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Sant Kabir Nagar News: मिलावटी खाद्य सामग्री खपाने की जुगत में धंधेबाज, खरीदारी में बरतें सावधानी
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- जांच में फेल मिले हैं तेल, घी व पनीर के नमूने, विभाग फिर शुरू करेगा जांच अभियान - सरसों के तेल में पाम ऑयल मिलाकर बेच रहे धंधेबाज
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। खाद्य सामग्रियों में की जा रही मिलावट न केवल खानपान से जुड़ी चीजों की गुणवत्ता खराब कर रही है, बल्कि सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। घी, तेल, पनीर सहित अन्य खाने पीने से जुड़े सामानों में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। सहालग में धंधेबाज लाभ कमाने की जुगत में हैं। स्थिति यह है कि धंधेबाज सरसों के तेल में पाम ऑयल मिलाकर बेच रहे हैं।
विभाग अब मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए बुधवार से जांच अभियान शुरू करेगा। इसमें स्थानीय स्तर पर तैयार और बाहर से आने वाली दोनों सामग्रियों की जांच की जाएगी। सरसोंं का तेल विभिन्न तरह के पकवान बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें भी मिलावट की जा रही है। बाजार में बिकने वाला सरसोंं का तेल अब पहले जैसे नहीं रहा। मिलावटखोरों द्वारा इसमें पाम ऑयल मिलाया जा रहा है।
सहालग में इसे खपाने की तैयारी भी है। यह सेहत के लिए काफी खतरनाक है। इसका सेवन करने पर आपको कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर ठेला आदि लगाकर फास्ट फूड बेचने वाले सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग जायका लेने के चक्कर में फास्टफूड का सेवन करते हैं। जिले में ज्यादातर सरसोंं का तेल गोरखपुर से मंगाया जाता है। यह मिलावटी तेल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इससे पेट की बीमारी हो सकती है।
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पिछले साल नेपाली ब्रांड का पाम ऑयल हुआ था बरामद
छह फरवरी 2025 को खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर के मोती चौराहा स्थित एक फर्म पर छापेमारी की थी। वहां गोदाम में तीन ब्रांड के नेपाली पाम ऑयल मिले थे, जिसमें शक्ति ब्रांड का 2383 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 3,54,968 रुपये, सफारी ब्रांड का 1446 किग्रा, जिसकी कीमत 1,49,600 रुपये और न्यूट्री प्लस ब्रांड का 360 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 47,852 रुपये थी। इसे सीज कर दिया गया था। टीम ने बताया था कि तीनों ब्रांड में स्टाॅक लेबल पर आवश्यक उद्घोषणा ओमेगा-3 एवं ओमेगा-6 फैटी एसिड नहीं लिखा गया था, जिससे यह पता नहीं चल रहा था कि पाम ऑयल में कितने प्रतिशत फैट है। इसको कंपनी के जरिये छिपाया गया था। जांच में यह अधोमानक पाया गया।
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सिद्धार्थनगर, बस्ती में पकड़े गए हैं चार ब्रांड के देसी घी
देसी घी का प्रयोग लोग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए करते हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब इसमें भी मिलावट होने लगी है। पड़ोसी जनपद सिद्धार्थनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में तीन ब्रांड के देसी घी की गुणवत्ता खराब मिली है। प्रयोगशाला की जांच में नमूने फेल पाए गए। वहीं जिले में विभाग ने देसी घी के नौ नमूनों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। बस्ती में भी फेल मिले देसी घी की जिले में बिक्री पर विभाग ने निगरानी शुरू कर दी है।
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जांच में पनीर भी मिला है अधोमानक
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने पिछले साल मार्च और अप्रैल में जिले में विभिन्न जगहों से पनीर के सैंपल लिए। इसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पनीर में फैट की मात्रा नहीं थी। पाउडर और पाम ऑयल का इस्तेमाल कर पनीर तैयार किया गया। पनीर में फैट न होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। धंधेबाज पनीर में वजन बढ़ाने और सफेदी के लिए स्टार्च (अरारोट/मैदा), डिटर्जेंट की भी मिलावट करते हैं। यह नकली पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे पाचन, लीवर व किडनी में दिक्कत हो सकती है। जिले में खलीलाबाद-धनघटा रोड के कई गांवों की डेयरी में पनीर तैयार किया जाता है। मांग को देखते हुए गोरखपुर के सिकरीगंज, महादेवा व खजनी से पनीर धनघटा के रास्ते जिले के बाजारों में पहुंचता है।
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कोट,
