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Sant Kabir Nagar News: मेंहदावल की फर्म से केयरटेकर ने की करोड़ों रुपये की हेराफेरी

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2026 03:09 AM IST
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Caretaker embezzled crores of rupees from Menhdawal firm
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नौदरी के फर्म मालिक ने ठाकुरद्वारा निवासी व्यक्ति को कारोबार से जुड़े जीएसटी मामले के देखरेख की सौंपी थी जिम्मेदारी
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फर्म मालिक की लाॅगिन से किया गोलमाल, आरोपी के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
आरओ मशीन के सप्लायर हैं पीड़ित सुजीत

मेंहदावल। नगर क्षेत्र की एक फर्म के नाम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। फर्म के मालिक ने फर्जी बिक्री बिल जारी करने का आरोप लगाते हुए केयर टेकर पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़ित का आरोप है कि उसके जीएसटी-इनकम टैक्स लॉगिन का दुरुपयोग कर बिना जानकारी और अनुमति के यह फर्जीवाड़ा किया गया।
नौदरी के फर्म मालिक ने ठाकुरद्वारा निवासी व्यक्ति को कारोबार से जुड़े जीएसटी मामले के देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी थी। मेंहदावल की इस फर्म से फर्म मालिक की लॉगिन के माध्यम से केयरटेकर के रूप में काम देख रहे आरोपी ने काफी हेराफेरी की। तहरीर मिलने पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है।
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पुलिस को दी तहरीर में पीड़ित सुजीत गुप्ता पुत्र महेंद्र प्रसाद गुप्ता निवासी नौदरी (मालिक एसके इंटरप्राइजेज) ने बताया कि तकनीकी ज्ञान न होने से उन्होंने अपने व्यवसाय की देखरेख, इनकम टैक्स व जीएसटी मामले के कार्य का जिम्मा अर्पित कुमार पुत्र टीपी वर्मा निवासी ठाकुरद्वारा को सौंपा था। यह ठाकुरद्वारा में जीएसटी सुविधा सेंटर चलाते हैं। आरोप है कि अर्पित ने सुजीत के विश्वास का दुरुपयोग कर एसके एंटरप्राइजेज के नाम से कई फर्मों को फर्जी बिल जारी किए।
फर्जी बिलों का कुल कारोबार 23 करोड़ 76 लाख 103.39 रुपये दर्शाया गया। जीएसटी 45 लाख 29 हजार 048 रुपये है। इन बिलों का कुल इनवॉयस मूल्य 28 करोड़ 90 लाख 151.60 रुपये है, जिससे पीड़ित को भारी आर्थिक एवं कानूनी जोखिम में डाला दिया। जांच में पता चला कि फर्जी बिलों में श्री लक्ष्मी एंटरप्राइजेज (पलवल), सिंह ट्रेडर्स (दिल्ली), सुनील ट्रेडर्स (मेंहदावल), स्वास्तिक प्रिंट लाइन (दिल्ली) सहित कई फर्मों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा न्यू बाबा प्रिंटर्स व टॉन शुआ वीविंग सेंटर से फर्जी खरीद बिल भी दिखाए गए, जबकि पीड़ित का इनसे कोई लेनदेन नहीं हुआ।
पीड़ित ने बताया कि सितंबर 2025 में विभागीय जांच के दौरान उसे जानकारी मिली। जब उसने अर्पित कुमार से स्पष्टीकरण मांगा तो वह टालमटोल करने लगा। बाद में पोर्टल पर पासवर्ड व ई-मेल आईडी बदले होने की बात सामने आई, जिससे उनके मोबाइल पर ओटीपी व मैसेज नहीं आता था। 10 सितंबर 2025 को दाखिल आईटीआर में भी फर्जी आईपी एड्रेस पाया गया। पीड़ित सुजीत गुप्ता आरओ मशीन के सप्लायर हैं।
एसओ मेंहदावल सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सुजीत गुप्ता की तहरीर पर अर्पित कुमार पर जालसाजी व धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लॉगिन विवरण, आईपी एड्रेस व लेनदेन से मामला स्पष्ट हो पाएगा। साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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