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Sant Kabir Nagar News: मेंहदावल में दो दिन में 30 सेमी बढ़ी राप्ती, विभाग सतर्क, जलस्तर की शुरू की निगरानी
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धनघटा में बढ़ता सरयू नदी का जलस्तर। संवाद
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मेंहदावल/लोहरैया। बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई है। मेंहदावल क्षेत्र में दो दिन में राप्ती नदी का जलस्तर 30 सेमी बढ़ा है। वहीं धनघटा इलाके में सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। यह नदी धीरे-धीरे बढ़ रही है, फिर भी गेज तक पानी पहुंच गया है। वहीं पानी बढ़ने के साथ ही विभाग ने इसकी निगरानी भी शुरू कर दी है।
मेंहदावल में 19.200 किमी लंबे तटबंध की भी ड्रेनेज खंड द्वितीय के अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है। वहीं अधिकारी जलस्तर पर भी नजर रख रहे हैं। दो दिन से राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को राप्ती नदी का जलस्तर 75 मीटर था। शनिवार को जलस्तर 75.17 मीटर पर पहुंच गया। रविवार को नदी के जलस्तर में 13 सेमी की बढ़ोतरी देखी गई।
इस तरह दो दिनों में राप्ती नदी का जलस्तर 30 सेमी बढ़ा है। सहायक अभियंता, अवर अभियंता कर्मचारियों के साथ लगातार तटबंध एवं जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में बरसात के कारण नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन बढ़ने का क्रम काफी धीमा है। दो दिनों में रात के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में जलस्तर नीचे आना शुरू हो जाएगा। फिलहाल लगातार जलस्तर की निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है।
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वहीं धनघटा इलाके में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग ने एमबीडी बांध की सुरक्षा व्यवस्था तेज कर दी है। सरैया के पास एमबीडी बांध पर रेनकट (कटाव) की भराई का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही बांध पर उगी झाड़ियों को हटाया जा रहा है, ताकि निगरानी और सुरक्षा कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
विभाग द्वारा जिन स्थानों पर बांध कमजोर की स्थिति में दिखाई दे रहा है, वहां मिट्टी का भराव कर उसे मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बरसात के दौरान सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने पर बांध की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में सरयू नदी ने तुरकौलिया के पास एमबीडी बांध को काट दिया था, जिससे द्वाबा क्षेत्र में बाढ़ का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। उस घटना के बाद से सिंचाई विभाग हर वर्ष मानसून से पहले बांध की मरम्मत और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देता है।
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ग्रामीणों ने कहा- बाढ़ आने से पहले ही प्रशासन को भूसा और पशुओं के चारे की व्यवस्था करनी चाहिए लोहरैया। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष करनपुर, गायघाट, कठहां, खरहिया, सरैया, सियरकला समेत एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे कई गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ आने पर ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर एमबीडी बांध या रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ती है। कई परिवार बाढ़ शरणालयों में भी रहने को मजबूर हो जाते हैं। इस कारण कुछ ग्रामीणों ने अभी से बांध व अन्य स्थानों पर जगह देखनी शुरू कर दी है, जहां मवेशियों को रखा जा सके।
बाढ़ का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। विद्यालय आने-जाने के लिए उन्हें नाव के सहारे जलभराव वाले क्षेत्र को पार करना पड़ता है। वहीं पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट खड़ा हो जाता है। चारों ओर पानी भरने से पशुओं के लिए चारा जुटाना कठिन हो जाता है। बाढ़ के दौरान आवागमन का एकमात्र साधन नाव होती है, लेकिन पर्याप्त नाव उपलब्ध न होने से लोगों को इंतजार करना पड़ता है। गायघाट के चंद्रभान यादव ने कहा कि बाढ़ के समय नाव पर सफर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य की जानी चाहिए, प्रशासन को बिना सेफ्टी जैकेट किसी भी यात्री को नाव पर बैठाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
मऊर के कन्हैयालाल ने कहा कि बाढ़ आने से पहले ही प्रशासन को बाढ़ प्रभावित गांवों में भूसा और पशुओं के चारे की पर्याप्त व्यवस्था पहले से ही करनी चाहिए। हर वर्ष चारे के अभाव में पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
