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Sant Kabir Nagar News: एप पर रुपये मंगाता था ठगी का शातिर धनंजय
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संतकबीरनगर। ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार धनंजय शुक्ला की जालसाजी से जुड़े नए-नए तथ्य दिन-प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि वह निवेशकों से सीधे बैंक खातों में धन जमा कराने की बजाय अपने बनाए गए एप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये रुपये मंगाता था, वाॅलेट में शो करता था, पर असल में रुपये उसके खाते में चले जाते थे।
निवेशकों को वर्चुअल वॉलेट में बढ़ता मुनाफा दिखाकर विश्वास में लिया जाता था, जबकि वास्तविकता में उनका पैसा दूसरे खातों और संपत्तियों में खपाया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार कुशीनगर के मुंडेरा उपाध्याय, हाटा निवासी धनंजय शुक्ला ने अपनी प्रेमिका रजनी के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें लोगों को कम समय में अधिक लाभ का भरोसा दिलाया जाता था। शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर भरोसा कायम किया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने रुपये निवेश कर दिए।
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पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने संतकबीरनगर के महुली क्षेत्र में कार्यालय खोलकर अपने कारोबार की शुरुआत की थी। कार्यालय को पेशेवर स्वरूप दिया गया था, जिससे लोगों को यह भरोसा हो सके कि फर्म वैध रूप से काम कर रही है। इसके बाद नेटवर्क को जिले के अन्य क्षेत्रों और पड़ोसी जनपदों तक फैलाया गया।
स्थानीय एजेंटों और सदस्यों के माध्यम से नए निवेशक जोड़े जाते थे। निवेश बढ़ाने के लिए रेफरल योजना भी चलाई गई, जिसके तहत नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन देने का प्रावधान था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों द्वारा तैयार किए गए एप में निवेशकों को उनकी जमा राशि और उस पर मिलने वाले कथित लाभ का आंकड़ा दिखाई देता था।
कई निवेशकों को शुरुआत में यह लगा कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है। इसी लालच में उन्होंने बार-बार निवेश किया और अपने परिचितों को भी योजना से जोड़ा।
जांच अधिकारियों का कहना है कि एप पर दिखाई जाने वाली रकम और वास्तविक निवेश के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं मिला है। तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
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लखनऊ के मकान की कुर्की की तैयारी, 11 को सुनवाई
विवेचना के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपियों ने ठगी से अर्जित धन से लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में एक आलीशान मकान खरीदा था। पुलिस ने मकान की कीमत करीब 90 लाख रुपये आंकी है। संपत्ति को जब्त और कुर्क करने के लिए न्यायालय में रिपोर्ट भेजी गई है। जिस पर 11 जून को सुनवाई होना बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि न्यायालय से अनुमति मिलती है तो संपत्ति को विधिक प्रक्रिया के तहत कुर्क किया जाएगा। साथ ही आरोपियों की अन्य चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।
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250 से अधिक लोगों के फंसने की आशंका
पुलिस जांच में अब तक 250 से अधिक निवेशकों की संख्या कही जा रही है। ठगी की कुल रकम 22 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए पीड़ितों के सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।
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ऐसे चलता था ठगी का खेल
- एप और वेबसाइट के जरिये निवेश कराया जाता था
- 6 से 40 प्रतिशत तक लाभ का दावा
- वर्चुअल वॉलेट में दिखाया जाता था मुनाफा
- नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान
- सदस्य जोड़ने पर अलग से कमीशन का लालच
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जांच में अब तक
- मुख्य आरोपी दंपती गिरफ्तार
- 13 लोगों के खिलाफ दर्ज है प्राथमिकी
- 250 से अधिक निवेशकों की संख्या
- 22 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी
- 90 लाख रुपये की संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया में
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पुलिस की अपील
- अवास्तविक मुनाफे के दावों से सावधान रहें
- निवेश से पहले कंपनी की वैधता की जांच करें
- केवल पंजीकृत और अधिकृत प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें
- किसी भी संदिग्ध योजना की सूचना तत्काल पुलिस को दें
निवेशकों को वर्चुअल वॉलेट में बढ़ता मुनाफा दिखाकर विश्वास में लिया जाता था, जबकि वास्तविकता में उनका पैसा दूसरे खातों और संपत्तियों में खपाया जा रहा था।
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पुलिस के अनुसार कुशीनगर के मुंडेरा उपाध्याय, हाटा निवासी धनंजय शुक्ला ने अपनी प्रेमिका रजनी के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें लोगों को कम समय में अधिक लाभ का भरोसा दिलाया जाता था। शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर भरोसा कायम किया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने रुपये निवेश कर दिए।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने संतकबीरनगर के महुली क्षेत्र में कार्यालय खोलकर अपने कारोबार की शुरुआत की थी। कार्यालय को पेशेवर स्वरूप दिया गया था, जिससे लोगों को यह भरोसा हो सके कि फर्म वैध रूप से काम कर रही है। इसके बाद नेटवर्क को जिले के अन्य क्षेत्रों और पड़ोसी जनपदों तक फैलाया गया।
स्थानीय एजेंटों और सदस्यों के माध्यम से नए निवेशक जोड़े जाते थे। निवेश बढ़ाने के लिए रेफरल योजना भी चलाई गई, जिसके तहत नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन देने का प्रावधान था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों द्वारा तैयार किए गए एप में निवेशकों को उनकी जमा राशि और उस पर मिलने वाले कथित लाभ का आंकड़ा दिखाई देता था।
कई निवेशकों को शुरुआत में यह लगा कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है। इसी लालच में उन्होंने बार-बार निवेश किया और अपने परिचितों को भी योजना से जोड़ा।
जांच अधिकारियों का कहना है कि एप पर दिखाई जाने वाली रकम और वास्तविक निवेश के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं मिला है। तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
लखनऊ के मकान की कुर्की की तैयारी, 11 को सुनवाई
विवेचना के दौरान यह जानकारी सामने आई कि आरोपियों ने ठगी से अर्जित धन से लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में एक आलीशान मकान खरीदा था। पुलिस ने मकान की कीमत करीब 90 लाख रुपये आंकी है। संपत्ति को जब्त और कुर्क करने के लिए न्यायालय में रिपोर्ट भेजी गई है। जिस पर 11 जून को सुनवाई होना बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि न्यायालय से अनुमति मिलती है तो संपत्ति को विधिक प्रक्रिया के तहत कुर्क किया जाएगा। साथ ही आरोपियों की अन्य चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।
250 से अधिक लोगों के फंसने की आशंका
पुलिस जांच में अब तक 250 से अधिक निवेशकों की संख्या कही जा रही है। ठगी की कुल रकम 22 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए पीड़ितों के सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।
ऐसे चलता था ठगी का खेल
- एप और वेबसाइट के जरिये निवेश कराया जाता था
- 6 से 40 प्रतिशत तक लाभ का दावा
- वर्चुअल वॉलेट में दिखाया जाता था मुनाफा
- नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान
- सदस्य जोड़ने पर अलग से कमीशन का लालच
जांच में अब तक
- मुख्य आरोपी दंपती गिरफ्तार
- 13 लोगों के खिलाफ दर्ज है प्राथमिकी
- 250 से अधिक निवेशकों की संख्या
- 22 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी
- 90 लाख रुपये की संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया में
पुलिस की अपील
- अवास्तविक मुनाफे के दावों से सावधान रहें
- निवेश से पहले कंपनी की वैधता की जांच करें
- केवल पंजीकृत और अधिकृत प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें
- किसी भी संदिग्ध योजना की सूचना तत्काल पुलिस को दें