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Shahjahanpur News: पुनर्विवेचना के लिए इंस्पेक्टर के नाम पर 35 हजार रिश्वत लेते सिपाही गिरफ्तार
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शाहजहांपुर। जैतीपुर थाने में तैनात सिपाही और इंस्पेक्टर के हमराही विवेक कुमार को बरेली से आई एंटी करप्शन टीम ने 35 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि एक एफआईआर की पुनर्विवेचना के लिए इंस्पेक्टर के नाम पर रिश्वत मांगी गई थी। एसपी सौरभ दीक्षित ने मामला सामने आने के पांच घंटे बाद ही थाना प्रभारी अश्वनी सिंह की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
बरेली के थाना सुभाषनगर की शांति विहार कॉलोनी निवासी अखिलेश व उनका भाई अखिलेंद्र 20 दिसंबर 2024 को अपने मामा घनश्याम पाठक के जैतीपुर स्थित घर आए थे। अगले दिन अखिलेंद्र का शव क्षत-विक्षत हालत में जैतीपुर के नौगवां गोविंदपुर गांव में पड़ा मिला था। पिता मुनीश शर्मा ने हत्या का शक जताते हुए तहेरे भाई सुधांशु शर्मा समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिखाई थी।
कुछ दिन पहले इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह ने पुनर्विवेचना प्रारंभ की तो आरक्षी बुलंदशहर निवासी विवेक कुमार ने सुधांशु से संपर्क कर 50 हजार रुपये मांगे। उन्होंने गलत फंसाए जाने की बात कहते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया। इस पर आरक्षी ने जेल भिजवाने की धमकी दी तो सुधांशु ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी। बृहस्पतिवार को टीम ने थाना परिसर में रिश्वत लेते हुए विवेक को गिरफ्तार कर लिया।
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रुपये नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दे रहा था सिपाही
शाहजहांपुर। अखिलेंद्र की मौत के मामले में कई थानेदारों के बदलने के बाद भी चार्जशीट नहीं लग सकी। पुनर्विवेचना के नाम पर सिपाही ने 50 हजार रुपये मांगे थे। काफी प्रयास के बाद 35 हजार रुपये में डील हुई। रुपये नहीं देने पर वह जेल भेजने की धमकी दे रहा था।
बरेली के थाना सुभाषनगर की शांति विहार कॉलोनी निवासी मुनीश शर्मा के बेटे अखिलेश व अखिलेंद्र 20 दिसंबर 2024 को अपने मामा घनश्याम पाठक के जैतीपुर स्थित घर आए थे। अगले दिन अखिलेंद्र का शव क्षतविक्षत हालत में जैतीपुर के नौगवां गोविंदपुर गांव में पड़ा मिला था। मृतक के पिता मुनीश कुमार शर्मा ने हत्या का शक जताया था।
उन्होंने आईजी रमित शर्मा के आदेश पर अपने तहेरे भाई बदायूं के दातागंज के गांव झुकसा व वर्तमान में बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रघु वाटिका कॉलोनी इटरुआ रोड निवासी सेवानिवृत्त सैनिक सुधांशु शर्मा समेत चार लोगों को नामजद किया था। मुनीश का आरोप था कि पुरानी रंजिश के चलते चारों ने बेटे की हत्या कर वारदात को हादसे का रूप देने का प्रयास किया था।
हालांकि घटना के तार प्रेम प्रसंग से भी जोड़े जा रहे थे। अखिलेंद्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंंग आया था। शव पर मिले निशान भी एलर्जी के बताए गए थे। इसी कारण उस समय गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
गौरव त्यागी के बाद प्रिंस शर्मा ने जैतीपुर थाने की कुर्सी संभाली, लेकिन विवेचना आगे नहीं बढ़ सकी। गत दिनों चौक कोतवाली से जैतीपुर थाने गए इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह ने विवेचना प्रारंभ की तो आरक्षी विवेक कुमार ने इंस्पेक्टर के नाम से रिश्वत मांग ली। बताते हैं कि सुधांशु ने खुद को गलत फंसाए जाने की बात कहते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया।