करनपुर के रामशंकर यादव ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों की रोकथाम और मरीजों के त्वरित उपचार के लिए पहले से ही अस्थायी आरोग्य केंद्र स्थापित किए जाएं। साथ ही नियमित स्वास्थ्य शिविर और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ताकि बाढ़ के दौरान लोगों को समय पर इलाज मिल सके।
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मेंहदावल में 19.200 किमी लंबे तटबंध की भी ड्रेनेज खंड द्वितीय के अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है। वहीं अधिकारी जलस्तर पर भी नजर रख रहे हैं। दो दिन से राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को राप्ती नदी का जलस्तर 75 मीटर था। शनिवार को जलस्तर 75.17 मीटर पर पहुंच गया। रविवार को नदी के जलस्तर में 13 सेमी की बढ़ोतरी देखी गई।
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इस तरह दो दिनों में राप्ती नदी का जलस्तर 30 सेमी बढ़ा है। सहायक अभियंता, अवर अभियंता कर्मचारियों के साथ लगातार तटबंध एवं जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में बरसात के कारण नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन बढ़ने का क्रम काफी धीमा है। दो दिनों में रात के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में जलस्तर नीचे आना शुरू हो जाएगा। फिलहाल लगातार जलस्तर की निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है। तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है।
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वहीं धनघटा इलाके में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग ने एमबीडी बांध की सुरक्षा व्यवस्था तेज कर दी है। सरैया के पास एमबीडी बांध पर रेनकट (कटाव) की भराई का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही बांध पर उगी झाड़ियों को हटाया जा रहा है, ताकि निगरानी और सुरक्षा कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
विभाग द्वारा जिन स्थानों पर बांध कमजोर की स्थिति में दिखाई दे रहा है, वहां मिट्टी का भराव कर उसे मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बरसात के दौरान सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने पर बांध की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में सरयू नदी ने तुरकौलिया के पास एमबीडी बांध को काट दिया था, जिससे द्वाबा क्षेत्र में बाढ़ का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। उस घटना के बाद से सिंचाई विभाग हर वर्ष मानसून से पहले बांध की मरम्मत और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देता है।
ग्रामीणों ने कहा- बाढ़ आने से पहले ही प्रशासन को भूसा और पशुओं के चारे की व्यवस्था करनी चाहिए लोहरैया। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष करनपुर, गायघाट, कठहां, खरहिया, सरैया, सियरकला समेत एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे कई गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ आने पर ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर एमबीडी बांध या रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ती है। कई परिवार बाढ़ शरणालयों में भी रहने को मजबूर हो जाते हैं। इस कारण कुछ ग्रामीणों ने अभी से बांध व अन्य स्थानों पर जगह देखनी शुरू कर दी है, जहां मवेशियों को रखा जा सके।
बाढ़ का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। विद्यालय आने-जाने के लिए उन्हें नाव के सहारे जलभराव वाले क्षेत्र को पार करना पड़ता है। वहीं पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट खड़ा हो जाता है। चारों ओर पानी भरने से पशुओं के लिए चारा जुटाना कठिन हो जाता है। बाढ़ के दौरान आवागमन का एकमात्र साधन नाव होती है, लेकिन पर्याप्त नाव उपलब्ध न होने से लोगों को इंतजार करना पड़ता है। गायघाट के चंद्रभान यादव ने कहा कि बाढ़ के समय नाव पर सफर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य की जानी चाहिए, प्रशासन को बिना सेफ्टी जैकेट किसी भी यात्री को नाव पर बैठाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
मऊर के कन्हैयालाल ने कहा कि बाढ़ आने से पहले ही प्रशासन को बाढ़ प्रभावित गांवों में भूसा और पशुओं के चारे की पर्याप्त व्यवस्था पहले से ही करनी चाहिए। हर वर्ष चारे के अभाव में पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
करनपुर के रामशंकर यादव ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों की रोकथाम और मरीजों के त्वरित उपचार के लिए पहले से ही अस्थायी आरोग्य केंद्र स्थापित किए जाएं। साथ ही नियमित स्वास्थ्य शिविर और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ताकि बाढ़ के दौरान लोगों को समय पर इलाज मिल सके।