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Sant Kabir Nagar News: मुल्क में अमन व आपसी भाई चारे की मांगीं दुआएं
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 04 Feb 2026 02:04 AM IST
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मदनी मस्जिद सेमरियावां में मगरिब की नमाज के बाद मगफिरत की दुआ करते लोग-संवाद
- फोटो : स्वयं
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सेमरियावां। मंगलवार की रात शब-ए-बरात पर मुसलमानों ने पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत, कुरान की तिलावत, नफिल नमाज़ पढ़ने के साथ पूर्वजों के लिए मस्जिदों और कब्रिस्तान में जाकर दुआएं मांगी और अपने गुनाहों पर प्रायश्चित किया। साथ ही देश की तरक्की, खुशहाली, दुनिया में भाई चारे व अमन चैन कायम रहने की दुआएं मांगी।
सेमरियावां ब्लॉक के करही, सेमरियावां, बाघनगर, दानोकुईयां, देवरियानासिर, उसराशहीद, दशावां, पचदेउरा, बुढ़ाननगर, तिनहरीमाफी, उंचहराकला, सेहुड़ा, दुधारा, कोहरियावां, करमाखान , सालेहपुर, चिउटना, पैड़ी, महुआरी, मूड़ाडीहाबेग, मूड़ाडीहाखुर्द, दरियाबाद, रकसा कला, लोहरौली, टेमारहमत , अगया, बजहरा , सालेहपुर आदि गांव की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते रहे। इस रात अल्लाह का जिक्र, कुरान पाक की तिलावत, तहज्जुद, नफिल नमाज पढ़ी और बुधवार को रोजा खुदा को रखा।
कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों की कब्रों पर पर फातिहा पढ़ा। मस्जिदों और घरों में गुनाहों की माफी के मगफिरत की दुआएं करते रहे। छोटे बड़े, बुजुर्ग सभी ने पूरी रात नमाज, कुरान की तिलावत और अल्लाह की इबादत में जुटे रहे। मौलाना सलमान ने बताया कि शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बरात से मिलकर बना है। जहां शब का अर्थ रात होता है तो वहीं बारात का मतलब बरी होना है। शब ए बरात गुनाहों से छुटकारा और माफी मांगने की रात है। इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। शब ए बारात के ठीक 15 दिन बाद रमजान का महीना शुरू हो जाता है।
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सेमरियावां ब्लॉक के करही, सेमरियावां, बाघनगर, दानोकुईयां, देवरियानासिर, उसराशहीद, दशावां, पचदेउरा, बुढ़ाननगर, तिनहरीमाफी, उंचहराकला, सेहुड़ा, दुधारा, कोहरियावां, करमाखान , सालेहपुर, चिउटना, पैड़ी, महुआरी, मूड़ाडीहाबेग, मूड़ाडीहाखुर्द, दरियाबाद, रकसा कला, लोहरौली, टेमारहमत , अगया, बजहरा , सालेहपुर आदि गांव की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते रहे। इस रात अल्लाह का जिक्र, कुरान पाक की तिलावत, तहज्जुद, नफिल नमाज पढ़ी और बुधवार को रोजा खुदा को रखा।
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कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों की कब्रों पर पर फातिहा पढ़ा। मस्जिदों और घरों में गुनाहों की माफी के मगफिरत की दुआएं करते रहे। छोटे बड़े, बुजुर्ग सभी ने पूरी रात नमाज, कुरान की तिलावत और अल्लाह की इबादत में जुटे रहे। मौलाना सलमान ने बताया कि शब-ए-बारात दो शब्दों शब और बरात से मिलकर बना है। जहां शब का अर्थ रात होता है तो वहीं बारात का मतलब बरी होना है। शब ए बरात गुनाहों से छुटकारा और माफी मांगने की रात है। इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। शब ए बारात के ठीक 15 दिन बाद रमजान का महीना शुरू हो जाता है।