इस पर आरक्षी ने जेल भिजवाने की धमकी दी। 15 दिन तक बातचीत होने के बाद 35 हजार रुपये पर बात बनी। इसके बाद सुधांशु ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क साधा। बृहस्पतिवार दोपहर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण सान्याल के टीम के साथ जैतीपुर थाने में आरक्षी को गिरफ्तार कर लिया।
बताते हैं कि जिस समय गिरफ्तारी हुई, तब इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह थाना परिसर में ही मौजूद थे। एंटी करप्शन टीम विवेक को पकड़कर गढि़या रंगीन थाने ले गई, जहां मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई। मृतक के पिता मुनीश ने बताया कि उनके बेटे की हत्या कर हादसे का रूप दिया गया। बेटा मजदूरी करता था। उसकी पत्नी ने भी दूसरी शादी कर ली थी। वह नौ वर्षीय पौत्री की खुद ही परवरिश कर रहे हैं।
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पहले मदनापुर थाने में लाइन हाजिर हुए थे अश्वनी
आठ जून 2024 को मदनापुर थाना क्षेत्र में गोविंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारे उसकी बाइक भी लूट ले गए थे। मामले में लापरवाही मानते हुए इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया था। वह वारदात अब तक खुल नहीं सकी है। उसके बाद कांट थाने में तैनाती मिली थी। वहां से भी लाइन भेज दिया गया था। चौक कोतवाली में तैनाती के समय इंस्पेक्टर की सिपाही से गाली-गलौज करने की ऑडियो भी वायरल हुई थी। एसपी ने यहां से हटाकर जैतीपुर भेज दिया था।
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रामेंद्र सिंह को जैतीपुर का चार्ज
थाने के अंदर आरक्षी के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एसपी ने कड़ा रुख अपनाया। एसपी सौरभ दीक्षित ने बंडा थाने के प्रभारी रामेंद्र सिंह को जैतीपुर का चार्ज दिया है। सदर बाजार थाने से एएचटीयू के प्रभारी बनाए गए ब्रजेश सिंह को बंडा थाने का प्रभार दिया गया है।
बरेली के थाना सुभाषनगर की शांति विहार कॉलोनी निवासी अखिलेश व उनका भाई अखिलेंद्र 20 दिसंबर 2024 को अपने मामा घनश्याम पाठक के जैतीपुर स्थित घर आए थे। अगले दिन अखिलेंद्र का शव क्षत-विक्षत हालत में जैतीपुर के नौगवां गोविंदपुर गांव में पड़ा मिला था। पिता मुनीश शर्मा ने हत्या का शक जताते हुए तहेरे भाई सुधांशु शर्मा समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिखाई थी।
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कुछ दिन पहले इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह ने पुनर्विवेचना प्रारंभ की तो आरक्षी बुलंदशहर निवासी विवेक कुमार ने सुधांशु से संपर्क कर 50 हजार रुपये मांगे। उन्होंने गलत फंसाए जाने की बात कहते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया। इस पर आरक्षी ने जेल भिजवाने की धमकी दी तो सुधांशु ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी। बृहस्पतिवार को टीम ने थाना परिसर में रिश्वत लेते हुए विवेक को गिरफ्तार कर लिया।
रुपये नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दे रहा था सिपाही
शाहजहांपुर। अखिलेंद्र की मौत के मामले में कई थानेदारों के बदलने के बाद भी चार्जशीट नहीं लग सकी। पुनर्विवेचना के नाम पर सिपाही ने 50 हजार रुपये मांगे थे। काफी प्रयास के बाद 35 हजार रुपये में डील हुई। रुपये नहीं देने पर वह जेल भेजने की धमकी दे रहा था।
