के खिलाफ स्टे एप्लीकेशन के साथ अपील दायर की है। इसलिए यदि अपीलीय अथॉरिटी इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्टे एप्लीकेशन पर योग्यता के आधार पर फैसला करती है, तो पर्याप्त न्याय होगा।
इसके बाद, संबंधित अपील पर भी बिना किसी अनावश्यक स्थगन के पार्टियों को जल्द से जल्द योग्यता के आधार पर फैसला किया जा सकता है। स्टे एप्लीकेशन के निपटारे तक, पार्टियां आज की तारीख के अनुसार विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखेंगी और याचिकाकर्ता को भी विवादित निर्माणों पर कोई और विकास करने से रोका जाता है।
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हाईकोर्ट के आदेश का परिशीलन किया जाएगा। न्यायालय का जो भी आदेश होगा उसका अक्षरश: अनुपालन होगा। -अरुण कुमार, एसडीएम खलीलाबाद