सहालग को देखते हुए खाद्य सामग्रियों की जांच की जाएगी, जिससे लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री मिल सके। जांच के दौरान सैंपल लेकर जांच के लिए भी भेजा जाएगा।
-सतीश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन
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अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। खाद्य सामग्रियों में की जा रही मिलावट न केवल खानपान से जुड़ी चीजों की गुणवत्ता खराब कर रही है, बल्कि सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। घी, तेल, पनीर सहित अन्य खाने पीने से जुड़े सामानों में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। सहालग में धंधेबाज लाभ कमाने की जुगत में हैं। स्थिति यह है कि धंधेबाज सरसों के तेल में पाम ऑयल मिलाकर बेच रहे हैं।
विभाग अब मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए बुधवार से जांच अभियान शुरू करेगा। इसमें स्थानीय स्तर पर तैयार और बाहर से आने वाली दोनों सामग्रियों की जांच की जाएगी। सरसोंं का तेल विभिन्न तरह के पकवान बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें भी मिलावट की जा रही है। बाजार में बिकने वाला सरसोंं का तेल अब पहले जैसे नहीं रहा। मिलावटखोरों द्वारा इसमें पाम ऑयल मिलाया जा रहा है।
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सहालग में इसे खपाने की तैयारी भी है। यह सेहत के लिए काफी खतरनाक है। इसका सेवन करने पर आपको कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर ठेला आदि लगाकर फास्ट फूड बेचने वाले सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग जायका लेने के चक्कर में फास्टफूड का सेवन करते हैं। जिले में ज्यादातर सरसोंं का तेल गोरखपुर से मंगाया जाता है। यह मिलावटी तेल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इससे पेट की बीमारी हो सकती है।
पिछले साल नेपाली ब्रांड का पाम ऑयल हुआ था बरामद
छह फरवरी 2025 को खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर के मोती चौराहा स्थित एक फर्म पर छापेमारी की थी। वहां गोदाम में तीन ब्रांड के नेपाली पाम ऑयल मिले थे, जिसमें शक्ति ब्रांड का 2383 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 3,54,968 रुपये, सफारी ब्रांड का 1446 किग्रा, जिसकी कीमत 1,49,600 रुपये और न्यूट्री प्लस ब्रांड का 360 किग्रा पाम ऑयल, जिसकी कीमत 47,852 रुपये थी। इसे सीज कर दिया गया था। टीम ने बताया था कि तीनों ब्रांड में स्टाॅक लेबल पर आवश्यक उद्घोषणा ओमेगा-3 एवं ओमेगा-6 फैटी एसिड नहीं लिखा गया था, जिससे यह पता नहीं चल रहा था कि पाम ऑयल में कितने प्रतिशत फैट है। इसको कंपनी के जरिये छिपाया गया था। जांच में यह अधोमानक पाया गया।
सिद्धार्थनगर, बस्ती में पकड़े गए हैं चार ब्रांड के देसी घी
देसी घी का प्रयोग लोग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए करते हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब इसमें भी मिलावट होने लगी है। पड़ोसी जनपद सिद्धार्थनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में तीन ब्रांड के देसी घी की गुणवत्ता खराब मिली है। प्रयोगशाला की जांच में नमूने फेल पाए गए। वहीं जिले में विभाग ने देसी घी के नौ नमूनों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। बस्ती में भी फेल मिले देसी घी की जिले में बिक्री पर विभाग ने निगरानी शुरू कर दी है।
जांच में पनीर भी मिला है अधोमानक
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने पिछले साल मार्च और अप्रैल में जिले में विभिन्न जगहों से पनीर के सैंपल लिए। इसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पनीर में फैट की मात्रा नहीं थी। पाउडर और पाम ऑयल का इस्तेमाल कर पनीर तैयार किया गया। पनीर में फैट न होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। धंधेबाज पनीर में वजन बढ़ाने और सफेदी के लिए स्टार्च (अरारोट/मैदा), डिटर्जेंट की भी मिलावट करते हैं। यह नकली पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे पाचन, लीवर व किडनी में दिक्कत हो सकती है। जिले में खलीलाबाद-धनघटा रोड के कई गांवों की डेयरी में पनीर तैयार किया जाता है। मांग को देखते हुए गोरखपुर के सिकरीगंज, महादेवा व खजनी से पनीर धनघटा के रास्ते जिले के बाजारों में पहुंचता है।
कोट,
सहालग को देखते हुए खाद्य सामग्रियों की जांच की जाएगी, जिससे लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री मिल सके। जांच के दौरान सैंपल लेकर जांच के लिए भी भेजा जाएगा।
-सतीश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन

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