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Sant Kabir Nagar News: नए सत्र में बच्चों की पढ़ाई हुई महंगी
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किताब-कॉपी और एडमिशन खर्च से अभिभावकों का बजट बिगड़ा
हर साल किताबें बदलने से बढ़ जाता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ
एक बच्चे पर 15 से 20 हजार रुपये तक आता है खर्च
स्कूल के तय दुकानों से ही खरीदनी पड़ रहीं महंगी किताबें
गोरखपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ बच्चों के एडमिशन, किताबें, कॉपियां, ड्रेस और अन्य जरूरी सामानों के बढ़ते दाम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को ज्यादा आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
शहर के बक्शीपुर निवासी शैलेश पांडेय ने बताया कि स्कूलों की ओर से हर साल किताबें और कॉपियां बदल दिए जाने से पुरानी किताबें किसी काम की नहीं रह जातीं। इसके कारण हर वर्ष पूरा सेट नया खरीदना पड़ता है। बशारतपुर निवासी रोहित ने बताया कि कई स्कूलों में किताबें केवल तय दुकानों पर ही उपलब्ध हैं, जहां कीमतें सामान्य से अधिक बताई जा रही हैं।
अभिभावक अंजली प्रजापति ने बताया कि एक बच्चे के एडमिशन से लेकर यूनिफॉर्म, जूते, बैग, कॉपी, किताबें और अन्य जरूरी सामग्री पर करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। यह खर्च क्लास सेकंड में पढ़ने वाले बच्चे पर भी आ रहा है। स्कूल फीस अलग है, जबकि किताबें और ड्रेस पर अलग से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। बच्चों की पढ़ाई जरूरी है लेकिन हर साल बढ़ते खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है।
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हर साल किताबें बदलने से बढ़ जाता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ
एक बच्चे पर 15 से 20 हजार रुपये तक आता है खर्च
स्कूल के तय दुकानों से ही खरीदनी पड़ रहीं महंगी किताबें
गोरखपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ बच्चों के एडमिशन, किताबें, कॉपियां, ड्रेस और अन्य जरूरी सामानों के बढ़ते दाम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को ज्यादा आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
शहर के बक्शीपुर निवासी शैलेश पांडेय ने बताया कि स्कूलों की ओर से हर साल किताबें और कॉपियां बदल दिए जाने से पुरानी किताबें किसी काम की नहीं रह जातीं। इसके कारण हर वर्ष पूरा सेट नया खरीदना पड़ता है। बशारतपुर निवासी रोहित ने बताया कि कई स्कूलों में किताबें केवल तय दुकानों पर ही उपलब्ध हैं, जहां कीमतें सामान्य से अधिक बताई जा रही हैं।
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अभिभावक अंजली प्रजापति ने बताया कि एक बच्चे के एडमिशन से लेकर यूनिफॉर्म, जूते, बैग, कॉपी, किताबें और अन्य जरूरी सामग्री पर करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। यह खर्च क्लास सेकंड में पढ़ने वाले बच्चे पर भी आ रहा है। स्कूल फीस अलग है, जबकि किताबें और ड्रेस पर अलग से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। बच्चों की पढ़ाई जरूरी है लेकिन हर साल बढ़ते खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है।