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Shahjahanpur News: स्वतंत्रता संग्राम से लेकर गणतंत्र की स्थापना तक के साक्षी रहे शिक्षण संस्थान
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चौक मण्डी स्थित एबीरिच इण्टर कॉलेज। संवाद
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शाहजहांपुर। शहर के कई शिक्षण संस्थान ऐसे हैं जो न केवल स्वतंत्रता संग्राम के साक्षी रहे बल्कि गणतंत्र की स्थापना तक का सफर पूरा किया। आजादी के बाद इन शिक्षण संस्थानों से निकलकर कई लोगों ने अपनी सफलता के जरिये जिले का नाम रोशन किया। शताब्दी का सफर पूरा करने वाले इन शिक्षण संस्थानों का बड़ा शैक्षिक योगदान है।
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बिस्मिल-अशफाक की दोस्ती का गवाह एबी रिच इंटर कॉलेज
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष व इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शहर का एबी रिच इंटर काॅलेज अपने संस्थापक लियोनार्ड एबी रिच के नाम से जाना जाता है। वह अमेरिकन मिशनरी से जुड़े थे। इस स्कूल में अध्यापन वर्ष 1857 में ही प्रारंभ हो गया था। वर्ष 1915 में लियोनार्ड एबी रिच की अगुवाई में इस स्कूल की भव्य इमारत का निर्माण संभव हुआ। इसके लिए मिशनरी ने 40 हजार तथा दानदाताओं ने 23 हजार रुपये दिए थे। यह प्रदेश के पहले हाईस्कूलों में से एक है। काकोरी एक्शन केस के अमर बलिदानी पं. राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान भी यहीं के छात्र थे। यहां उनकी मित्रता प्रगाढ़ हुई थी। 1919 तक दोनों की हाजिरी रजिस्टर पर मिलती है। उनकी याद में काॅलेज में दोनों की प्रतिमाएं लगाई गईं हैं। यहां पढ़े प्रसिद्ध छात्रों में प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना हैं जो 1968 में इस विद्यालय के छात्र थे। डाॅ. रवि मोहन, अलफलाह संस्थान के गुलाम गौस खान भी हैं।
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1885 में हुई थी जीआईसी की स्थापना
शहर के राजकीय इंटर काॅलेज की स्थापना ब्रिटिश सरकारी गजट के अनुपालन में 1885 में हुई। स्कूल का परिसर विशालकाय है तथा इमारत आज भी ब्रिटिशकाल के आर्किटेक्चर को बयां करती है। इसके परिसर को पौधे लगाकर खूब हराभरा किया गया है। नार्थ वेस्ट प्रोविंस की शिक्षा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1905 में बाबूराम लाल को साठ रुपये महीने पर यहां प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। यहां से पढ़े तथा कुछ उच्च पदों पर पहुंचे छात्रों में गोवा कैडर के सीनियर आईपीएस अशोक कुमार तिवारी है जिन्होंने 1986 में यहां से इंटर की शिक्षा प्राप्त की थी। प्रदेश सरकार में मंत्री जेपीएस राठौर सहित यहां के छात्र बहुतायत में उच्च पदों पर पहुंचे, जिनमें अनेक शिक्षक, शिक्षाविद्, अधिवक्ता, इंजीनियर आदि हैं।
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स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा एसपी इंटर कॉलेज
शहर के कटियाटोला में स्थित सरदार पटेल इंटर काॅलेज की स्थापना वर्ष 1914 में हुई थी। काॅलेज के दो भवन पुरानी बिल्डिंग और टाउनहाल रोड पर एक नया भवन है। पुरानी बिल्डिंग में एक पार्क बनाकर लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा लगाई गई है। यह काॅलेज शाहजहांपुर में लड़ी गई स्वाधीनता की लड़ाई का केंद्र रहा है। आजादी के बाद भी अनेक स्वाधीनता संग्राम सेनानी इसकी प्रबंधक कमेटी में रहे। इनमें चिरपरिचित नाम बसंत लाल खन्ना और सरदार दर्शन सिंह का है। इस काॅलेज से निकले प्रसिद्ध छात्रों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा देश के वित्त सचिव अजय सेठ, आईएएस अशोक अग्रवाल, फिल्म अभिनेता राजपाल यादव हैं। राजपाल यादव ने वर्ष 1984 ने यहां से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
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1934 में स्थापित हुआ था इस्लामिया इंटर कॉलेज
शहर के जेल रोड पर स्थित इस्लामिया इंटर काॅलेज की स्थापना खान बहादुर छोटे खान ने वर्ष 1934 में की थी। स्कूल को वर्ष 1936 में बरेली क्षेत्रीय कार्यालय से अंग्रेज, भूगोल, फारसी, उर्दू, हिंदी की कक्षाओं की मान्यता मिली, जिसे वर्ष 1937 में इलाहाबाद बोर्ड द्वारा स्थायी कर दिया गया। इन विषयों के स्वतंत्र संचालन के लिए 22 मई 1942 को नैनीताल कार्यालय द्वारा भी अंतिम स्वीकृति दी गई। वर्ष 1945 से यहां लॉजिक्स, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान की कक्षाएं प्रारंभ की गईं। इसी काॅलेज के चित्रकला विभाग के शिक्षक फिरासत खान ने काॅलेज परिसर में बड़े अक्षरों में काॅलेज का नाम अंग्रेजी में उत्कीर्ण किया है जो देखने में अरबी लगता है। इस कॉलेज से निकले प्रसिद्ध छात्रों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के नई दिल्ली स्थित सूचना मंत्रालय में उप निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे आईएएस दीपांशु अग्रवाल, केजीएमयू के न्यूरोलॉजिस्ट एवं गोल्ड मेडल प्राप्त डाॅ. अब्दुल कबीर, कृषि विश्विद्यालय मेरठ में प्रोफेसर सौरभ त्यागी आदि हैं।
