{"_id":"6a7391d5f008b43dbe0399c1","slug":"gypsum-fertilizer-scam-conservator-of-forests-takes-cognizance-issues-directives-to-expedite-the-investigation-shahjahanpur-news-c-122-1-spn1003-180920-2026-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिप्सम खाद घोटाला : वन संंरक्षक ने लिया संज्ञान, जांच में तेजी लाने के दिए निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिप्सम खाद घोटाला : वन संंरक्षक ने लिया संज्ञान, जांच में तेजी लाने के दिए निर्देश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। वन विभाग में जिप्सम खाद की खरीद में लाखों के घोटाले का बरेली मंडल के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने संज्ञान लेते हुए नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने डीएफओ सचिन कुमार से मामले की जानकारी ली और जांच में तेजी लाने के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, जांच अधिकारी एसडीओ डॉ. सुशील कुमार ने बुधवार को डीएफओ का पत्र प्राप्त होते ही जांच शुरू कर दी।
वन विभाग की पांच वन रेंजों तिलहर, सिंधौली, जलालाबाद, सदर और खुटार में ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए लगभग पांच हजार बोरी जिप्सम खाद की खरीद की गई थी। प्रत्येक रेंज को 1000 बोरी खाद भेजी गई। प्रति बोरी 600 रुपये के हिसाब से लगभग 30 लाख रुपये की खाद मंगाई गई।
मार्च माह से गड्ढों काे खोदने के बाद भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए जिप्सम डाली जाती है, ताकि पौधा तेजी से बढ़ सके। अहम यह है कि पौधरोपण से पहले गड्ढों में जिप्सम डाली ही नहीं गई। यही नहीं, हरदोई की जिस फर्म से खाद मंगाई गई, उसने भी धांधली की। खाद के बोरों पर जहां वजन 50 किलो छपा था, उनमें खाद सिर्फ 10 से 15 किलो निकली।
विज्ञापन
एक विभागीय कर्मचारी की शिकायत पर मामला सुर्खियों में आया तो डीएफओ ने वन विभाग के उप खंड अधिकारी डॉ. सुशील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बुधवार को एसडीओ ने जांच शुरू करते हुए स्टाफ के बयान दर्ज किए।
मामले का मुख्य वन संरक्षक के स्तर से संज्ञान लिए जाने से विभागीय कर्मचारियों में खासी खलबली है। एसडीओ ने बताया कि उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच में दायरे में लाया जाएगा, जिनकी खाद की खरीद में किसी भी तरह से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष भूमिका रही होगी।
-- -
बिना वजन परखे खरीदी खाद
वन विभाग की ओर से हरदोई जिले की फर्म से खाद मंगाना संदेह के घेरे में है क्योंकि जिप्सम थोक दर पर जनपद में भी उपलब्ध है। विभाग में चर्चा है कि यहां की फर्म से खाद मंगाने में पोल खुलने के भय से हरदोई की फर्म को टेंडर देकर खाद मंगा ली गई। खास यह है कि खाद यहां डिवीजन में आने पर सदर रेंज की शक्ति पौधशाला में उतरने के बाद भी बोरों में भरी खाद के वास्तविक वजन पर गौर नहीं किया गया। बाद में अन्य चार वन रेंजों में भी बिना वजन परखे ही खाद के बोरे प्राप्त कर लिए गए।
--
जिप्सम का पौधरोपण के दौरान उपयोग न होना और बोरियों में कम वजन पाया जाना बेहद गंभीर प्रकरण है। मामला संज्ञान में आने पर मैंने डीएफओ से बात कर जांच में तेजी लाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
-पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बरेली मंडल, बरेली।
विज्ञापन
वन विभाग की पांच वन रेंजों तिलहर, सिंधौली, जलालाबाद, सदर और खुटार में ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए लगभग पांच हजार बोरी जिप्सम खाद की खरीद की गई थी। प्रत्येक रेंज को 1000 बोरी खाद भेजी गई। प्रति बोरी 600 रुपये के हिसाब से लगभग 30 लाख रुपये की खाद मंगाई गई।
विज्ञापन
मार्च माह से गड्ढों काे खोदने के बाद भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए जिप्सम डाली जाती है, ताकि पौधा तेजी से बढ़ सके। अहम यह है कि पौधरोपण से पहले गड्ढों में जिप्सम डाली ही नहीं गई। यही नहीं, हरदोई की जिस फर्म से खाद मंगाई गई, उसने भी धांधली की। खाद के बोरों पर जहां वजन 50 किलो छपा था, उनमें खाद सिर्फ 10 से 15 किलो निकली।
विज्ञापन
एक विभागीय कर्मचारी की शिकायत पर मामला सुर्खियों में आया तो डीएफओ ने वन विभाग के उप खंड अधिकारी डॉ. सुशील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बुधवार को एसडीओ ने जांच शुरू करते हुए स्टाफ के बयान दर्ज किए।
मामले का मुख्य वन संरक्षक के स्तर से संज्ञान लिए जाने से विभागीय कर्मचारियों में खासी खलबली है। एसडीओ ने बताया कि उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच में दायरे में लाया जाएगा, जिनकी खाद की खरीद में किसी भी तरह से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष भूमिका रही होगी।
बिना वजन परखे खरीदी खाद
वन विभाग की ओर से हरदोई जिले की फर्म से खाद मंगाना संदेह के घेरे में है क्योंकि जिप्सम थोक दर पर जनपद में भी उपलब्ध है। विभाग में चर्चा है कि यहां की फर्म से खाद मंगाने में पोल खुलने के भय से हरदोई की फर्म को टेंडर देकर खाद मंगा ली गई। खास यह है कि खाद यहां डिवीजन में आने पर सदर रेंज की शक्ति पौधशाला में उतरने के बाद भी बोरों में भरी खाद के वास्तविक वजन पर गौर नहीं किया गया। बाद में अन्य चार वन रेंजों में भी बिना वजन परखे ही खाद के बोरे प्राप्त कर लिए गए।
जिप्सम का पौधरोपण के दौरान उपयोग न होना और बोरियों में कम वजन पाया जाना बेहद गंभीर प्रकरण है। मामला संज्ञान में आने पर मैंने डीएफओ से बात कर जांच में तेजी लाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
-पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बरेली मंडल, बरेली।