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Shahjahanpur News: भगवान से द्रोह करने वाले को कहीं नहीं मिलती है शरण

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:00 AM IST
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One who defies God finds refuge nowhere.
श्री हरिकथा सुनातीं साध्वी सुरजीता कुमारी एवं साध्वी सुर्वा भारती। स्रोत: आयोजक
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पुवायां। गांव बिलसड़ी खुर्द में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में कथाव्यास सुरेशचंद्र मिश्र ने भरत मिलाप कथा सुनाई। कथाव्यास अरविंद दीक्षित ने जयंत की कथा सुनाई। अरविंद दीक्षित ने सुनाया कि देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने एक बार भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए कौवे के रूप में चोंच से माता सीता के पैर में प्रहार किया। माता सीता का रक्त निकलता देखकर श्रीराम ने घास के टुकड़े को अभिमंत्रित कर जयंत की ओर प्रहार किया। जयंत को किसी देवता ने शरण नहीं दी। अंत में वह श्रीराम की शरण में गए।
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श्रीराम ने जयंत के जीवन के बदले में ब्रह्मास्त्र से उनकी एक आंख ले ली। सुरेशचंद्र मिश्र ने सुनाया कि भगवान राम के वनवास के दौरान भरत ने वन जाकर उनसे वापस अयोध्या चलकर राजपाट करने की विनती की, लेकिन श्रीराम ने उनको समझाकर वापस भेज दिया। इसके बाद भरत उनकी खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राजपाट चलाते रहे। संवाद
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भगवान को बुद्धि से नहीं प्रेम से जीता जा सकता है



शाहजहांपुर। दिव्य ज्योति जागृत संस्थान की ओर से लाला रामचरण धर्मशाला में आयोजित श्री हरिकथा में साध्वी सुरजीता कुमारी एवं साध्वी सुर्वा भारती ने हरि भक्तों को माता सती की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान को बुद्धि से नहीं प्रेम से जीता जा सकता है। माता सती भगवान राम की बुद्धि से परीक्षा लेने गईं और उन्हें जो देखने को मिला उससे वह अचंभित रह गईं। भगवान राम का जीवन आज भी लोगों के लिए एक सीख है। उन्होंने एक आदर्श जीवन जीकर हर किसी को प्रेरणा दी, जिसको लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। कथा का शुभारंभ आरती पूजन कर नीरज वाजपेयी, विनोद गुप्ता, सुबोध शर्मा, मोहन ग्रोवर, शोभना गुप्ता, वीरेश्वरी शर्मा ने कराया। संवाद
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कथा व्यास ने सुनाई भक्त सुदामा की कथा



खुटार। कथा व्यास अश्विनी त्रिपाठी ने भक्त सुदामा की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा जी सांसारिक वस्तु के अभाव में गरीब थे, लेकिन वह दरिद्र नहीं थे। दरिद्र का अर्थ असंतोषी होता है। सुदामा का अर्थ होता है सु माने सुंदर, दामा माने दस इन्द्रियों सहित मन को जिसने परमात्मा में बांध दिया हो। शास्त्रों में भगवान ने कहा है कि जो भक्त मुझको जिन हाथों से फूल माला चढ़ाकर सेवा कर देता है, उस भक्त के हाथ ही मेरे हाथ है, जो मन से स्मरण करता है, उसका मन मैं ही हूं। भगवान ने सखा सुदामा का राजदरबार में जो स्वागत किया, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। श्रीकृष्ण ने प्रेमाश्रु से उनके पैर धोए और अपने सिंहासन पर बैठाया। इस कथा से संदेश मिलता है कि बिना कुछ याचना के जो भगवान का ध्यान और सत्कर्म करता है, उसे भगवान सब प्रकार से संतुष्ट कर अपने धाम में पहुंचा देते हैं। संवाद

श्री हरिकथा सुनातीं साध्वी सुरजीता कुमारी एवं साध्वी सुर्वा भारती। स्रोत: आयोजक

श्री हरिकथा सुनातीं साध्वी सुरजीता कुमारी एवं साध्वी सुर्वा भारती। स्रोत: आयोजक

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