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बिस्मिल-अशफाक की दोस्ती का गवाह एबी रिच इंटर कॉलेज
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष व इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शहर का एबी रिच इंटर काॅलेज अपने संस्थापक लियोनार्ड एबी रिच के नाम से जाना जाता है। वह अमेरिकन मिशनरी से जुड़े थे। इस स्कूल में अध्यापन वर्ष 1857 में ही प्रारंभ हो गया था। वर्ष 1915 में लियोनार्ड एबी रिच की अगुवाई में इस स्कूल की भव्य इमारत का निर्माण संभव हुआ। इसके लिए मिशनरी ने 40 हजार तथा दानदाताओं ने 23 हजार रुपये दिए थे। यह प्रदेश के पहले हाईस्कूलों में से एक है। काकोरी एक्शन केस के अमर बलिदानी पं. राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान भी यहीं के छात्र थे। यहां उनकी मित्रता प्रगाढ़ हुई थी। 1919 तक दोनों की हाजिरी रजिस्टर पर मिलती है। उनकी याद में काॅलेज में दोनों की प्रतिमाएं लगाई गईं हैं। यहां पढ़े प्रसिद्ध छात्रों में प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना हैं जो 1968 में इस विद्यालय के छात्र थे। डाॅ. रवि मोहन, अलफलाह संस्थान के गुलाम गौस खान भी हैं।
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1885 में हुई थी जीआईसी की स्थापना
शहर के राजकीय इंटर काॅलेज की स्थापना ब्रिटिश सरकारी गजट के अनुपालन में 1885 में हुई। स्कूल का परिसर विशालकाय है तथा इमारत आज भी ब्रिटिशकाल के आर्किटेक्चर को बयां करती है। इसके परिसर को पौधे लगाकर खूब हराभरा किया गया है। नार्थ वेस्ट प्रोविंस की शिक्षा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1905 में बाबूराम लाल को साठ रुपये महीने पर यहां प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। यहां से पढ़े तथा कुछ उच्च पदों पर पहुंचे छात्रों में गोवा कैडर के सीनियर आईपीएस अशोक कुमार तिवारी है जिन्होंने 1986 में यहां से इंटर की शिक्षा प्राप्त की थी। प्रदेश सरकार में मंत्री जेपीएस राठौर सहित यहां के छात्र बहुतायत में उच्च पदों पर पहुंचे, जिनमें अनेक शिक्षक, शिक्षाविद्, अधिवक्ता, इंजीनियर आदि हैं।
स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा एसपी इंटर कॉलेज
शहर के कटियाटोला में स्थित सरदार पटेल इंटर काॅलेज की स्थापना वर्ष 1914 में हुई थी। काॅलेज के दो भवन पुरानी बिल्डिंग और टाउनहाल रोड पर एक नया भवन है। पुरानी बिल्डिंग में एक पार्क बनाकर लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा लगाई गई है। यह काॅलेज शाहजहांपुर में लड़ी गई स्वाधीनता की लड़ाई का केंद्र रहा है। आजादी के बाद भी अनेक स्वाधीनता संग्राम सेनानी इसकी प्रबंधक कमेटी में रहे। इनमें चिरपरिचित नाम बसंत लाल खन्ना और सरदार दर्शन सिंह का है। इस काॅलेज से निकले प्रसिद्ध छात्रों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा देश के वित्त सचिव अजय सेठ, आईएएस अशोक अग्रवाल, फिल्म अभिनेता राजपाल यादव हैं। राजपाल यादव ने वर्ष 1984 ने यहां से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
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शहर के जेल रोड पर स्थित इस्लामिया इंटर काॅलेज की स्थापना खान बहादुर छोटे खान ने वर्ष 1934 में की थी। स्कूल को वर्ष 1936 में बरेली क्षेत्रीय कार्यालय से अंग्रेज, भूगोल, फारसी, उर्दू, हिंदी की कक्षाओं की मान्यता मिली, जिसे वर्ष 1937 में इलाहाबाद बोर्ड द्वारा स्थायी कर दिया गया। इन विषयों के स्वतंत्र संचालन के लिए 22 मई 1942 को नैनीताल कार्यालय द्वारा भी अंतिम स्वीकृति दी गई। वर्ष 1945 से यहां लॉजिक्स, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान की कक्षाएं प्रारंभ की गईं। इसी काॅलेज के चित्रकला विभाग के शिक्षक फिरासत खान ने काॅलेज परिसर में बड़े अक्षरों में काॅलेज का नाम अंग्रेजी में उत्कीर्ण किया है जो देखने में अरबी लगता है। इस कॉलेज से निकले प्रसिद्ध छात्रों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के नई दिल्ली स्थित सूचना मंत्रालय में उप निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे आईएएस दीपांशु अग्रवाल, केजीएमयू के न्यूरोलॉजिस्ट एवं गोल्ड मेडल प्राप्त डाॅ. अब्दुल कबीर, कृषि विश्विद्यालय मेरठ में प्रोफेसर सौरभ त्यागी आदि हैं।

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