बरेली के थाना सुभाषनगर की शांति विहार कॉलोनी निवासी मुनीश शर्मा के बेटे अखिलेश व अखिलेंद्र 20 दिसंबर 2024 को अपने मामा घनश्याम पाठक के जैतीपुर स्थित घर आए थे। अगले दिन अखिलेंद्र का शव क्षतविक्षत हालत में जैतीपुर के नौगवां गोविंदपुर गांव में पड़ा मिला था। मृतक के पिता मुनीश कुमार शर्मा ने हत्या का शक जताया था।
उन्होंने आईजी रमित शर्मा के आदेश पर अपने तहेरे भाई बदायूं के दातागंज के गांव झुकसा व वर्तमान में बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रघु वाटिका कॉलोनी इटरुआ रोड निवासी सेवानिवृत्त सैनिक सुधांशु शर्मा समेत चार लोगों को नामजद किया था। मुनीश का आरोप था कि पुरानी रंजिश के चलते चारों ने बेटे की हत्या कर वारदात को हादसे का रूप देने का प्रयास किया था।
हालांकि घटना के तार प्रेम प्रसंग से भी जोड़े जा रहे थे। अखिलेंद्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंंग आया था। शव पर मिले निशान भी एलर्जी के बताए गए थे। इसी कारण उस समय गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
गौरव त्यागी के बाद प्रिंस शर्मा ने जैतीपुर थाने की कुर्सी संभाली, लेकिन विवेचना आगे नहीं बढ़ सकी। गत दिनों चौक कोतवाली से जैतीपुर थाने गए इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह ने विवेचना प्रारंभ की तो आरक्षी विवेक कुमार ने इंस्पेक्टर के नाम से रिश्वत मांग ली। बताते हैं कि सुधांशु ने खुद को गलत फंसाए जाने की बात कहते हुए रुपये देने से इन्कार कर दिया।
इस पर आरक्षी ने जेल भिजवाने की धमकी दी। 15 दिन तक बातचीत होने के बाद 35 हजार रुपये पर बात बनी। इसके बाद सुधांशु ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क साधा। बृहस्पतिवार दोपहर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण सान्याल के टीम के साथ जैतीपुर थाने में आरक्षी को गिरफ्तार कर लिया।
बताते हैं कि जिस समय गिरफ्तारी हुई, तब इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह थाना परिसर में ही मौजूद थे। एंटी करप्शन टीम विवेक को पकड़कर गढि़या रंगीन थाने ले गई, जहां मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई। मृतक के पिता मुनीश ने बताया कि उनके बेटे की हत्या कर हादसे का रूप दिया गया। बेटा मजदूरी करता था। उसकी पत्नी ने भी दूसरी शादी कर ली थी। वह नौ वर्षीय पौत्री की खुद ही परवरिश कर रहे हैं।
पहले मदनापुर थाने में लाइन हाजिर हुए थे अश्वनी
आठ जून 2024 को मदनापुर थाना क्षेत्र में गोविंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारे उसकी बाइक भी लूट ले गए थे। मामले में लापरवाही मानते हुए इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया था। वह वारदात अब तक खुल नहीं सकी है। उसके बाद कांट थाने में तैनाती मिली थी। वहां से भी लाइन भेज दिया गया था। चौक कोतवाली में तैनाती के समय इंस्पेक्टर की सिपाही से गाली-गलौज करने की ऑडियो भी वायरल हुई थी। एसपी ने यहां से हटाकर जैतीपुर भेज दिया था।
रामेंद्र सिंह को जैतीपुर का चार्ज
थाने के अंदर आरक्षी के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एसपी ने कड़ा रुख अपनाया। एसपी सौरभ दीक्षित ने बंडा थाने के प्रभारी रामेंद्र सिंह को जैतीपुर का चार्ज दिया है। सदर बाजार थाने से एएचटीयू के प्रभारी बनाए गए ब्रजेश सिंह को बंडा थाने का प्रभार दिया गया है।